INTUC बर्नपुर की बड़ी जीत: 13 साल की कानूनी लड़ाई पर SAIL-ISP से मिला 8,11,998 का बकाया HRA
इस्को स्टील प्लांट: CGIT-कम-लेबर कोर्ट के फैसले के बाद प्रबंधन ने लागू किया आदेश, सितंबर 2013 से अगस्त 2026 तक के 156 महीनों का बकाया मिला। श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। इस्को स्टील प्लांट से बड़ी खबर है। न्याय की लड़ाई में धैर्य, संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास की एक महत्वपूर्ण मिसाल सामने आई है। सेल (SAIL) के इस्को स्टील प्लांट (ISP), बर्नपुर के T & RM विभाग में कार्यरत कर्मचारी दिनेश शर्मा को मकान किराया भत्ता (HRA) के लिए लगभग 13 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। अंततः केंद्रीय औद्योगिक अधिकरण-सह-श्रम न्यायालय (CGIT-cum-Labour Court), आसनसोल के फैसले के बाद प्रबंधन ने कर्मचारी के पक्ष में पारित अवार्ड को लागू करते हुए सितंबर 2013 से अगस्त 2026 तक का कुल ₹8,11,998 बकाया मकान किराया भत्ता भुगतान कर दिया।
क्वार्टर लौटाने के बाद भी नहीं मिला HRA
प्राप्त विवरण के अनुसार, श्री दिनेश शर्मा ने 12 अगस्त 2013 को कंपनी का क्वार्टर छोड़ने के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद कंपनी ने 4 सितंबर 2013 को क्वार्टर अपने कब्जे में ले लिया। इसके बावजूद उन्हें मकान किराया भत्ता नहीं दिया गया।
बताया गया कि प्रबंधन ने 19 अगस्त 2013 को जारी एक आंतरिक दिशानिर्देश का हवाला देते हुए HRA का भुगतान नहीं किया। कर्मचारी के अनुसार, उक्त दिशानिर्देश की जानकारी उन्हें समय पर नहीं थी। इस कारण क्वार्टर कंपनी को सौंपने के बाद भी उन्हें लंबे समय तक अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा।
प्रबंधन से बार-बार प्रयास, लेकिन नहीं निकला समाधान
श्री दिनेश शर्मा ने HRA भुगतान के लिए कंपनी के अधिकारियों से कई बार चर्चा की और समस्या के समाधान का प्रयास किया, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
अंततः 16 जुलाई 2016 को महाप्रबंधक (नगर सेवाएं) को लिखित आवेदन दिया गया। इसकी एक प्रति INTUC बर्नपुर के महासचिव को भी सौंपी गई। यूनियन की ओर से भी मामले को संबंधित प्रबंधन के समक्ष उठाया गया, लेकिन कर्मचारी को राहत नहीं मिली। इसके बाद 28 जुलाई 2016 को सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), आसनसोल के समक्ष औद्योगिक विवाद के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया गया।
सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष भी नहीं निकला निष्कर्ष
मामले को लेकर सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), आसनसोल के कार्यालय में प्रबंधन और कर्मचारी के बीच कई तिथियों पर बैठकें हुईं। हालांकि, इन बैठकों से भी कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। कर्मचारी के अनुसार, प्रबंधन अपने आंतरिक दिशानिर्देश का हवाला देते हुए HRA का भुगतान नहीं करने के रुख पर कायम रहा।
इसके बाद वर्ष 2017 में मामले को श्रम मंत्रालय के माध्यम से केंद्रीय औद्योगिक अधिकरण-सह-श्रम न्यायालय (CGIT-cum-Labour Court), आसनसोल भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
Reference Case No. 21/2017 के तहत शुरू हुई कानूनी लड़ाई
श्रम मंत्रालय से दिसंबर 2017 में Reference Case No. 21/2017 के तहत मामले को न्यायालय में भेजने का आदेश आया। जनवरी 2018 में CGIT, आसनसोल में सुनवाई शुरू हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन पीठासीन अधिकारी के सेवानिवृत्त होने और लंबे समय तक पूर्णकालिक न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं होने के कारण कार्यवाही लंबित रही। बाद में नए पूर्णकालिक पीठासीन अधिकारी के आने पर सुनवाई दोबारा शुरू हुई।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामले की अंतिम सुनवाई 20 जून 2025 को पूरी हुई। इसके पश्चात 6 अगस्त 2025 को भारत के राजपत्र में अवार्ड प्रकाशित हुआ, जिसमें कर्मचारी के पक्ष में आदेश पारित किया गया।
अंततः प्रबंधन ने लागू किया न्यायालय का आदेश
मई 2026 में अवार्ड की प्रति यूनियन और प्रबंधन को प्राप्त हुई। मामले पर विचार करने के बाद प्रबंधन ने न्यायालय के आदेश को लागू करने की प्रक्रिया पूरी की।
इसके परिणामस्वरूप सितंबर 2026 के वेतन में श्री दिनेश शर्मा को सितंबर 2013 से अगस्त 2026 तक के 156 महीनों का बकाया HRA भुगतान किया गया। बकाया राशि कुल ₹8,11,998 रही। इसके साथ ही उनका मासिक मकान किराया भत्ता भी लागू कर दिया गया।
INTUC बर्नपुर की भूमिका और श्रमिक अधिकारों की अहमियत
लगभग 13 वर्षों तक चले इस मामले का समाधान श्री दिनेश शर्मा के लिए बड़ी राहत है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कर्मचारियों की समस्याओं को उचित मंच पर उठाना, संबंधित अधिकारियों से लगातार संवाद करना और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना कितना महत्वपूर्ण है।
इस मामले में INTUC बर्नपुर के अध्यक्ष हरजीत सिंह, महासचिव बिप्लब माजी और संगठन सचिव वीडी सिंह के नाम यूनियन के नेतृत्व और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के संदर्भ में उल्लेखनीय हैं। कर्मचारी के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रबंधन के समक्ष उठाने में यूनियन की भूमिका श्रमिक हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।