BJP नेता मनीष पांडेय ने विधायक देवेंद्र यादव पर साधा निशाना, कांग्रेस ने किया पलटवार, दिखाया आईना

भाजपा नेता मनीष पांडे के बयानों और भिलाई विरोधी नीतियों पर मौन धारण करने को लेकर कांग्रेस ने किया कड़ा विरोध। जावेद खान ने कहा-हम मंत्री पुत्र को यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारे पास आंदोलन करने का मजबूत रास्ता है, लेकिन भाजपा के लोग हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भाजपा नेता मनीष पांडेय ने विधायक देवेंद्र यादव पर तीखा जुबानी हमला किया। भिलाई स्टील प्लांट, रोजगार आदि मुद्दे पर मनीष पांडेय ने विधायक पर गुमराह करने के आरोप लगाए। अब कांग्रेस ने पलटवार कर दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के प्रवक्ता जावेद खान ने पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के पुत्र एवं भाजपा नेता मनीष पांडे के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें आईना दिखाया है। 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मनीष पांडे भिलाई के ही एक सार्वजनिक उपक्रम फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) के निजीकरण के मुद्दे पर, शायद वे इस बात से पूरी तरह अनजान हैं कि किस तरह चुपके से दिल्ली में बैठकर सौदेबाजी की गई थी। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड को जिस राशि में बेचने का सौदा तय हुआ था, उससे अधिक की राशि तो कंपनी के पास केवल फिक्स डिपॉजिट (FD) के रूप में मौजूद थी। 

आलम यह था कि दो दिन पूर्व भिलाई आए इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी तक को इसकी कोई जानकारी नहीं थी कि फेरो स्क्रैप निगम बिकने वाला है। ऐसे में यह साफ है कि केंद्र की भाजपा सरकार जनसंवाद या जनसुनवाई किए बिना दबे पांव सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने का काम कर रही है।

एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पर मनीष पांडे द्वारा इसे पाक-साफ बताए जाने पर करारा जवाब देते हुए जावेद खान ने कहा कि ईआरओ (ERO) और बीएलओ ने भले ही अपनी तरफ से पूरी सत्यनिष्ठा से कार्य किया हो, लेकिन इसके बावजूद भाजपा के कई बीएलए ने नामजद फॉर्म-7 भरकर भिलाई नगर विधानसभा क्रमांक 65 के बहुत से बूथों पर थोक में आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हमारे पास स्वयं बूथ क्रमांक 3 के फॉर्म-7 की छायाप्रति मौजूद है, जिसे भाजपा के बीएलए ने अपने हस्ताक्षर से उन नामों पर आपत्ति जताते हुए विलोपन की मांग की थी, जो एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट में पूरी तरह सही पाए गए थे। 

यह तो भला हो कलेक्टर साहब का, जिन्होंने भौतिक सत्यापन करवाया, जिसमें भाजपा के बीएलए भाग खड़े हुए और मतदाताओं के नाम कटने से बच गए। जिन बूथों पर मतदाता सजग थे, वहां तो नाम कटने से बच गए। लेकिन हर बूथ मे यह स्थिति नहीं रही होगी, तभी तो पच्चीस लाख लोगों के नाम कट गए।

जावेद खान ने कहा-यह केवल एक बूथ की बात नहीं है, बल्कि अन्य बूथों पर भी इसी तरह के फॉर्म-7 जमा किए गए, जिनकी सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि आपत्ति किए गए सभी नाम फार्म 7 मे पहले से प्रिंटेड थे, जबकि आपत्तिकर्ता ने अपना नाम केवल पेन से लिखकर हस्ताक्षर किए थे। साथ ही मोबाइल नम्बर भी लिखा था। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि छत्तीसगढ़ में भी प्रदेश स्तर पर भाजपा का कोई ऐसा सिस्टम सक्रिय है, जो थोक में नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 प्रिंट करवाकर भाजपा के बीएलए को उपलब्ध करा रहा था। 

नियम के अनुसार एक आपत्तिकर्ता केवल पांच नामों पर आपत्ति दर्ज कर सकता है, ऐसे में थोक में आपत्ति किए जाने और आरोप गलत पाए जाने पर उन आपत्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

स्थानीय लोगों को भिलाई इस्पात संयंत्र में रोजगार दिलाने का मुद्दा हर जनप्रतिनिधि उठाता है और विधायक देवेंद्र यादव ने भी इसे प्रमुखता से उठाया है। लेकिन केंद्र में बैठी भाजपा सरकार लगातार निजीकरण पर उतारू है, जिसके चलते एक विपक्षी विधायक होने के नाते भिलाई की टाउनशिप और संयंत्र को बचाने के लिए देवेंद्र यादव का संघर्ष निरंतर जारी है।

जावेद खान ने कहा-हम मंत्री पुत्र को यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारे पास भिलाई और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए जनता के बीच जाकर आंदोलन करने का मजबूत रास्ता है, लेकिन भाजपा के लोग जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं।