सेक्टर 4 श्री जगन्नाथ मंदिर में तोरण लक्ष्मी सिंह द्वार की स्थापना, इनका सम्मान

नवनिर्मित सिंहद्वार के समक्ष दानदाताओं, सिंहद्वार शिल्पी तथा पुजारीओं का सम्मान। समाजसेवी स्व. दिलीप सतपथी की स्मृति को किया गया चिरस्थायी।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। उत्कल समाज के प्रतिष्ठित समाजसेवी, शिक्षाविद एवं सेक्टर 4 श्री जगन्नाथ मंदिर के सदस्य और महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी के परम भक्त दिवंगत स्व. दिलीप सतपथी की स्मृति में "तोरण लक्ष्मी सिंह द्वार" की स्थापना की गई। जगन्नाथ संस्कृति और समाज सेवा के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को जीवंत रखने के लिए उनकी धर्मपत्नी अदिति सतपथी द्वारा इस "सिंह द्वार" की स्थापना का संकल्प लिया गया था, जो आज विधि-विधान के साथ पूर्ण हुआ।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान

तीन दिन तक आयोजित इस पावन कार्यक्रम में मुख्य पुरोहित पंडित पितवास पाढ़ी एवं मंदिर के पुजारी ब्रज किशोर मिश्र तथा उड़ीसा से आए पंडितों की टीम द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और संपूर्ण विधि-विधान के साथ "सिंह द्वार" की स्थापना व पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। श्रीमती अदिति सतपथी के उपस्थित में इस मांगलिक अनुष्ठान में श्री सीमांचल बेहेरा एवं श्रीमती ज्योत्सना बेहेरा ने मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहकर सभी धार्मिक कार्यों को श्रद्धापूर्वक पूर्ण किया। उत्कालिय शैली में निर्मित इस "सिंह द्वार" का निर्माण उड़ीसा के प्रख्यात शिल्पी श्री आनंद महाराणा ने 6 माह में संपन्न किया। इसकी खूबसूरत पेंटिंग भी उड़ीसा से आए कलाकारों ने पूर्ण किया।

क्या है "सिंह द्वार" और इसका महत्व

ओड़िशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी सिंहद्वार के तोरण पर स्थापित माँ तोरण लक्ष्मी का जगन्नाथ संस्कृति और स्थापत्य में अत्यंत विशिष्ट महत्व है। सिंहद्वार को मोक्ष और धर्म का द्वार माना जाता है। मान्यता है कि तोरण लक्ष्मी के दर्शन मात्र से सांसारिक क्लेश, मानसिक मलिनता और दरिद्रता का नाश होता है, जिससे श्रद्धालु अंतःकरण से शुद्ध होकर बाइस पाहच (22 सीढ़ियाँ) चढ़ते हुए गर्भगृह की ओर बढ़ते हैं। सेक्टर-04 जगन्नाथ मंदिर में सिंहद्वार की स्थापना से स्थानीय श्रद्धालुओं को अब यहीं पुरी धाम की दिव्यता व भव्यता का अनुभव हो सकेगा।

स्व. दिलीप सतपथी का योगदान

स्व. दिलीप सतपथी उत्कल समाज के एक ऐसे प्रकाश स्तंभ थे, जिन्होंने न केवल जगन्नाथ संस्कृति के उन्नयन और प्रचार-प्रसार में अपना जीवन समर्पित किया, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अद्वितीय मिसाल कायम की। उन्होंने समाज के गरीब और मेधावी बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था करने जैसे कई अनुकरणीय प्रयास किए। उनकी इसी जन-कल्याणकारी सोच और महाप्रभु के प्रति उनकी अगाध आस्था को अक्षुण्ण रखने के लिए उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अदिति सतपथी द्वारा यह सराहनीय पहल की गई है। 

अदिति सतपथी ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा "महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी के प्रति उनके पति स्व. दिलीप सतपथी जी का समर्पण अटूट था। यह सिंह द्वार न केवल उनकी पावन स्मृति को संजोए रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी जगन्नाथ संस्कृति और जनसेवा से जुड़ने की प्रेरणा देगा।"

त्रिदिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाने में इन का रहा योगदान

त्रिदिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाने में जगन्नाथ समिति के महासचिव सत्यवान नायक, बसंत प्रधान, डी त्रिनाथ, बीसी बिस्वाल, सीमांचल बेहेरा, वृंदावन स्वाईं, अनाम नाहक,रंजन महापात्र, त्रिनाथ साहू, सुभाष पात्रो,कवि विस्वाल, प्रकाश स्वाईं, प्रकाश दास,कैलाश पात्रो, भीम स्वाईं, कालू बेहरा, लखन बिस्वाल, रवि स्वाईं,वी के होता, श्याम दलाई, सुशांत सतपथी आदि ने विशेष योगदान दिया।