सेल का 22 करोड़ स्वाहा, भिलाई स्टील प्लांट में सिर्फ खामी मिली टास्क फोर्स को, सेफ्टी नॉर्म्स की उड़ रही धज्जियां

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट की चहारदीवारी में सेफ्टी के नाम पर 22 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए गए। कंसल्टेंसी एजेंसी को यह रकम दी गई। लेकिन मौके पर हालात बद से बदतर हैं। यह मेरी नहीं, बल्कि बीएसपी द्वारा गठित टास्क फोर्स की नजरों के सामने है। टास्क फोर्स का एक ग्रुप जीएम सेफ्टी जीपी सिंह के नेतृत्व में कोक ओवन तो दूसरा ग्रुप ब्लास्ट फर्नेस-1 से सात तक सर्वे में जुटा है। ब्लास्ट फर्नेस में हाउस कीपिंग को लेकर सबसे ज्यादा शिकायत दर्ज की गई। ठेका मजदूरों को सेफ्टी इक्यूपमेंट उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। सकारात्मक यह रहा कि अधिकारी मानीटरिंग पर फोकस किए हुए हैं।

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दूसरी तरफ कोक ओवन में जीएम पर्सनल शीजा मैथ्यू के नेतृत्व में टीम पहुंची तो खामियों का पिटारा खुल गया। कोक ओवन के आधे हिस्से में ही सर्वे किया जा सका है, जबकि बाकी हिस्से में कल किया जाएगा। अब तक ओएचपी, प्लेट मिल, स्टील मेल्टिंग शॉप-2 व एसपी-2 में सर्वे हो चुका है। कोक ओवन की बैटरी में पुशिंग कार का केबिन गर्मी भर खराब था। 1300 डिग्री में दहकते कोयले के सामने काम करने वाले कर्मचारियों ने अपना दुखड़ा सुनाया। भीषण गर्मी से कर्मचारी जूझते रहे, लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं की गई। कोल टॉवर-2 के सामने एकमात्र शौचालय है, जिसे महिला और पुरुष कर्मचारी इस्तेमाल कर रहे हैं। महिलाओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। यहां भी हाउस कीपिंग को लेकर सवाल उठाए गए। सेफ्टी से जुड़ी कई खामियों को पकड़ा गया है।

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आप भी जानिए सर्वे में क्या बातें आई सामने

-सेफ्टी के उपकरण नहीं मिल रहे हैं। जहां मिल रहे हैं, उसकी क्वालिटी खराब है।
-रेस्ट रूम की व्यवस्था नहीं है। समुचित आराम नहीं मिलने से मजदूर तनाव में हैं।
-कार्यस्थल पर जो ठेका मजदूर काम कर रहैं है, वह एक्सपर्ट ही नहीं है। कोई ड्राइवरी करता था तो कोई खेत में काम। आज वह स्टील मेकिंग की मशीन का मरम्मत कर रहे हैं।
-ठेका मजदूरों को दो शिफ्ट में लगातार काम कराने का मामला सामने आया।
-हेलमेट की क्वालिटी हद से ज्यादा खराब मिली। 50 रुपए का हेलमेट यूज किया जा रहा। इस पर आइएसआई मार्का भी लगा है।

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-एसएमएस-2 में कांच की सफाई नहीं है। कंट्रोल रूम का एसी खराब है। कांच खराब हो चुके हैं।
-ठेका मजदूरों के एकाउंट में वेतन भेजने के बजाय हाथों में थमाने की परंपरा अब भी चल रही है।
-कई ठेका मजदूरों का इएसआई का आज तक कार्ड नहीं बना है।
-एसपी-2 के मजदूरों ने शिकायत की है कि हादसा होने के बाद ठेकेदार उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाता है।
-डीएसओ को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ विभागों में काम के लायक नहीं उन्हें डीएसओ बनाकर खानापूर्ति की जा रही है। सुरक्षा प्रथम का नारा, लेकिन इसकी जिम्मेदारी विभाग के अंतिम व्यक्ति को दी जाती है।

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