BSP-IIT BHILAI: दुर्ग और खैरागढ़ सरकारी पॉलिटेक्निक के छात्रों को मेटलर्जी-मैटेरियल साइंस में नई सीख का अवसर

भिलाई स्टील प्लांट के कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) एवं आईआईएम-भिलाई के मानद अध्यक्ष राकेश कुमार के नेतृत्व में दुर्ग और खैरागढ़ के नए छात्र चैप्टरों को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM) के भिलाई चैप्टर ने तकनीकी शिक्षा और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आईआईटी भिलाई के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, दुर्ग और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, खैरागढ़ में आईआईएम-भिला

  • भिलाई स्टील प्लांट के कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) एवं आईआईएम-भिलाई के मानद अध्यक्ष राकेश कुमार के नेतृत्व में दुर्ग और खैरागढ़ के नए छात्र चैप्टरों को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM) के भिलाई चैप्टर ने तकनीकी शिक्षा और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आईआईटी भिलाई के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, दुर्ग और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, खैरागढ़ में आईआईएम-भिलाई के दो नए स्टूडेंट एफिलिएट चैप्टर का उद्घाटन किया गया। आईआईटी भिलाई के एलडीसी भवन स्थित बोर्ड रूम में आयोजित इस कार्यक्रम में आईआईटी हैदराबाद के निदेशक एवं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स के अध्यक्ष प्रो. बी.एस. मूर्ति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अकादमिक और उद्योग के बीच सहयोग पर जोर कार्यक्रम की शुरुआत में आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मैटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग के विकास के लिए अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और पेशेवर संगठनों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। इसके बाद भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व सीजीएम (आयरन) एवं आईआईएम-भिलाई के मानद उपाध्यक्ष तपस दासगुप्ता ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था पेशेवर उत्कृष्टता, उद्योग-अकादमिक सहयोग और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि भिलाई स्टील प्लांट के कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) एवं आईआईएम-भिलाई के मानद अध्यक्ष राकेश कुमार के नेतृत्व में दुर्ग और खैरागढ़ के नए छात्र चैप्टरों को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा। नवाचार के लिए बाधाएं नहीं होनी चाहिए : प्रो. मूर्ति अपने संबोधन में प्रो. बी.एस. मूर्ति ने भारत में मैटेरियल साइंस, मेटलर्जी और इंजीनियरिंग शिक्षा के भविष्य को लेकर अपना विजन साझा किया। उन्होंने आईआईटी हैदराबाद और देश की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए छात्रों और युवा शोधकर्ताओं से पेशेवर संस्थाओं तथा प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक और नवाचारी सोच रखने वाले युवाओं के सामने किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। भारत सरकार द्वारा तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी उन्होंने जानकारी दी। प्रो. मूर्ति ने इच्छुक छात्रों को आईआईटी हैदराबाद आने का आमंत्रण देते हुए भरोसा दिलाया कि नवाचार और अनुसंधान से जुड़ने वाले विद्यार्थियों को संस्थान हरसंभव सहयोग देगा। AI और सस्टेनेबिलिटी पर तकनीकी कार्यक्रम होंगे कार्यक्रम के बाद प्रो. बी.एस. मूर्ति ने आईआईएम-भिलाई की कार्यकारिणी समिति के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में चैप्टर की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने, छात्रों की भागीदारी बढ़ाने तथा इंजीनियरिंग एवं वैज्ञानिक समुदाय के लिए नए आउटरीच कार्यक्रम शुरू करने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान आईआईएम-भिलाई ने भिलाई स्टील प्लांट की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सस्टेनेबिलिटी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों में तकनीकी व्याख्यान, कार्यशालाएं और अल्पकालिक पाठ्यक्रम आयोजित करने के लिए आईआईटी हैदराबाद से फैकल्टी और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस पर प्रो. मूर्ति ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। बड़ी संख्या में मौजूद रहे शिक्षक और छात्र कार्यक्रम में आईआईएम-भिलाई के मानद सचिव के. वी. शंकर, मानद कोषाध्यक्ष एस.एस.आर.सी. मूर्ति, संयुक्त सचिव उदय भानु तिवारी सहित कार्यकारिणी के कई सदस्य उपस्थित रहे। गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलिटेक्निक, रायपुर की प्राचार्य वर्षा चौरसिया विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। दुर्ग और खैरागढ़ के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के मेटलर्जी विभाग के शिक्षक एवं छात्र भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अंत में आईआईटी भिलाई के मैटेरियल साइंस एवं मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. यज्ञेश शडांगी ने आभार व्यक्त किया।