ठेका मजदूरों का एडिशनल वेलफेयर एलाउंस बेसिक में होगा मर्ज, सभी प्लांट में रखें जाएंगे ड्राप बाक्स, शोषण की दास्ता बयां कर सकेंगे ठेका मजदूर

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल के ठेका मजदूरों का शोषण रोकने के लिए एनजेसीएस सब-कमेटी के सदस्यों ने प्रबंधन को ठोस सुझाव दिया है। एडब्ल्यूए की राशि को लेकर होने वाली धांधली पर अब काफी हद तक लगाम लग जाएगी। सीटू, इंटक, एचएमएस, बीएमएस और एटक ने संयुक्त रूप से इस राशि को बेसिक में मर्ज करने की बात रखी। एडिशनल वेलफेयर एलाउंस-एडब्ल्यूए की पहचान को खत्म करके बेसिक बढ़ाने की मांग की गई, ताकि मजदूरों को पीएफ और ग्रेच्युटी आदि में बड़ी राहत मिल सके। वहीं, ठेकेदारों को इस राशि को दबाने का भी मौका नहीं मिल पाएगा।
एनजेसीएस सब-कमेटी की बैठक् गुरुवार दोपहर सवा दो बजे दिल्ली में शुरू हुई। प्र्बंधन ने प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद मजदूरों के विषयों पर चर्चा शुरू की गई। बीएमएस के डीके पांडेय ने बताया कि एडब्ल्यूए की राशि बढ़ाने को लेकर प्रबंधन को घेरा गया। साथ ही यह बोल दिया गया कि यह अलग से नहीं ली जाएगी। इसको बेसिक के साथ ही भुगतान किया जाए।
इसी बीच बोकारो इंटक के वीरेंद्र नाथ चौबे ने कहा कि जो राशि लेंगे बेसिक पर लेंगे। एडब्ल्यूए की अलग से पहचान नहीं होगी। जैसे नियमित कर्मचारियों का बेसिक बढ़ा है, वैसे ही इनका भी लेंगे। जिस पर पीएफ और ग्रेच्यटी काटा जाएगा। प्रबंधन ने श्रमिक नेताओं की बातों को सुनने के बाद कहा कि राशि को लेकर एक बार अधिकारियों के बीच मंथन किया जाएगा। इसके बाद ही यह घोषित किया जा सकेगा।
सब-कमेटी की अगली बैठक 26 मई तय की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दिन राशि घोषित कर दी जाएगी। वहीं, सेल इकाइयों में ठेका मजदूरों के शोषण पर प्रबंधन को जमकर आड़े हाथ लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बैंक एकाउंट से पैसा वापस लेने और शोषण का मामला संज्ञान में है। इस पर जल्द ही ठोस काम किया जा रहा है। हर इकाइयों में ड्राप बाक्स रखा जाएगा, जिसमें ठेका मजदूर अपनी-अपनी समस्याएं लिखकर डाल सकेंगे। पेमेंट, गेट पास, हाजिरी, बोनस आदि मुद्दे विभागवार ही हल कर लिए जाएंगे। शिकायत दर्ज कराने वाले मजदूरों की पहचान गोपनीय रहेगी।
जानिए मीटिंग में और किस पर चर्चा की गई…
-एडब्ल्यूए की राशि को बेसिक से जोड़ते ही ठेकेदार रकम दबा नहीं सकेंगे।
-सेल इकाइयों में सेफ्टी पर फोकस करना है।
-बहुत सी इकाइयों में समितियां नहीं है। सेफ्टी, प्रोडक्शन, सीपीएफ, क्वार्टर आदि में वर्करों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
-केंद्र सरकार का वेज कोड कब आएगा, यह तय नहीं है। तब तक शुरुआती वेज दिया जा सकता है।
-सेल की सभी इकाइयां सेंट्रल की यूनिट है। इसलिए सभी जगह एक जैसा पेमेंट किया जाए। प्रबंधन ने इस पर बाद में चर्चा की बात बोली।
-जॉब सिक्योरिटी पर भी बात हुई। ठेकेदार बदल जाए, लेकिन मजदूर न बदलें।
-बैंक में खाता में राशि जाने के बाद ठेकेदार द्वारा वसूली का मामला उठा। प्रबंधन ने कहा-यह सबके संज्ञान में है।
-ठेका मजदूरों के ग्रेच्युटी, पीएफ पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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