IIT Bhilai से बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने मिलाया हाथ, अब रिवर्स इंजीनियरिंग
आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो.राजीव प्रकाश ने भरपूर सहयोग का दिया आश्वासन। स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। "रिवर्स इंजीनियरिंग" यहां के उद्योगों के लिए संजीवनी साबित होगा।
सूचनाजी न्यू, भिलाई। बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, आईआईटी भिलाई के सहयोग से बीएसपी और अन्य इस्पात उद्योगों में लगने वाले इंपोर्ट सब्स्टियूड आइटमों का रिवर्स इंजीनियरिंग करेगा। शुक्रवार को आईआईटी भिलाई में बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और आईआईटी मैनेजमेंट के बीच रिवर्स इंजीनियरिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने आश्वासन दिया कि हमारे पास जो भी टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट है उसका भरपूर उपयोग यहां के उद्योगों के डेवलपमेंट के लिए करेंगे।
"विकसित भारत" और "मेक इन इंडिया" के तहत एंसिलरी एवं एमएसएमई उद्योगों को विकसित करने में आईआईटी भिलाई की क्या भूमिका हो सकती है इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई। बीएसपी सहित अन्य स्टील उद्योगों में इंपोर्ट होने वाली मशीनरी का किस तरह "रिवर्स इंजीनियरिंग" किया जाए ताकि उसका लाभ यहां के स्थानीय उद्योगों को मिल सके। डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने बताया कि स्टील उद्योगों को विदेश से आने वाले आइटम को डेवलप करने में आईआईटी भिलाई अपनी पूरी टेक्नोलॉजी से यहां के उद्योगों का सहयोग करेगी।
उन्होंने बताया कि पेड ट्रायल बेसीस पर इसकी शुरुआत होगी और आईआईटी भिलाई की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी 3 डी स्कैनर, ड्राइंग डिजाइन के माध्यम से "रिवर्स इंजीनियरिंग" की पहचान की जाएगी। केमिकल केमिस्ट्री की भी पूरी जांच होगी, उसके लिए यहां पर अत्याधुनिक लैब स्थापित है जिसकी रिपोर्ट एनएबीएल टेस्टिंग के समक्ष मानी गई है। केमिकल मटेरियल टेस्ट सर्टिफिकेट को आईआईटी भिलाई की भी मान्यता है।
एंसिलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन दासगुप्ता ने आज की बैठक को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने "रिवर्स इंजीनियरिंग" में यहां के स्थानीय एंसिलरी एवं एमएसएमई उद्योगों को जिस तरह सहयोग देने का आश्वासन दिया है उससे यहां के स्थानीय उद्योगों को न केवल बढ़ावा मिलेगा बल्कि उद्योगों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। "रिवर्स इंजीनियरिंग" यहां के उद्योगों के लिए संजीवनी साबित होगी।
उन्होंने कहा कि इम्पोर्ट सब्स्टिट्यूट आइटम बनाने में यहां के एंसिलरी एवं एमएसएमई उद्योग सक्षम है। आईआईटी भिलाई ने "रिवर्स इंजीनियरिंग" करने में हमें जिस तरह टेक्नोलॉजी की मदद करने का आश्वासन दिया है उसके लिए हम डायरेक्टर प्रो राजीव प्रकाश का आभार व्यक्त करते हैं। श्री दासगुप्ता ने बताया कि जल्द ही भिलाई इस्पात संयंत्र के उच्च प्रबंधन के साथ एंसिलरी एसोसिएशन और आईआईटी भिलाई की एक संयुक्त बैठक होगी, जिसमें "रिवर्स इंजीनियरिंग" को लेकर एंसिलरी एवं एमएसएमई उद्योगों को बढ़ावा देने में आईआईटी भिलाई द्वारा किए जा रहे सहयोग पर विस्तृत चर्चा होगी।
बैठक में आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश, डॉ. सौम्या गंगोपाध्याय, डॉ. योगेश, डॉ. पुरेंदू दास, डॉ.प्रवेश चंद शुक्ला तथा बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष रतन दासगुप्ता, संरक्षक उमेश चितलांग्या ,पी सी लालवानी, डी राय चौधरी, कोषाध्यक्ष सुरेश चावड़ा तथा समन्वयक के रूप में तापस दासगुप्ता उपस्थित थे।