बोकारो स्टील प्लांट के गेट जाम, आंदोलनकारियों का झाम, मेन गेट पर लंबी लाइन, BSOA अध्यक्ष एके सिंह बोले...
बोकारो आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एके सिंह बोले-जनप्रतिनिधियों को कोई भी गंभीर कदम उठाने से पहले एक बार जरूर सबकी भावनाओं को समझना चाहिए। बीएसएल की भलाई पर टिका है बोकारो शहर।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोकारो स्टील प्लांट संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे हालात बना दिए गए हैं कि सबकी नज़र बनी हुई है। आंदोलनकारियों ने मेन गेट छोड़कर बाकी सभी गेट बंद कर दिए हैं। सिर्फ मेन गेट खुले होने के कारण सभी कार्मिक इसी गेट से जा रहे हैं। इस गेट पर दबाव बना हुआ है। ड्यूटी जाने वाले कार्मिकों की लाइन इस्पात भवन के सामने मेन रोड तक देखी गई।
विस्थापित समूहों का आंदोलन तेज हो गया है। मेन गेट छोड़कर बाकी गेटों को भोर में साढ़े 4 बजे से ही बंद कर दिया है। पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन भी मुस्तैद नज़र आ रही है। हर गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती है। आंदोलनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्वक आंदोलन चल रहा है। अगर, पुलिस ने दखल दिया तो कुछ भी हो सकता है।
बोकारो स्टील प्लांट में 9 हजार नियमित कर्मचारी, 1800 अधिकारी और करीब 22 हजार ठेका मजदूर हैं। आंदोलनकारियों ने शुक्रवार से ही गेट जाम करने की घोषणा की थी। इसको देखते हुए बीएसएल प्रबंधन ने नाइट शिफ्ट ड्यूटी पहुंचे कुछ कार्मिकों को प्लांट में ही रोक लिया है। वहीं, सुबह मेन गेट पर वाहनों की लाइन दिखी। गेट नंबर 9, 10, 11 पर आंदोलनकारी टेंट लगाकर बैठ गए हैं। तीन नंबर गेट गांव के लगा है। इसलिए यहां भी खासा माहौल नज़र आ रहा है।
बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन पहले ही साफ कर चुका है कि बातचीत से ही मुद्दे हल हो सकते हैं। पॉलिसी के खिलाफ कोई फैसला लेने का अधिकार ही नहीं है। दूसरी ओर बीएसएल आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एके सिंह ने अपील किया है गेट को जाम करने की परंपरा ठीक नहीं है। देश के लिए सेल बीएसएल काम कर रहा है।
सेल ने 10 हजार करोड़ प्रॉफिट का टार्गेट तय किया है। इस लक्ष्य में बोकारो ही अकेले ही 4 से 5 हजार करोड़ का योगदान देने में जुटा है। इस मुहिम को कमजोर मत होने दीजिए। इसमें किसी तरह की बाधा आती है तो कंपनी का नुकसान होगा। कंपनी से ही आसपास के एरिया, मार्केट, रहवासी जुड़े हैं। नुकसान का असर, सब पर आएगा। प्लांट बचेगा, तभी नौकरी भी बचेगी।
प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाने से प्रोजेक्ट में रुकावट आएगी। विस्तारीकण परियोजना में बाधा आने पर बाहर की पार्टियां पलायन करेंगी। इसका खामियाजा अकेले बोकारो सटील प्लांट नहीं, बल्कि मार्केट, संस्थानाओं और कार्मिकों को भी भुगतना पड़ जाएगा। इसलिए जनप्रतिनिधियों को कोई भी गंभीर कदम उठाने से पहले एक बार जरूर सबकी भावनाओं को समझना चाहिए।