EPS 95 पेंशनरों के साथ आखिर कब तक अन्याय? ₹9,330 करोड़ निष्क्रिय खातों में, ₹7,500 न्यूनतम पेंशन पर सरकार की चुप्पी

उच्च न्यायालयों के आदेश आने के बावजूद छूट प्राप्त (Exempted) संस्थानों के कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ देने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS 1995), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की नीतियों, उच्च पेंशन (Higher Pension) और न्यूनतम पेंशन की मांग को लेकर देशभर के लाखों पेंशनभोगियों की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं। लंबे समय से चल रहे इन मुद्दों का अब तक समाधान नहीं निकलने से पेंशनरों में निराशा बढ़ रही है। 23 जुलाई 2026

  • उच्च न्यायालयों के आदेश आने के बावजूद छूट प्राप्त (Exempted) संस्थानों के कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ देने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS 1995), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की नीतियों, उच्च पेंशन (Higher Pension) और न्यूनतम पेंशन की मांग को लेकर देशभर के लाखों पेंशनभोगियों की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं। लंबे समय से चल रहे इन मुद्दों का अब तक समाधान नहीं निकलने से पेंशनरों में निराशा बढ़ रही है। 23 जुलाई 2026 को संसद में केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के निष्क्रिय (Inactive) खातों में ₹9,330 करोड़ की पेंशन राशि वर्षों से पड़ी हुई है, जो अब तक वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस खुलासे के बाद पेंशनरों के बीच यह सवाल और तेज हो गया है कि जब राशि उपलब्ध है तो उसे पात्र लोगों तक पहुंचाने में इतनी देरी क्यों हो रही है। 4 नवंबर 2022 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च पेंशन (Higher Pension) को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद भी कई कर्मचारी अब तक लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। पेंशनरों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अनेक उच्च न्यायालयों के आदेश आने के बावजूद छूट प्राप्त (Exempted) संस्थानों के कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ देने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। पेंशन से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का कोष लगभग ₹10.50 लाख करोड़ का है और इससे प्रतिवर्ष करीब ₹72,000 करोड़ ब्याज अर्जित होता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पेंशनरों को औसतन केवल ₹1,170 प्रतिमाह पेंशन मिल रही है, जिसे कई संगठन वर्तमान महंगाई के दौर में सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए अपर्याप्त बता रहे हैं। संसद में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि EPS-95 के तहत न्यूनतम ₹7,500 मासिक पेंशन देने का फिलहाल कोई प्रस्ताव या विचार सरकार के सामने नहीं है। इस जवाब के बाद न्यूनतम पेंशन की मांग कर रहे संगठनों और पेंशनरों में निराशा देखी जा रही है। पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि यह केवल पेंशन बढ़ाने का मुद्दा नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़ा विषय है। उनका आग्रह है कि उच्च पेंशन के मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए, निष्क्रिय खातों में पड़ी राशि पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाई जाए और न्यूनतम पेंशन के मुद्दे पर सरकार पुनर्विचार करे। अब लाखों EPS-95 पेंशनरों की नजर सरकार और EPFO की अगली कार्रवाई पर है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि वर्षों से लंबित उच्च पेंशन और न्यूनतम पेंशन जैसे मुद्दों का जल्द समाधान निकलेगा।