QCFI Bhilai Chapter Convention 2026: क्वालिटी संग सुरक्षा पर फोकस, देशभर की 222 टीमें, आईपी मिश्रा को ये अवॉर्ड

क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (क्यूसीएफआई),भिलाई चैप्टर द्वारा श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैंपस में इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल टीमों की रही रिकॉर्ड भागीदारी। आईपी मिश्रा विजीनरी एजुकेशन लीडर एवार्ड से सम्मानित।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (क्यूसीएफआई),भिलाई चैप्टर द्वारा श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैंपस के मुख्य सभागार में 17वें चैप्टर कन्वेंशन ऑन क्वालिटी कॉन्सेप्ट्स (सीसीक्यूसी-2026) का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष देश के 40 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों के 222 टीमों ने शिरकत की| इस वर्ष का संपूर्ण आयोजन उद्योगों में क्वालिटी के साथ साथ सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने और 'इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल' की संकल्पना पर केंद्रित रहा।

आयोजित उद्घाटन समारोह तथा पुरस्कार वितरण समारोहों के विभिन्न आयोजनों मे मुख्य अतिथि के रूप में क्रमश: सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) राकेश कुमार, दुर्गापुर स्टील प्लांट के ईडी(वर्क्स) सौम्य टोकदार,श्री गंगाजली एजुकेशन सोसायटी के चेयरमेन एवं एसएसपीयू के चांसलर आईपी मिश्रा, जेएसडब्लू,रायगढ़ के यूनिट हेड परेश शाह, एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे सेफी चेयरमेन तथा ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एनके बंछोर, एपीएल अपोलो के सीईओ ब्रजेश नाहर, ईडी (क्यूसीएफआई) डीके श्रीवास्तव, सारड़ा एनर्जी के यूनिट हेड मनोज शाह,जायसवाल निको के प्रेसिडेंट (एचआर) आलोक पांडे, इंडस्ट्रीज़ एक्सपर्ट विवेक अग्रवाल सहित क्यूसीएफआई के डायरेक्टर एवं भिलाई चेप्टर के सचिव जीपी सिंह मंचस्थ रहे। कार्यक्रम के तीनों सत्रों का संचालन क्यूसीएफआई के पीआरओ सत्यवान नायक ने किया। इसी क्रम में आभार प्रदर्शन वी के चौधरी, अनिल मिश्रा ने किया|

आईपी मिश्रा विजीनरी एजुकेशन लीडर एवार्ड से सम्मानित

शिक्षा के क्षेत्र में आईपी मिश्रा द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें “विजनरी एजुकेशन लीडर अवार्ड” से सम्मानित किया गया। उन्हें बीएसपी के ईडी वर्क्स श्री राकेश कुमार, क्यूसीएफआइ के ईडी डीके श्रीवास्तव तथा क्यूसीएफआइ के डायरेक्टर जीपी सिंह ने शाल, श्रीफल तथा सम्मान चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया । इस दौरान हाल में उपस्थित दर्शकों ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया।

इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल के पोस्टरों का वितरण 

कार्यस्थल पर व्यवहार आधारित सुरक्षा और कार्मिक सहभागिता को प्रेरित करने के उद्देश्य से 4 विशेष पोस्टरों का वितरण किया गया। इन पोस्टरों का कॉन्सेप्ट व डिजाइन क्यूसीएफआई के पीआरओ सत्यवान नायक द्वारा तैयार किया गया। ये पोस्टर सभी प्रतिभागी टीमों को निःशुल्क वितरित किए गए।

प्रतिष्ठित संस्थानों की सहभागिता

कन्वेंशन में देश के विभिन्न संस्थानों जैसे सेल- बीएसपी,डीएसपी, आरएसपी, बीएसएल, हिंडालको,नाल्को,उत्कल अलुमिना, बाल्को और एनटीपीसी,सहित देश भर के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों की टीमों ने भाग लिया। क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर के सचिव श्री जी. पी. सिंह ने बताया कि इस वर्ष इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल, लीन क्वालिटी सर्किल और काइज़न जैसी श्रेणियों में टीमों ने रिकॉर्ड संख्या में प्रस्तुतियां दीं।छतीसगढ़,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,उड़ीसा,असम,झारखंड,पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की टीमों ने अपनी प्रतिभागिता दी|

पुरस्कार एवं सम्मान

प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड और सिल्वर अवार्ड प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में जंहाँ सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की एसएमएस-2 की टीम 'स्टील टाइटन' ने सेफ्टी सर्कल में वंही एन एम डी सी स्टील नगरनार की टीम 'मंथन' ने क्वालिटी सर्कल मे "बेस्ट ऑफ द कन्वेंशन" का खिताब अपने नाम किया।

अतिथियों के विचार

मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित सेल-बीएसपी ईडी (वर्क्स) राकेश कुमार ने अपने उद्बोधन मे कहा की "भारत को आत्मनिर्भर बनाने में उद्योगों की बड़ी भूमिका है। सुरक्षा के बिना क्वालिटी की कल्पना असंभव है; सुरक्षित कार्य व्यवहार ही गुणवत्ता को बढ़ावा देता है।काम इतनी खामोशी से करो कि आपकी सफलता शोर मचा दे"

एसजीईएस के चेयरमैन, एवं एसएसपी यूनिवर्सिटी के चांसलर आईपी मिश्रा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन मे कहा की "प्रतिस्पर्धी दौर में क्वालिटी और सेफ्टी कॉन्सेप्ट्स को अपनाना अनिवार्य है। सेफ्टी सर्कल की यह पहल औद्योगिक सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होगी।"

इनका रहा योगदान

इस दो दिवसीय कन्वेंशन के सफल संचालन में क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर के सचिव जीपी सिंह के नेतृत्व में आयोजन समिति के सदस्यों वीके चौधरी, सत्यवान नायक, डॉ. सिद्धार्थ चौबे, डॉ. आभा चौबे, सुनील त्रिवेदी, जनार्दन राव, पंकज पाठक, सुनील देशमुख, अनिल कुमार मिश्रा, गणेश गोस्वामी, डी. के. कोल्हे, गंगाधर मोरे, विवेकानंद सूर, एस. के. नागदेवे,प्रकाश स्वाईं, के. एस. तोमर और चेतन खोबरागड़े का उल्लेखनीय योगदान रहा।