Bokaro Steel Plant: बरसात से पहले घर की मरम्मत करा दीजिए साहब, वरना जर्जर आवास-करंट से जाएगी जान

योजना पहली बार वर्ष 2008 में लागू की गई थी। आवासों के लिए वार्षिक ₹800 प्रतिपूर्ति राशि मिलती थी। वर्ष 2014 में इसे संशोधित कर ₹1400 वार्षिक किया गया था। पिछले लगभग 12 वर्षों से इस राशि में कोई संशोधन नहीं। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बढ़ती महँगाई एवं वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए आवास अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन तथा बरसात के पूर्व क्वार्टरों के व्यापक मरम्मत कार्य की मांग की गई है। बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने एक मांग पत्र अधिशासी निदेशक को भेजा है, ताकि कर्मचारियों को बरसात से पहले रा

  • योजना पहली बार वर्ष 2008 में लागू की गई थी।
  • आवासों के लिए वार्षिक ₹800 प्रतिपूर्ति राशि मिलती थी।
  • वर्ष 2014 में इसे संशोधित कर ₹1400 वार्षिक किया गया था।
  • पिछले लगभग 12 वर्षों से इस राशि में कोई संशोधन नहीं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बढ़ती महँगाई एवं वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए आवास अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन तथा बरसात के पूर्व क्वार्टरों के व्यापक मरम्मत कार्य की मांग की गई है। बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने एक मांग पत्र अधिशासी निदेशक को भेजा है, ताकि कर्मचारियों को बरसात से पहले राहत मिले सके। बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा पूर्व में कर्मचारियों के आवासों में होने वाले छोटे अनुरक्षण कार्यों को बंद कर उसके स्थान पर आवास अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि प्रदान करने की व्यवस्था लागू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को अपने आवासों के सामान्य रख-रखाव एवं आवश्यक मरम्मत कार्यों हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था। इस योजना के अंतर्गत विद्युत अनुरक्षण में स्विच, होल्डर, सॉकेट, फैन रेगुलेटर, कंडेंसर, कॉल बेल, ट्यूब लाइट, चोक, कैपेसिटर आदि के बदलाव एवं मरम्मत का प्रावधान था। वहीं सिविल एवं पब्लिक हेल्थ अनुभाग के अंतर्गत बीब कॉक, पिलर कॉक, स्टॉप कॉक, वाश बेसिन, सिंक, टॉवल रेल, शावर, जाम दरवाजे-खिड़कियों की मरम्मत, ओवरहेड टैंक सफाई आदि कार्य शामिल थे। अध्यक्ष दिलीप कुमार ने बताया यह योजना पहली बार वर्ष 2008 में लागू की गई थी, जिसमें डी, ई एवं एफ प्रकार के आवासों हेतु वार्षिक ₹800 प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई थी। तत्पश्चात वर्ष 2014 में इसे संशोधित कर ₹1400 वार्षिक किया गया। लेकिन अत्यंत खेद का विषय है कि पिछले लगभग 12 वर्षों से इस राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है। वर्तमान समय में महँगाई, निर्माण सामग्री, बिजली उपकरण, प्लंबिंग सामग्री, पेंट, मजदूरी एवं अनुरक्षण खर्च में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। आज की स्थिति में ₹1400 में वर्षभर के सामान्य अनुरक्षण कार्य भी संभव नहीं हैं। छोटी-छोटी मरम्मतों पर ही हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। कर्मचारियों को मजबूरी में अपने वेतन से अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। साथ ही, कई कर्मचारियों के क्वार्टर अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुँच चुके हैं। वर्षों से समुचित पेंटिंग, टाइल्स कार्य एवं आवश्यक मरम्मत नहीं होने के कारण कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्वार्टरों के बाथरूम एवं किचन की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। यूनियन ने प्रबंधन के सामने निम्नलिखित मांग किया 1. आवास अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि को वर्तमान महँगाई एवं वास्तविक खर्च को देखते हुए संशोधित किया जाए। 2. सभी गैर-कार्यपालक कर्मचारियों (प्रशिक्षु कर्मचारियों सहित) को न्यूनतम ₹5000 अर्द्धवार्षिक (Half-Yearly) आवास अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए। 3. प्रतिपूर्ति राशि को भविष्य में महँगाई सूचकांक (Inflation Index) से जोड़ा जाए ताकि समय-समय पर स्वतः संशोधन हो सके। 4. महारत्न कंपनी के मानकों के अनुरूप एक विशेष आवास सुधार अभियान चलाकर सभी कर्मचारियों के क्वार्टरों में बाथरूम एवं किचन में आधुनिक टाइल्स लगाया जाए। -पूरे क्वार्टर की गुणवत्तापूर्ण पेंटिंग कराई जाए। -खराब दरवाजे, खिड़कियाँ, पाइपलाइन एवं विद्युत वायरिंग बदली जाए। -जर्जर शौचालय एवं जल निकासी व्यवस्था का नवीनीकरण किया जाए। 5. पुराने एवं अत्यधिक क्षतिग्रस्त क्वार्टरों के लिए विशेष Renovation Policy लागू की जाए। 6. आवास अनुरक्षण के लिए शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए अलग Fast Response Maintenance Team बनाई जाए। उपाध्यक्ष कृष्णा कुमार रजवार ने कहा कर्मचारियों को बेहतर एवं सुरक्षित आवास सुविधा प्रदान करना केवल कल्याणकारी कदम नहीं बल्कि संस्थान की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है। यदि कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को सम्मानजनक आवासीय वातावरण मिलेगा, तो उनका मनोबल एवं कार्यक्षमता दोनों बढ़ेगी। कार्यवाहक महासचिव माणिक राम मुंडा का कहना है कि महारत्न कंपनी के कर्मी हैं, लेकिन आज भी उन्हें सामान्य कंपनियों से भी बदतर आवासीय सुविधाओं में जीवन यापन करना पड़ रहा है। वर्षों से क्वार्टरों की मरम्मत, पेंटिंग एवं मूलभूत अनुरक्षण की उपेक्षा के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि प्रबंधन महँगाई एवं वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए अनुरक्षण प्रतिपूर्ति राशि में तत्काल संशोधन करे तथा महारत्न कंपनियों के मानकों के अनुरूप सभी कर्मचारियों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध कराए।