बोकारो स्टील प्लांट: इस बार विस्थापितों के बवाल से BSL को 30 करोड़ का नुकसान, अब विधायक की भूख हड़ताल समाप्त, पढ़ें डिटेल

बोकारो DC की अध्यक्षता में विस्थापितों और BSL प्रबंधन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति, सात दिन में राज्य सरकार और सेल चेयरमैन तक पहुंचेंगे प्रस्ताव; चौथी श्रेणी के पदों पर नियुक्ति नीति बनाने की पहल होगी।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में विस्थापितों को नौकरी देने की मांग को लेकर चले आंदोलन और हंगामे के बाद अब समाधान की दिशा में पहल हुई है। नौकरी की मांग को लेकर विधायक श्वेता सिंह की भूख हड़ताल समाप्त हो गई है। 21 अक्टूबर को बोकारो के उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, बीएसएल प्रबंधन और विस्थापित संघ के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। बैठक में विस्थापित परिवारों के सदस्यों की स्थायी नियुक्ति के लिए नीति बनाने और बीएसएल में प्रशिक्षित 1500 विस्थापित अभ्यर्थियों को स्थायी रोजगार देने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। विधायक ने भूख हड़ताल को खत्म कर दिया, लेकिन अब भी कुछ समूहों के लोग आंदोलन को जारी रखने की बात कर रहे हैं। 

विस्थापित अप्रेंटिस संघ के बैनर तले टू-टैंक पर भूख हड़ताल चल रही थी। विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से प्राप्त प्रस्तावों को सात दिनों के भीतर राज्य सरकार के गृह विभाग और झारखंड सरकार के मुख्य सचिव तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसी तरह बीएसएल प्रबंधन को भी सात दिनों के भीतर सेल के चेयरमैन के समक्ष प्रस्ताव भेजना होगा।

गौरतलब है कि नौकरी की मांग को लेकर विस्थापितों के आंदोलन के दौरान बीएसएल के कामकाज पर असर पड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम से संयंत्र को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि वार्ता में बनी सहमति को नियुक्ति की ठोस प्रक्रिया में कब बदला जाता है।

1500 प्रशिक्षित विस्थापितों की स्थायी नियुक्ति का प्रस्ताव

त्रिपक्षीय बैठक में सबसे अहम बिंदु बीएसएल में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 1500 विस्थापित अभ्यर्थियों को स्थायी नियुक्ति देने का प्रस्ताव रहा। बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से इस संबंध में प्रस्ताव उपायुक्त, बोकारो और बीएसएल के निदेशक प्रभारी तक पहुंचाया जाएगा।

इस प्रस्ताव को सात दिनों के भीतर झारखंड सरकार के मुख्य सचिव के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। वहीं, बीएसएल प्रबंधन को भी निर्धारित अवधि में प्रस्ताव सेल चेयरमैन के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

हालांकि, 1500 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अभी अंतिम रूप से घोषित नहीं हुई है। बैठक में नियुक्ति का प्रस्ताव आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नियुक्ति की वास्तविक प्रक्रिया, पात्रता, पदों की संख्या और समयसीमा पर आगे होने वाले निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।

विस्थापित परिवारों के सदस्यों के लिए बनेगी नियुक्ति नीति

बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा विस्थापित परिवारों के सदस्यों को रोजगार देने की नीति तैयार करना रहा। कार्यवृत्त के मुताबिक, बीएसएल प्रबंधन के अधीन चौथी श्रेणी के पदों पर स्थायी नियुक्ति के संबंध में नीति बनाए जाने का प्रस्ताव विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से रखा जाएगा। इस प्रस्ताव को उपायुक्त, बोकारो और बीएसएल के निदेशक प्रभारी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद इसे राज्य सरकार के मुख्य सचिव तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस मुद्दे पर विस्थापित परिवारों की लंबे समय से चली आ रही रोजगार संबंधी मांगों के समाधान की उम्मीद बनी है। हालांकि, नीति बनने और उसके लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने परिवारों को और किन शर्तों पर इसका लाभ मिलेगा।

सात दिन में सेल चेयरमैन और राज्य सरकार तक पहुंचेंगे प्रस्ताव

बैठक में प्रस्तावों पर कार्रवाई के लिए दो स्तरों पर समयसीमा तय की गई।

राज्य सरकार के स्तर पर: विधायक श्वेता सिंह के माध्यम से प्राप्त दोनों प्रस्तावों को सात दिनों के भीतर गृह विभाग, झारखंड सरकार के माध्यम से मुख्य सचिव तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

बीएसएल प्रबंधन के स्तर पर: बीएसएल प्रबंधन को दोनों प्रस्ताव सात दिनों के भीतर सेल चेयरमैन के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

यह सहमति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे विस्थापितों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दे जिला स्तर की बैठक से आगे बढ़कर राज्य सरकार और सेल के शीर्ष प्रबंधन के समक्ष पहुंचेंगे। अब देखना होगा कि निर्धारित समयसीमा में प्रस्ताव भेजे जाते हैं या नहीं और उन पर क्या निर्णय लिया जाता है।

आंदोलन और भूख हड़ताल खत्म, अब फैसले का इंतजार

बोकारो स्टील प्लांट में नौकरी की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन तनावपूर्ण स्थिति तक पहुंच गया था। इस बीच विधायक श्वेता सिंह ने भी भूख हड़ताल की। इसके बाद जिला प्रशासन की पहल पर विस्थापित प्रतिनिधियों और बीएसएल प्रबंधन के बीच बातचीत हुई।

21 अक्टूबर की बैठक में प्रस्तावों पर सहमति बनने के बाद भूख हड़ताल समाप्त हो गई। हालांकि, आंदोलन का तत्काल समाप्त होना और स्थायी नियुक्ति का रास्ता खुलना दो अलग-अलग चरण हैं। फिलहाल बैठक के कार्यवृत्त में नियुक्ति नीति तैयार करने और 1500 प्रशिक्षित विस्थापितों की नियुक्ति के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की बात दर्ज है।

अब विस्थापित परिवारों की निगाहें सात दिनों की समयसीमा और सेल प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और नियुक्ति नीति बनती है, तो यह बोकारो के विस्थापितों के रोजगार संबंधी मुद्दे पर महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।