भारत में स्टील की खपत 100 MT के करीब, SAIL का ASP में ₹1,714 करोड़ का दांव, रक्षा, रेलवे,ऑटो सेक्टर पर नज़र

देश के सात प्रमुख इस्पात उत्पादक समूहों में SAIL, RINL, NSL, Tata Steel Group, AM/NS India, JSL (JSPL) और JSW Group शामिल हैं। SAIL दुर्गापुर अलॉय स्टील प्लांट से हाई-ग्रेड स्पेशल स्टील उत्पादन को मिलेगी रफ्तार। इस्पात सचित संदीप पौंड्रिक ने संभाली है कमान।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। भारत का इस्पात उद्योग तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती सात महीनों (अप्रैल-अक्टूबर 2026) में देश में तैयार इस्पात (Finished Steel) की खपत 100 मिलियन टन (MT) के करीब पहुंच गई है। घरेलू बाजार में बढ़ती मांग के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने भी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़ा निवेश करने का फैसला किया है।

SAIL ने दुर्गापुर स्थित अपने अलॉय स्टील्स प्लांट (ASP) के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए ₹1,714 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। इस निवेश का सीधा फोकस रक्षा, रेलवे और ऑटोमोबाइल सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले अलॉय और स्पेशल स्टील का उत्पादन बढ़ाना है। इससे देश में रणनीतिक और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष इस्पात की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, भारतीय इस्पात उद्योग के लिए अप्रैल-अक्टूबर 2026 की अवधि कई अहम संकेत लेकर आई है। एक तरफ घरेलू खपत 100 एमटी के करीब पहुंच रही है, दूसरी तरफ SAIL का स्पेशल स्टील में बड़ा निवेश, NMDC का बढ़ता लौह अयस्क उत्पादन और MOIL के बेहतर नतीजे इस क्षेत्र की गतिविधियों को रेखांकित करते हैं। रक्षा, रेलवे और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए स्पेशल स्टील उत्पादन पर SAIL का ₹1,714 करोड़ का निवेश आने वाले समय में खास महत्व रखेगा।

100 मिलियन टन के करीब पहुंची भारत की स्टील खपत

अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच भारत में तैयार इस्पात की खपत 100 एमटी के करीब पहुंच गई। यह आंकड़ा देश में निर्माण, बुनियादी ढांचे, रेलवे, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक गतिविधियों से पैदा हो रही मांग की तस्वीर पेश करता है।

देश के सात प्रमुख इस्पात उत्पादक समूहों में SAIL, RINL, NSL, Tata Steel Group, AM/NS India, JSL (JSPL) और JSW Group शामिल हैं। ये कंपनियां भारतीय इस्पात उद्योग की उत्पादन क्षमता और बाजार की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

हालांकि, इस अवधि में मात्रा के लिहाज से भारत तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक बना रहा। यानी घरेलू खपत के मुकाबले आयात और निर्यात के बीच संतुलन ऐसा रहा कि देश को तैयार इस्पात का शुद्ध आयात करना पड़ा।

SAIL का मुनाफा 315% बढ़ा, बिक्री भी 5% उछली

SAIL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी की बेहतर लाभप्रदता, परिचालन दक्षता और लागत अनुकूलन पर लगातार ध्यान देने का असर नतीजों में दिखाई दिया।

वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी की बिक्री मात्रा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5 प्रतिशत बढ़कर 5.16 मिलियन टन हो गई। वहीं, कर के बाद लाभ (PAT) में लगभग 315 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी का PAT बढ़कर ₹1,774 करोड़ पहुंच गया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय इस्पात बाजार में प्रतिस्पर्धा और आयात का दबाव भी बना हुआ है।

₹1,714 करोड़ से बदलेगी दुर्गापुर अलॉय स्टील प्लांट की तस्वीर

SAIL के दुर्गापुर स्थित अलॉय स्टील्स प्लांट के विस्तार और आधुनिकीकरण की ₹1,714 करोड़ की योजना इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा है। इस परियोजना के माध्यम से रक्षा क्षेत्र, रेलवे और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उच्च-ग्रेड अलॉय स्टील और विशेष इस्पात का उत्पादन बढ़ाने पर जोर रहेगा। इन क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले इस्पात के लिए गुणवत्ता, मजबूती और निर्धारित तकनीकी मानकों का विशेष महत्व होता है। इस निवेश से SAIL के स्पेशल स्टील पोर्टफोलियो को मजबूती मिलने के साथ देश की रणनीतिक औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने की क्षमता भी बढ़ सकती है।

स्टेनलेस स्टील के 162 ग्रेड को QCO से राहत

इस्पात मंत्रालय ने भारतीय मानक IS 14650 के अंतर्गत आने वाले सेमी-फिनिश्ड स्टेनलेस स्टील उत्पादों के 162 ग्रेड को क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) के अनुपालन से छूट दी है। यह राहत 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी।

इस फैसले का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की समस्याओं को दूर करना और स्टेनलेस स्टील निर्माण के लिए जरूरी मध्यवर्ती कच्चे माल की उपलब्धता आसान बनाना है। इससे स्टेनलेस स्टील क्षेत्र से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

108 इस्पात उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र

देश में पर्यावरण के अनुकूल इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस्पात मंत्रालय की ग्रीन स्टील पहल भी आगे बढ़ रही है। अक्टूबर 2026 तक जारी प्रमाणन सूचियों में 108 अलग-अलग इस्पात उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र दिए गए हैं। इनमें टीएमटी बार, हॉट रोल्ड (HR) और कोल्ड रोल्ड (CR) कॉइल, प्लेट, वायर रॉड, पाइप सहित विभिन्न इस्पात उत्पाद शामिल हैं। प्रमाणित उत्पादों में अधिकांश को 5-स्टार रेटिंग मिली है। यह इस्पात निर्माण में कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाने की दिशा में उद्योग की प्रगति को दर्शाता है।

NMDC का लौह अयस्क उत्पादन 22% बढ़ा

इस्पात उद्योग की कच्चे माल की जरूरतों के लिहाज से NMDC ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। अक्टूबर 2026 में कंपनी ने 5.04 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर तक कंपनी का कुल लौह अयस्क उत्पादन 32.32 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 22 प्रतिशत की वृद्धि है। लौह अयस्क उत्पादन में यह बढ़ोतरी इस्पात उद्योग की बढ़ती मांग के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

MOIL का मुनाफा 22.5% बढ़कर ₹149.39 करोड़

मैंगनीज अयस्क उत्पादन और बिक्री से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी MOIL ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बेहतर वित्तीय नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की मैंगनीज अयस्क बिक्री मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 9.67 प्रतिशत बढ़कर 0.78 मिलियन टन हो गई। वहीं, कर के बाद लाभ (PAT) 22.5 प्रतिशत बढ़कर ₹149.39 करोड़ पहुंच गया। बिक्री में वृद्धि और बेहतर लाभप्रदता ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूती दी है।