विस्थापितों के बवाल से बोकारो स्टील प्लांट को 30 करोड़ का नुकसान, हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने खाली कराया जाम
विस्थापितों ने बीएसएल प्रबंधन और डीसी पर उतारा गुस्सा। कहा-आंदोलन की नई तारीख जल्द की जाएगी घोषित। विस्थापित परिवार आंदोलन के लिए तैयार रहें।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल बोकारो स्टील प्लांट को विस्थापित समूहों के आंदोलन के चलते 30 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया है। राष्ट्रीय संपत्ति को लगी चपत की भरपाई कर पाना मुश्किल है। प्रशासन और प्रशासन के रवैये को देखते हुए बीएसएल प्रबंधन झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। जहां से राहत मिली और डीसी और एसपी को वर्चुअल पेश होना पड़ा। कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद आनन-फानन में प्रशासन ने मेन मेट को खाली कराया।
कोर्ट से आदेश आते ही सारे गेट से विस्थापितों को हटा दिया गया। साथ ही प्रशासन ने धारा 163 लगाया दिया है। इसके बाद से कर्मचारी-अधिकारी आवाजाही करने लगे। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से बोल दिया है कि राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान नहीं करा सकते। प्रशासन तत्काल गेट को खाली कराए और रास्ता खोलें। हाईकोर्ट में 28 तारीख को सुनवाई होनी है। अगर, कोई उल्लंघन करता है तो अवमानना का मामला माना जाएगा।
दूसरी ओर से विस्थापितों ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालनी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापित अप्रेंटिस संघ एवं युवाओं के रोजगार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में शामिल होकर उनके संघर्ष को समर्थन देने के लिए सबका शुक्रिया। BSL ने हाईकोर्ट से रिट (अस्थाई आदेश) के द्वारा आदेश लेकर बंदी की समाप्ति की। इसमें दो लोगो को अभियुक्त बनाया गया, जिसमे डीसी अजय नाथ जा और एसपी नाथू राम मीना हैं।
विस्थापितों ने कहा-हाईकोर्ट को दूसरे पक्ष छात्रों की बात सुननी चाहिए थी कि ऐसा क्या हुआ की छात्र रोड पर भूख हड़ताल और गेट बंदी करने पर मजबूर हुए। इसमेंअसल बात सामने आती है कि विस्थापित छात्रों को संवैधानिक अधिकार नियोजन से वंचित किया गया। नियोजन का अवसर प्राप्त होना हर छात्र का अधिकार होता है।
हाईकोर्ट से इतना ही कहना है कि छात्रों के हित को ध्यान में रखें। माननीय हाईकोर्ट से कहना है कि BSL ने आपको झूठी खबर दी है। प्लांट के मेन गेट का कैमरा चेक करवा लें। बीएसएल प्लांट से कर्मियों को बाहर आने दिया जा रहा था। लेकिन कर्मियों को प्लांट के अंदर जाने से रोका जा रहा था। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि सभी विस्थापितों से आग्रह है कि जल्द ही दोबारा आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इसलिए अभी से तैयार रहें। जब तक नियोजन नही मिलेगा तब तक रुकना नहीं है।