BSP सेक्टर 9 अस्पताल में नई पहल, कबाड़ से बनी बस्तर कलाकृति, बुजुर्गों के लिए गोल्फ कार की सौगात, पढ़ें डिटेल
भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल में 14 फीट ऊंची बस्तर कलाकृति, स्किन दानदाताओं के सम्मान में ग्रेटिट्यूड वॉल, बुजुर्ग मरीजों के लिए गोल्फ कार और कायाकल्प स्वच्छता अभियान की शुरुआत।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा संचालित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, सेक्टर-9 की तस्वीर बदल रही है। अस्पताल का ओपीडी परिसर अब केवल मरीजों के उपचार और जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यहां कला, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय संवेदना और मरीजों की सुविधाओं को एक साथ जोड़ने की पहल की गई है।
अस्पताल परिसर में अनुपयोगी चिकित्सा उपकरणों से तैयार 14 फीट ऊंची बस्तर कला की आकर्षक कलाकृति स्थापित की गई है। त्वचा दानदाताओं के सम्मान में ‘ग्रेटिट्यूड वॉल’ बनाई गई है। वहीं, बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए चार सीट वाली गोल्फ कार शुरू करने की पहल भी की गई है। इन नई पहलों के साथ अस्पताल में भारत सरकार की कायाकल्प योजना के तहत स्वच्छता अभियान का शुभारंभ भी किया गया। इन पहलों का उद्घाटन भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार के करकमलों द्वारा किया गया। डॉक्टर उदय, डाक्टर संबिता पंडा, जीएम संजय कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।
कबाड़ से तैयार हुई 14 फीट ऊंची बस्तर कलाकृति
अस्पताल के ओपीडी परिसर में स्थापित बस्तर कला की कलाकृति अपने निर्माण के तरीके और आकर्षक स्वरूप के कारण लोगों का ध्यान खींच रही है। इसकी खासियत यह है कि इसे अस्पताल के अनुपयोगी सामान से तैयार किया गया है। पुरानी ट्रॉलियों, गैस सिलेंडर, ट्रॉली के पहियों, पुराने स्टेथोस्कोप, पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर जैसे सामान का रचनात्मक इस्तेमाल कर लगभग 14 फीट ऊंची कलाकृति बनाई गई है।
यह पहल ‘बेस्ट फ्रॉम वेस्ट’ यानी बेकार वस्तुओं से उपयोगी और आकर्षक रचना तैयार करने की अवधारणा को साकार करती है। जिन वस्तुओं का इस्तेमाल अस्पताल में अब नहीं हो रहा था, उन्हें कलात्मक स्वरूप देकर परिसर की सुंदरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया है।
कलाकृति अब ओपीडी आने वाले मरीजों, परिजनों और अन्य लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट बन चुकी है। अस्पताल की यह पहल बताती है कि रचनात्मक सोच के जरिए अनुपयोगी वस्तुओं को भी आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
स्किन दानदाताओं के सम्मान में ‘ग्रेटिट्यूड वॉल’
सेक्टर-9 अस्पताल की सबसे संवेदनशील पहलों में से एक है त्वचा दानदाताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए स्थापित ‘ग्रेटिट्यूड वॉल’ (Gratitude Wall)। इसे त्वचा दानदाताओं की स्मृति को सहेजने और समाज में त्वचा दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
यह दीवार उन दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का माध्यम बनने का मानवीय कार्य किया। उनके परिवारों का यह निर्णय गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
त्वचा दान से गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में मदद मिलती है। इससे घावों को सुरक्षित रखने, संक्रमण के जोखिम को कम करने और मरीज के उपचार की प्रक्रिया में सहायता मिलती है। ऐसे मरीजों के लिए त्वचा दान जीवन बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। अस्पताल परिसर में स्थापित यह ग्रेटिट्यूड वॉल लोगों को त्वचा दान के महत्व से परिचित कराने के साथ उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करने का माध्यम भी बनेगी।
भिलाई के स्किन बैंक से देश के कई शहरों तक पहुंच रही मदद
जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र का स्किन बैंक गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यहां से उपलब्ध कराई गई त्वचा दिल्ली के एम्स, नागपुर, भुवनेश्वर, रायपुर और अन्य स्थानों तक भेजी जा चुकी है।
इस त्वचा का इस्तेमाल गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में किया गया है। दूरस्थ शहरों में उपचार के बाद स्वस्थ हुए मरीजों के परिजनों की ओर से भिलाई इस्पात संयंत्र के बर्न विभाग को धन्यवाद संदेश भी प्राप्त होते रहते हैं।
यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि भिलाई का स्किन बैंक केवल स्थानीय मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरे शहरों में उपचार करा रहे मरीजों की मदद में भी योगदान दे रहा है।
सेक्टर-9 अस्पताल का एडवांस बर्न केयर विभाग गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। स्किन बैंक और बर्न विभाग की पूरी टीम का समन्वित प्रयास मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। त्वचा दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए बनाई गई दीवार इसी मानवीय सेवा और जीवन बचाने के संकल्प को सम्मान देने का प्रयास है।
बुजुर्ग मरीजों के लिए गोल्फ कार की सुविधा
अस्पताल में मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए चार सीट वाली गोल्फ कार की व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल परिसर में आवागमन में सहूलियत देना है।
इस सुविधा के माध्यम से बुजुर्ग मरीजों को ओपीडी और लेबर रूम तक आने-जाने में मदद मिलेगी। अस्पताल परिसर में लंबी दूरी पैदल तय करने में असमर्थ मरीजों के लिए यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
बताया गया है कि सेल के अस्पतालों में इस तरह की सुविधा शुरू करने की यह पहली पहल है। हालांकि, इसके संचालन और पात्र मरीजों के उपयोग से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि गोल्फ कार की सुविधा शुरू होने के बावजूद व्हीलचेयर और ट्रॉली की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। मरीजों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए व्हीलचेयर की संख्या भी बढ़ाई गई है।
इससे अस्पताल आने वाले बुजुर्गों, चलने-फिरने में परेशानी महसूस करने वाले मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कायाकल्प योजना के तहत स्वच्छता अभियान
अस्पताल परिसर में भारत सरकार की कायाकल्प योजना के तहत स्वच्छता अभियान का शुभारंभ भी किया गया। इसका उद्देश्य अस्पताल के वातावरण को स्वच्छ, व्यवस्थित और मरीजों के अनुकूल बनाए रखने की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
स्वास्थ्य सेवाओं में स्वच्छता का विशेष महत्व है। अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, व्यवस्थित आवागमन और मरीजों के लिए सुविधाजनक वातावरण उपचार व्यवस्था के अनुभव को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।
सेक्टर-9 अस्पताल में एक साथ शुरू की गई ये पहलें परिसर की सुंदरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण, अंगदान से जुड़ी मानवीय संवेदना और मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता देने का संदेश देती हैं।
मरीजों की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, सेक्टर-9 की इन पहलों में तीन महत्वपूर्ण पहलू दिखाई देते हैं। पहला, अनुपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना। दूसरा, त्वचा दानदाताओं को सम्मान देकर अधिक से अधिक लोगों को इस मानवीय कार्य के प्रति जागरूक करना। तीसरा, बुजुर्ग और जरूरतमंद मरीजों के लिए अस्पताल परिसर में आवागमन को सुविधाजनक बनाना।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से सभी स्किन दानदाताओं और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में योगदान देने वाले दानदाताओं का सम्मान समाज में मानवीय संवेदना और सेवा भावना को मजबूत करने का माध्यम है।
सेक्टर-9 अस्पताल की ये पहलें दिखाती हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, परिसर का बेहतर रखरखाव, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जरूरतमंदों के लिए छोटी-छोटी सुविधाएं भी अस्पताल की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।