शिकायत संख्या CPGRAMS-44 के तहत टीके मिश्रा नामक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को ट्रांसपोर्टर के खिलाफ शिकायत भेजी है।
- गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन को जल्द से जल्द अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए और आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के भीतर लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य करने वाले एक ट्रांसपोर्टर पर तीन हजार करोड़ रुपये की कथित लोहा चोरी की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में किए जाने के मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से 28 मई 2026 तक जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तक प्रबंधन की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।
शिकायत संख्या CPGRAMS-44 के तहत टीके मिश्रा नामक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा किस प्रकार कथित रूप से लोहा चोरी की जाती रही, इसका पूरा विवरण दिया गया है। साथ ही मामले की जांच कराने की मांग भी की गई है।
शिकायत प्राप्त होने के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने एचआर, रूल्स एंड स्ट्रेटेजिक, आरटीआई एवं सीआर विभाग के माध्यम से मार्केटिंग विभाग से स्पष्टीकरण मांगा था। विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक ने 23 मई 2026 को मार्केटिंग विभाग को पत्र भेजकर 28 मई 2026 तक जवाब देने और अपना पक्ष रखने को कहा था।
निर्धारित समय सीमा तक जवाब नहीं मिलने पर अब सामग्री प्रबंधन (मैटेरियल मैनेजमेंट) के अंतर्गत कार्यरत मार्केटिंग विभाग के मुख्य महाप्रबंधक को पुनः स्मरण पत्र (रिमाइंडर) भेजा गया है। गौरतलब है कि मार्केटिंग विभाग के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक 30 मई 2026 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि उनके ऊपर अधिशासी निदेशक (सामग्री प्रबंधन) की जिम्मेदारी है, जो 7 नवंबर 2022 से भिलाई इस्पात संयंत्र में पदस्थ हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इतनी गंभीर शिकायत पर उन्हें संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट पहल दिखाई नहीं दी है।
शिकायत में कथित लोहा चोरी के तरीके, संबंधित वाहनों की जानकारी और अन्य तथ्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिससे जांच एजेंसियों को जांच करने में आसानी हो सकती है। इसके बावजूद सामग्री प्रबंधन विभाग की ओर से जवाब देने में हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। इस मामले में जानकारों का कहना है कि गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन को जल्द से जल्द अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए और आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

