PNB Bank Fraud Case: बैंक से 4 करोड़ की धोखाधड़ी, 7 साल की कैद, फर्जी नाम से गुजरात में छिपे आरोपी को CBI ने दबोचा
पंजाब नेशनल बैंक की जोर बाग शाखा से 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई अदालत ने संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा को 7 साल की कठोर कैद और 1.60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
- फर्जी दस्तावेजों के सहारे पंजाब नेशनल बैंक से लिया था 4 करोड़ का कैश क्रेडिट, गिरफ्तारी से बचने के लिए बदली पहचान।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। बैंक से 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई के बाद आरोपी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू जिला न्यायालय की सीबीआई अदालत ने 24 अक्टूबर 2026 को दोषी को सात साल की कठोर कैद के साथ 1.60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मामला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की नई दिल्ली स्थित जोर बाग शाखा से जुड़ा है। आरोप था कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर फर्जी और जाली संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की। इसके बाद ऋण की रकम का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के बजाय अन्य कामों में किया गया, जिनके लिए बैंक ने यह सुविधा मंजूर की थी।
2013 में दर्ज हुआ था बैंक धोखाधड़ी का मामला
सीबीआई ने इस मामले में 11 जुलाई 2013 को संजीव दीक्षित, मेसर्स शंकर मेटल्स के प्रोपराइटर; संजय शर्मा, मेसर्स सुपर मशीन्स के प्रोपराइटर; इंद्रा रानी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
जांच में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने आपसी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को धोखा देकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा प्राप्त की। बैंक से हासिल रकम का कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य से इतर इस्तेमाल किया गया।
2016 में न्यायिक हिरासत से फरार हुआ था आरोपी
इस मामले में आरोपी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा की गिरफ्तारी और फरारी की कहानी भी सामने आई। वर्ष 2016 में वह एक अन्य मामले में सोनीपत की अदालत में पेशी के लिए ले जाए जाने के दौरान न्यायिक हिरासत से फरार हो गया था। इसके बाद वह गिरफ्तारी से बचता रहा। ट्रायल कोर्ट ने 23 नवंबर 2017 को उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया।
फर्जी नाम से रह रहा था आरोपी, CBI ने ऐसे दबोचा
जनवरी 2026 में सीबीआई को सूचना मिली कि घोषित अपराधी गुजरात के वडोदरा में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा है। वह कथित तौर पर पंकज भारद्वाज, पिता बृज मोहन भारद्वाज, के नाम का इस्तेमाल कर रहा था। सूचना के आधार पर सीबीआई ने आरोपी का पता लगाया। उसे राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के उमराई स्थित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से 30 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।
दोष स्वीकार करने के बाद सुनाई गई सजा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया। इनमें आपराधिक साजिश, दूसरे व्यक्ति के रूप में पहचान प्रस्तुत कर धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने जैसे अपराध शामिल थे।
आरोप स्वीकार किए जाने के बाद अदालत ने 24 अक्टूबर 2026 को उसे सात साल के कठोर कारावास और 1,60,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही पंजाब नेशनल बैंक से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल करने से जुड़े इस धोखाधड़ी मामले में आरोपी को सजा मिल गई।