Bokaro General Hospital में मिला दुनिया के सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप का डोनर, 40 लाख में एक होता है Bombay Blood Group
दुनिया के सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' की BGH में पहचान, इमरजेंसी के लिए सुरक्षित रखा गया डोनर। सेल के BGH ने हासिल की बड़ी चिकित्सा उपलब्धि, मिला दुर्लभ Bombay Blood Group। 40 लाख में एक... BGH में मिला दुनिया के सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप का डोनर, डॉक्टर भी हुए सतर्क सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) द्वारा संचालित बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के ब्लड सेंटर में जांच के दौरान दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त
- दुनिया के सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' की BGH में पहचान, इमरजेंसी के लिए सुरक्षित रखा गया डोनर।
- सेल के BGH ने हासिल की बड़ी चिकित्सा उपलब्धि, मिला दुर्लभ Bombay Blood Group।
- 40 लाख में एक... BGH में मिला दुनिया के सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप का डोनर, डॉक्टर भी हुए सतर्क
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) द्वारा संचालित बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के ब्लड सेंटर में जांच के दौरान दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' (Bombay Blood Group) की पहचान की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रक्त समूह की उपलब्धता बेहद सीमित होती है और समय पर इसकी पहचान किसी मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।
बीजीएच के ब्लड सेंटर में विशेष जांच, क्रॉस-मैचिंग और एंटीजन टेस्ट के बाद इस दुर्लभ रक्त समूह की आधिकारिक पुष्टि की गई। चिकित्सकों के अनुसार, बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Oh या HH Blood Group) विश्व के सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर यह लगभग 40 लाख लोगों में एक में पाया जाता है, जबकि भारत में इसकी मौजूदगी करीब 10 हजार लोगों में एक मानी जाती है। इस ब्लड ग्रुप की खोज वर्ष 1952 में तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) में हुई थी, इसलिए इसका नाम 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' रखा गया।
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क्यों है यह ब्लड ग्रुप इतना खास
बीजीएच के चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर लोग A, B, AB और O ब्लड ग्रुप के बारे में जानते हैं, लेकिन बॉम्बे ब्लड ग्रुप इन सबसे अलग होता है। इसमें सामान्य O ब्लड ग्रुप की तरह दिखने के बावजूद H एंटीजन नहीं होता। यही कारण है कि इस ग्रुप के मरीज को केवल बॉम्बे ब्लड ग्रुप का ही रक्त चढ़ाया जा सकता है। यदि गलती से O पॉजिटिव या O नेगेटिव रक्त चढ़ा दिया जाए तो मरीज में गंभीर और जानलेवा हेमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन हो सकता है।
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भविष्य की आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखा गया डोनर का रिकॉर्ड
बीजीएच के प्रमुख डॉ. बी.बी. करुणामय तथा लैब सर्विसेज एवं ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. अनिंदो मंडल के मार्गदर्शन में ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. कुमार अनिमेष और उनकी टीम ने इस दुर्लभ रक्तदाता का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिया है। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में यदि किसी मरीज को बॉम्बे ब्लड ग्रुप की आवश्यकता पड़े तो तत्काल उस रक्तदाता से संपर्क कर उसकी जान बचाई जा सके।
अस्पताल प्रबंधन अब संबंधित परिवार के अन्य सदस्यों की भी स्क्रीनिंग कर रहा है, क्योंकि बॉम्बे ब्लड ग्रुप एक आनुवंशिक (जेनेटिक) विशेषता है और परिवार के अन्य सदस्यों में भी इसकी संभावना हो सकती है।
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बीजीएच की आधुनिक चिकित्सा क्षमता का प्रमाण
बीजीएच प्रबंधन के अनुसार, इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप की सफल पहचान अस्पताल के ब्लड सेंटर की उन्नत जांच व्यवस्था, विशेषज्ञता और सतर्कता का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल की आधुनिक नैदानिक क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर और जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बीजीएच की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
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