अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन: पढ़ें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक से सियासी मैदान तक का सफर
दुर्ग जिले के अहिरवारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक डोमनलाल कोर्सवाडा ने हैदराबाद में ली अंतिम सांस। 34 वर्षों तक शिक्षक रहे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। अहिवारा के विधायक और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) डोमनलाल कोर्सेवाड़ा अब दुनिया में नहीं रहे। 34 वर्षों तक चाक और डस्टर थामकर नई पीढ़ी का भविष्य संवारने वाले 'गुरुजी' का निधन हो गया है। शुक्रवार दिन में हैदराबाद में उन्होंने अंतिम सांस ली। फेफड़ों में संक्रमण की बीमारी से ग्रस्त थे। 22 दिनों से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज चल रहा था।
निधन की खबर लगते ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और अहिरवारा में शोक की लहर दौड़ गई। जनवरी 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में शिक्षा विभाग में सेवा शुरू करने वाले कोर्सेवाड़ा ने करीब 34 वर्षों शिक्षक की भूमिका में रहे। 12 वर्षों तक पूर्व सांसद स्वर्गीय ताराचंद साहू के निज सहायक भी रह चुके थे। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अहिवारा विधानसभा सीट से वह पहली बार विधायक बने। साल 2013 में बीजेपी ने से टिकट नहीं मिला। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कोर्सेवाड़ा को मैदान में उतारा।
कोर्सेवाड़ा को वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गुरु घासीदास सम्मान से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2013 में उन्हें श्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार भी मिला। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा के बावजूद उनकी पहचान सहज व्यवहार और शालीनता से बनी रही। वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय क्षेत्र की जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं और मार्गदर्शकों को देते थे।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर थे। उनकी पत्नी कमला कोर्सेवाड़ा दुर्ग जिला मंडी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बेटे धनंजय कोर्सेवाड़ा गुंडरदेही जनपद पंचायत के सदस्य रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से जुड़े प्रयासों को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाने की भावना भी इसी जनसरोकार का हिस्सा रही है.। उनके लिए स्वच्छता केवल सड़कों और गलियों को साफ रखने का अभियान नहीं, बल्कि नागरिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम है, ऐसी चेतना, जिसमें हर व्यक्ति अपने गांव, अपने शहर और अपने क्षेत्र को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी महसूस करे।
एक छोटे से दायरे से निकलकर बड़े सामाजिक फलक तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा यह बताती है कि जीवन में शुरुआत भले ही साधारण हो, लेकिन संकल्प बड़ा हो तो रास्ते स्वयं विस्तृत होते जाते हैं. शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने का प्रयास किया और जनप्रतिनिधि के रूप में जनता के बीच अपनी भूमिका निभाने की कोशिश की।
गुरुजी के रूप में मिली प्रसिद्धि
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा एक उच्च शिक्षित, व्यवहार कुशल और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते हैं। एक सहायक शिक्षक के रूप में जनवरी 1972 से शिक्षा विभाग को सेवाएं देने वाले कोर्सेवाड़ा ने लगभग 34 वर्षों की शिक्षकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। यह वर्ष 2008 की बात है तब श्री कोर्सेवाड़ा शासकीय सेवा में पदोन्नत होकर 'व्याख्याता' के रूप में सेवाएं दे रहे थे, किंतु राजनीति में सक्रिय भूमिक के लिए उन्होंने अपनी शासकीय सेवा पूर्ण होने से 22 माह पहले ही त्याग पत्र देकर भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया और उसी वर्ष संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। इसके पूर्व लगभग 12 वर्ष तक उन्होंने छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रथम अध्यक्ष रहे भाजपा के लोकप्रिय और प्रभावशाली सांसद ताराचंद साहू के निज सहायक के रूप में अपनी भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वाह किया।