Bhilai Steel Plant: दिवाली से पहले तत्काल दें बोनस, पैसा डकारने वाले ठेकेदारों पर हो एक्शन
सीटू बोला-बोनस की शिकायत के लिए मजदूरों के लिए हेल्प डेस्क बनाएं या रजिस्टर रखकर शिकायत दर्ज करें। ठेका श्रमिकों के बोनस पर ठेकेदारों की मनमानी बंद करवाए प्रबंधन। कानून के अनुसार पूरा बोनस देना सुनिश्चित करें।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिकों को बोनस देने के नाम पर कहीं बोनस नहीं देने, कहीं निर्धारित राशि से कम बोनस देने और कहीं बोनस खाते में डालने के बाद उसका कुछ हिस्सा वापस लेने का खेल लगातार जारी है। हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) के पदाधिकारियों को इस संबंध में विभिन्न विभागों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। नगर सेवाएं विभाग के अधीन कार्यरत टाउन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से लेकर प्लांट के अंदर पावर प्लांट, रेल मिल, मर्चेंट मिल, वायर रॉड मिल, प्लेट मिल, ब्लास्ट फर्नेस, एसएमएस, कोक ओवन, ट्रैफिक एवं डीजल विभाग सहित लगभग सभी विभागों में ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑपरेटिंग अथॉरिटीज को भी इन गतिविधियों की जानकारी रहती है, लेकिन वे इसे नजरअंदाज करते हुए अपनी जिम्मेदारी से बचते दिखाई देते हैं।
क्या कहता है बोनस कानून, क्या भुगतान करना अनिवार्य है
पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 को 1965 में लागू किया गया था। इसके अंतर्गत पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33 प्रतिशत बोनस देना अनिवार्य था, चाहे प्रतिष्ठान को लाभ हुआ हो या नहीं। वर्तमान में यह कानून मजदूरी संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019) के अध्याय चार की धारा 26 के अंतर्गत समाहित है, जो 21 नवंबर 2025 से प्रभावी है। इसके अनुसार संबंधित लेखा वर्ष में कम से कम 30 दिन काम करने वाले तथा निर्धारित वेतन सीमा के भीतर आने वाले पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33 प्रतिशत बोनस देना अनिवार्य है। अधिकतम बोनस 20 प्रतिशत तक हो सकता है। बोनस की गणना निर्धारित वैधानिक सीमा अथवा लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर होनी चाहिए।
ठेका बदलने अथवा नया ठेका लेने का बहाना बनाकर बोनस से वंचित नहीं कर सकते
सीटू स्पष्ट करना चाहता है कि कोई ठेकेदार यह बहाना नहीं बना सकता कि उसने हाल ही में ठेका लिया है, इसलिए वह श्रमिकों को बोनस नहीं देगा। इसी तरह छह महीने पहले ठेका शुरू होने की बात कहकर पात्र श्रमिकों के कानूनी अधिकार से बचा नहीं जा सकता। कानून की शर्त संबंधित लेखा वर्ष में कम से कम 30 दिन काम करने की है। ठेका बदलना श्रमिकों के वैधानिक अधिकार समाप्त करने का आधार नहीं है। सभी पात्र ठेका श्रमिकों को उनके वास्तविक कार्यकाल और निर्धारित गणना के अनुसार बोनस मिलना चाहिए।
ठेकेदार बोनस नहीं दे तो जिम्मेदारी किसकी है?
मजदूरी संहिता की धारा 43 के अनुसार यदि नियोक्ता अपने कर्मचारी को देय राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान का मालिक, कंपनी अथवा फर्म भी उस भुगतान के लिए जिम्मेदार होगा। अर्थात ठेकेदार द्वारा बोनस नहीं देने की स्थिति में भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। बोनस भुगतान के आठ महीने की वैधानिक समय सीमा का भी पालन होना चाहिए, भिलाई में अक्सर दिवाली के पहले बोनस दे दिया जाता है किंतु इस बार कई विभागों में अभी तक यह भुगतान नहीं हुआ है और जहां हुआ भी है उनमें से अधिकांश जगहों पर नियमानुसार पूरा बोनस नहीं दिया गया है । बोनस की राशि श्रमिक के खाते में डालकर उसे वापस लेने के लिए दबाव बनाना या अनुचित कटौती करना भी बंद होना चाहिए।
सीटू की मांग: हर पात्र ठेका श्रमिक को समय पर पूरा बोनस मिले
सीटू की मांग है कि भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन सभी विभागों में ठेका श्रमिकों के बोनस भुगतान की जांच कराए। प्रत्येक पात्र श्रमिक को कानून के अनुसार निर्धारित बोनस समय पर दिया जाए। ठेकेदारों से भुगतान का प्रमाण लिया जाए तथा बोनस की राशि वापस लेने या कम भुगतान करने की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो। ऑपरेटिंग अथॉरिटीज अपनी जिम्मेदारी निभाएं और श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। सीटू स्पष्ट करना चाहता है कि बोनस कोई ठेकेदार की मेहरबानी या प्रबंधन की कृपा नहीं, बल्कि पात्र श्रमिक का कानूनी अधिकार है। इस अधिकार की रक्षा करवाना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।