बोकारो बवाल: 15 हजार से ज्यादा कर्मचारी, अधिकारी प्लांट में बंधक, शासन-प्रशासन देख रहा तमाशा, BSOA बोला-हजारों कार्मिकों की जान जोखिम में

BSOA अध्यक्ष AK Singh बोले-हजारों कर्मचारी एवं अधिकारी कार्यरत हैं और प्लांट के अंदर बंधक बने हुए है। ऐसी परिस्थिति में अगर कोई बीमार पड़ता है या अन्य आवश्यक कार्य पड़ता है तो उसके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। जानमाल का नुकसान हो सकता है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। आंदोलनकारियों ने रास्ता जाम कर दिया है। कोई भी कर्मचारी-अधिकारी प्लांट से बाहर नहीं निकल पा रहे। 15 हजार से ज्यादा कार्मिकों को बंधक बना दिया गया है। कार्मिक बोल रहे-प्लांट में हम नौकरी कर रहे हैं, उनकी क्या गलती है? प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विवाद है। खामियाजा हम कार्मिक भुगत रहे हैं। शासन-प्रशासन तमाशा देख रही है। प्रबंधन और आंदोलनकारी आपस में निपटें, सजा कार्मिकों को देना कहां तक उचित है। 

बोकारो स्टील प्लांट (BSL) को लेकर जारी घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए यह सवाल उठने लगा है कि कहीं राजनीतिक खींचतान में बोकारो के विकास की गति बाधित न हो जाए। बोकारो स्टील आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एके सिंह का कहना है कि प्लांट का गेट बंद करना किसी भी परिस्थिति में उचित कदम नहीं है। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और प्लांट से जुड़े हजारों कर्मचारियों एवं अधिकारियों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।

वर्तमान समय में बाजार की स्थिति अनुकूल है, उत्पादन अपनी गति पकड़ रहा है और NSR (Net Sales Realisation) भी अच्छा बताया जा रहा है। ऐसे समय में प्लांट को पूरी क्षमता से चलाकर बेहतर मुनाफा अर्जित करने का अवसर है। इस मुनाफे का उपयोग प्लांट के आधुनिकीकरण, नए रोजगार उत्पन्न करना, तकनीकी उन्नयन और भविष्य की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में उत्पादन बाधित करना संस्थान के आर्थिक हितों के प्रतिकूल साबित हो सकता है।

इस घटनाक्रम का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी है। पर्व-त्योहारों के समय इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होना शहर के लिए चिंता का विषय है। प्लांट में हजारों कर्मचारी एवं अधिकारी कार्यरत हैं और प्लांट के अंदर बंधक बने हुए है। ऐसी परिस्थिति में अगर कोई बीमार पड़ता है या अन्य आवश्यक कार्य पड़ता है तो उसके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। जानमाल का नुकसान हो सकता है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? यदि प्लांट का संचालन प्रभावित होता है, तो उनके कार्य, सुरक्षा और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

 उत्पादन में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई कौन करेगा? 

इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। BSL के आधुनिकीकरण की योजनाएं बोकारो के औद्योगिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि वर्तमान परिस्थितियों के कारण आधुनिकीकरण के कार्य प्रभावित होते हैं, तो इसका नुकसान केवल प्लांट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बोकारो की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय व्यापार पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह भी समझना आवश्यक है कि यदि विवाद का मूल विषय नीतिगत निर्णयों से संबंधित है, तो उसका समाधान संबंधित उच्चस्तरीय मंच पर तलाशा जाना चाहिए।

नीतिगत निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं, इसलिए वहां संवाद और प्रभावी प्रतिनिधित्व के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर अफरा-तफरी पैदा करने या प्लांट का गेट बंद करने से समस्या का समाधान निकलने के बजाय परिस्थितियां और जटिल हो सकती हैं।

बोकारो की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है। यहां के लोगों की अपेक्षा है कि BSL सुचारु रूप से चलता रहे, उत्पादन बढ़े, आधुनिकीकरण समय पर पूरा हो और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो तथा कर्मचारियों के हित भी सुरक्षित रहें। 

किसी भी आंदोलन या विरोध का उद्देश्य समाधान प्राप्त करना होना चाहिए, न कि उस औद्योगिक संस्थान को नुकसान पहुंचाना, जो बोकारो की पहचान और आर्थिक जीवनरेखा है। समय की मांग है कि राजनीतिक मतभेदों और नीतिगत विवादों का समाधान संवाद, संयम और उचित मंच के माध्यम से किया जाए।

 BSL का संचालन बाधित करने के बजाय प्लांट को पूरी क्षमता से चलाना, आधुनिकीकरण को गति देना और बोकारो के विकास को प्राथमिकता देना ही सभी के हित में होगा।