12 फरवरी हड़ताल: भिलाई स्टील प्लांट में संयुक्त ट्रेड यूनियन ने सुलगाई चिंगारी, प्रोडक्शन ठप करने की बारी

संयुक्त ट्रेड यूनियन का हड़ताल के लिए जनसंपर्क शुरू। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने बुधवार को लोको डिपो में कर्मचारियों से मुलाकात कर हड़ताल में शामिल होने की अपील की। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र सरकार द्वारा नया लेबर कोड लागू किए जाने के खिलाफ पूरे देश में मजदूर वर्ग में आक्रोश व्याप्त है। केंद्र सरकार की इस मजदूर विरोधी कानून के खिलाफ देश की 10 राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को हड़ताल का आह्वान किया है। इसी कड़ी में भिलाई की इंटक एचएमएस, सीटू, एटक, एक्टू, लोईमू एवं स्टील वर्कर्स यूनियन ने संयु

  • संयुक्त ट्रेड यूनियन का हड़ताल के लिए जनसंपर्क शुरू।
  • संयुक्त ट्रेड यूनियन ने बुधवार को लोको डिपो में कर्मचारियों से मुलाकात कर हड़ताल में शामिल होने की अपील की।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र सरकार द्वारा नया लेबर कोड लागू किए जाने के खिलाफ पूरे देश में मजदूर वर्ग में आक्रोश व्याप्त है। केंद्र सरकार की इस मजदूर विरोधी कानून के खिलाफ देश की 10 राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को हड़ताल का आह्वान किया है। इसी कड़ी में भिलाई की इंटक एचएमएस, सीटू, एटक, एक्टू, लोईमू एवं स्टील वर्कर्स यूनियन ने संयुक्त रूप से हड़ताल का नोटिस भिलाई प्रबंधन को दिया है। अब यूनियने कर्मचारियों के बीच जाकर इस नए लेबर कोड के कारण श्रमिक वर्ग पर होने वाले बुरे प्रभाव की जानकारी दे रही है। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने बुधवार को लोको डिपो कैंटीन में कर्मचारियों से मुलाकात कर उनको इस श्रमिक विरोधी कानून के बारे में जानकारी दिया एवं हड़ताल में शामिल होने की अपील की। इस दौरान सीटू से जगन्नाथ त्रिवेदी, केवेद्र सुंदर, इंटक से वंश बहादुर सिंह, शिव शंकर सिंह, एस रवि, अरविंद प्रताप सिंह, एटक से विनोद कुमार सोनी, एचएमएस से हरिराम यादव, एक्टू से बृजेंद्र तिवारी, लोईमू से सुरेंद्र मोहंती, प्रभाकर दाते, स्टील वर्कर्स यूनियन से टंडन दास सहित अन्य श्रमिक नेता उपस्थित थे। यूनियन बोली-इन लेबर कोड के लागू होने के पश्चात पड़ने वाले प्रभाव इस तरह है 1. कारखानों में 8 घंटे तक ही काम करने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी अर्थात नियोक्ता को 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम लेने का अधिकार मिल जाएगा। 2. महिला सहकर्मियों को भी रात्रि पाली में बुलाने का अधिकार प्रबंधन/नियोक्ता को मिल जाएगा। 3. बिना सूचना दिए एक दिन की अनुपस्थिति पर प्रबंधन को 8 दिन का वेतन कटौती का अधिकार मिल जाएगा। 4. बोनस तय करते समय कम्पनी को बैलेंस शीट या अन्य जानकारी ट्रेड यूनियनों को साझा करने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। 5. 300 से कम कर्मचारी वाले कारखाने फैक्ट्री एक्ट के दायरे से बाहर हो जाएंगे अब वहा स्थाई आदेश लागू नहीं होगे। इसके साथ ही ले ऑफ करने हेतु किसी भी सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। 6. कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकार के लिए विरोध प्रदर्शन इत्यादि करने पर उस पर मुकदमा चलाया जा सकेगा जबकि नियोक्ता को इससे छूट मिलेगा। 7. अब स्थाई प्रकृति की नौकरी इंटर्न, ट्रेनी, अप्रेंटिस, फिक्स टर्म एम्पलायमेंट द्वारा बदल दिए जाएंगे। 8. न्यूनतम वेतन 178/- प्रति दिन होगा जो 31 राज्यों द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम है। 9. वेतन वार्ता समितियों को समाप्त कर दिया जाएगा संयुक्त यूनियन की मांगे निम्नलिखित 1. चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए। 2. सेल कर्मचारियों का वेतन समझौता जल्द किया जाए 3. सेल कर्मियों को 39 महीने का एरियर कम भुगतान किया जाए 4.वायजाक स्टील प्लांट सहित सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बंद करें । 5. कोयला सहित लौह अयस्क खदानों का निजीकरण बंद किया जाए । 6. स्थाई कर्मियों की भर्ती किए जाए । 7. असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ठेका कर्मचारी योजना कर्मचारियों सहित सभी कर्मियों के लिए 26000 रुपए प्रतिमाह राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए । 8. स्थाई नौकरियों के लिए ठेका आउटसोर्सिंग अनुबंध आधारित भर्ती बंद किया जाए । 9. ठेका कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन के साथ सभी तरह की सुविधा दिया जाए 10. नई श्रम शक्ति नीति 2025 रद्द किया जाए 11 बिजली संशोधन विधेयक 2022 वापस लिया जाए बिजली का निजीकरण बंद हो।