सेल नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी के खिलाफ 385 कर्मचारियों ने लिखित में की बगावत, वास्तविक पदोन्नति का डाटा नहीं है प्रबंधन के पास

प्रबंधन की तरफ से कार्मिक अधिकारी लगभग हर मुद्दे पर अध्ययन करने की बात कहते रहे। मान्यता प्राप्त यूनियन पर भी किया कटाक्ष।


पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने विवादित एनईपीपी को लागू न कर पुनः समीक्षा करने की मांग की। विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में उठा मुद्दा।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट में नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी-एनईपीपी को लेकर विवाद जारी है। अकेले रेल मिल में 385 कर्मचारियों ने बगावती तेवर दिखाते हुए प्रबंधन को हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंप दिया है।

25 जून को तत्कालीन मान्यता यूनियन एवं प्रबंधन के बीच हस्ताक्षर की गई बहु विवादित एनईपीपी को रेल मिल में लागू करने से आने वाली दिक्कतों के संदर्भ में सीटू और प्रबंधन के बीच चर्चा हुई। सीटू के प्रतिनिधियों ने 385 कर्मियों का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन प्रबंधन को सौंपते हुए इस विवादित नई पदोन्नति नीति को लागू ना करने एवं इसकी पुनः समीक्षा करने की मांग की। सीटू द्वारा मांग किए जाने पर इस पदोन्नति नीति से संबंधित सर्कुलर बीएसपी प्रबंधन द्वारा बीएसपी के इंट्रानेट में डाला गया है।

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सीटू का कहना है कि धीरे-धीरे अब कर्मियों को समझ में आ रहा है कि इसमें कर्मियों के हित में कुछ भी नहीं है और इससे होने वाली हानि अधिक है। इसीलिए इस नीति की पुनः समीक्षा करने की आवश्यकता है। बैठक में प्रबंधन को ओर से एसके छत्री-महाप्रबंधक, एनके इंगले, कोमल राम धुरंधर, एमके साहू, सुधीर सोरते, एसबी मंडल, एसके शुक्ला, जसबीर सिंह और सीटू प्रतिनिधि मंडल में सविता मालवीय, एसपी डे, अशोक खातरकर, डीवीएस रेड्डी, जेके वर्मा, केके देशमुख, रमेश दास खढ़ग, केवेंद्र सुंदर शामिल थे।

हर बात पर अध्ययन करने की बात कहता रहा प्रबंधन

चर्चा के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने नई पदोन्नति नीति के संदर्भ में बहुत से सवाल पूछे। किंतु प्रबंधन की तरफ से कार्मिक अधिकारी लगभग हर बात पर अध्ययन करने की बात कहते रहे। आईटीआई अथवा डिप्लोमा जैसे तकनीकी शिक्षा वाले कर्मियों को क्लस्टर-ए से बी में एवं बी से सी में 3 वर्ष में प्रमोशन करने के दिल्ली स्तर पर किए गए निर्णय के संदर्भ में पूछे जाने पर कार्मिक अधिकारी ने सर्कुलर के साथ उसका अध्ययन करके जवाब देने की बात कही। यूनियन प्रतिनिधियों ने पुरानी सैंक्शंड माइनिंग एवं उस सैंक्शंड माइनिंग के आधार पर मौजूदा समय में पोजिशन एवं वैकेंसी के संदर्भ में जानना चाहा, इस पर भी कार्मिक अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं था।

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वास्तविक पदोन्नति का डाटा नहीं है प्रबंधन के पास

सीटू नेताओं ने कहा कि प्रबंधन में अपने बड़बोलेपन में रेल मिल में नई पदोन्नति नीति के लागू होने से 249 लोगों को प्रमोशन मिलने की बात कर डाली, किंतु चर्चा के दौरान यह बात आई थी पूरे रेल मिल में सी क्लस्टर में जाने के लिए मात्र 19 कर्मी है। यूनियन नेता ने कहा कि पदोन्नति का मतलब क्लस्टर चेंज होने के साथ-साथ उच्च पद में पहुंचना एवं उसका आर्थिक लाभ भी मिलना होता है। इसीलिए प्रबंधन यह बताए कि रेल मिल में ऐसे कितने कर्मचारी हैं, जिनका क्लस्टर चेंज, उच्च पदनाम एवं आर्थिक लाभ तीनों प्राप्त हो रहे हो। इस पर भी प्रबंधन ने यही कहा कि फिलहाल उनके पास इसका कोई डाटा नहीं है।

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प्रबंधन ने कहा-हस्ताक्षर करने वाली यूनियन से भी तो करो सवाल

एनईपीपी के धारा एवं उप धारा पर यूनियन द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण से खीज कर एक अधिकारी ने कहा कि हस्ताक्षर करने वालों में प्रबंधन के साथ-साथ मान्यता प्राप्त यूनियन भी शामिल है। इसीलिए आप उस यूनियन के संदर्भ में भी बोलिए, जिसने चर्चा पश्चात ही पूरे सोच समझ के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। अर्थात इस नई पदोन्नति नीति के बनाने एवं हस्ताक्षर करने में प्रबंधन एवं तत्कालीन मान्यता यूनियन दोनों बराबर के भागीदार हैं।

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चार्जमैन पद विलोपित करना अनुचित

भिलाई इस्पात संयंत्र में चार्जमैन एक महत्वपूर्ण पद है। निरंतर उत्पादन प्रक्रिया वाले विभागों में यह पद ड्यूटी पोस्ट है अर्थात इस पद पर हर समय किसी न किसी व्यक्ति की ड्यूटी रहती है। यह एक ऐसा पद है, जिस पर विभिन्न कार्यों के बीच समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ उच्च प्रबंधन के साथ समन्वय भी बनाए रखने की जिम्मेदारी रहती है। समन्वय में थोड़ी सी भी त्रुटि होने से अर्थात मिस कम्युनिकेशन होने से परिणाम विध्वंसक हो सकता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद को समाप्त कर देना समझ से परे है।

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शिफ्ट के वरिष्ठ कर्मी पर होगी समन्वय की अतिरिक्त जिम्मेदारी

यूनियन का कहना है कि संशोधित पदोन्नति नीति के अनुसार शिफ्ट में जिस दिन जो कर्मी वरिष्ठ होगा, उन्हें रिकॉर्ड रखने, उच्च प्रबंधन के साथ संपर्क करने लॉग बुक लिखने आदि कार्य करना होगा। यह कार्य जिम्मेदारी एवं दक्षता का कार्य है, जो वर्तमान में चार्जमैन द्वारा किया जाता है, जिसमें निरंतरता की अत्यंत आवश्यकता है। यदि सूचना के आदान-प्रदान या समन्वय में थोड़ी सी भी चूक हुई तो परिणाम घातक हो सकता है। अतः यह कार्य आकस्मिक तौर पर किसी भी वरिष्ठ कर्मी पर थोपना ना केवल अनुचित है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी घातक है। इससे कर्मियों पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा और वे तनाव में रहेंगे।

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बढ़ाई गई है पात्रता की शर्तों को

डीवीएस रेड्‌डी का कहना है कि पदोन्नति के लिए पात्रता की शर्तों को भी बढ़ा दिया गया है। पहले सिर्फ विगत 1 वर्ष में सी ग्रेड पाने वाले कर्मचारी ही पदोन्नति पाने के लिए अपात्र होते थे, किंतु नई नीति के अनुसार विगत 3 वर्षों में किसी भी 1 वर्ष में सी ग्रेट पाने वाले कर्मचारियों के अलावा तीनों वर्ष यदि किसी भी कर्मचारी को बी ग्रेड प्राप्त हुआ है। वह भी पदोन्नति के लिए अपात्र होगा। इन शर्तों से अधिकारियों को अपनी व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित रखने या पदोन्नति देने का अधिकार मिल जाएगा, जो किसी भी तरह संयंत्र के हित में नहीं होगा।

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