Coal News: कोयला मंत्रालय और दामोदर घाटी निगम के बीच समझौता, 3 Commercial Coal Blocks प्रोजेक्ट से 66,248 रोजगार की उम्मीद
संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 49 मिलियन टन है। देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी। सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कोयला मंत्रालय ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के साथ तीन वाणिज्यिक कोयला खंडों के विकास और उत्पादन से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते 13वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी दौर के तहत धुलिया नॉर्थ, मंदाकिनी बी और पीरपैंती बरहट कोयला खंडों के लिए किए ग
- संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 49 मिलियन टन है।
- देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कोयला मंत्रालय ने दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के साथ तीन वाणिज्यिक कोयला खंडों के विकास और उत्पादन से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते 13वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी दौर के तहत धुलिया नॉर्थ, मंदाकिनी बी और पीरपैंती बरहट कोयला खंडों के लिए किए गए हैं।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों का क्रियान्वयन कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। तीनों कोयला खंडों का विस्तृत अन्वेषण पूरा हो चुका है और इनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 49 मिलियन टन है, जिससे देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।
इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 4,621 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जबकि करीब 7,350 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आकर्षित होगा। इससे न केवल कोयला क्षेत्र बल्कि संबंधित उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
कोयला खंडों के विकास से सामाजिक और आर्थिक लाभ भी व्यापक स्तर पर सामने आएंगे। अनुमान के अनुसार, इन तीन परियोजनाओं से करीब 66,248 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जिससे कोयला उत्पादन क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा।
कोयला मंत्रालय ने दोहराया कि वह पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल नीलामी व्यवस्था के माध्यम से घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों का उद्देश्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप समावेशी विकास को आगे बढ़ाना है।