SAIL वित्त वर्ष 2026-27 की तिमाही-छमाही रिज़ल्ट: मुनाफे में BSP टॉप पर, BSL दूसरे, RSP तीसरे नंबर पर, 10 हजार करोड़ प्रॉफिट की राह पर सेल

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) और पहली छमाही (H1) का मुनाफा उछला, बैंक कर्ज घटकर ₹20,583 करोड़ पर आया। सीएमडी डॉ. एके पंडा ने बताई रणनीतिक योजना।

  • मजबूत उत्पादन, कच्चे माल के उपयोग में बेहतरी लाने और स्टील इन्वेंट्री में कमी लाने के जरिये दूसरी तिमाही के दौरान विक्रय मात्रा में 24% की तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) वृद्धि हासिल की है।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) और पहली छमाही (H1) के शानदार वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। कंपनी के शुद्ध लाभ (PAT) में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि (CPLY) की तुलना में लगभग 315% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रॉफिट के मामले में भिलाई स्टील प्लांट नंबर 1 पर बना हुआ है। इसके बाद बोकारो और राउरकेला स्टील प्लांट का स्थान है। 

खास बात यह है कि इस रिज़ल्ट ने सेल के सीएमडी डॉक्टर अशोक कुमार पंडा के दावों को भी बल दे दिया है। 10 हजार करोड़ रुपए के प्रॉफिट की दिशा में तेजी से कंपनी बढ़ रही है। सीए और बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव अंकुर मिश्र बताते हैं कि सेल के परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर नज़र डालें तो 6 माह में बिफोर टैक्स करीब साढ़े 4 हजार करोड़ का प्रॉफिट हो चुका है। अब बाकी के छह माह में साढ़े 5 हजार करोड़ हासिल करना है। ग्रोथ को देखते हुए उम्मीद है कि समय से पहले इस लक्ष्य को हासिल कर किया जाएगा। शानदार रिज़ल्ट से कार्मिकों का मनोबल बढ़ेगा।  

सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) और पहली छमाही (H1) के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। लागत में कटौती, बिक्री की मात्रा (Sales Volume) में वृद्धि और कच्चे माल के बेहतर उपयोग से कंपनी के वित्तीय नतीजों में मजबूत सुधार देखा गया है।

सेल को कितना फायदा हुआ (फाइनेंशियल परफॉर्मेंस) दूसरी तिमाही (Q2 FY 2026-27- Standalone)

शुद्ध लाभ (Profit After Tax-PAT): ₹1,774 करोड़ (पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹427 करोड़ था, यानी लगभग 315% की बढ़ोतरी)।   

परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations): ₹31,998 करोड़ (Q2 FY26 में ₹26,704 करोड़ था)।   

ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA): ₹4,561 करोड़।   

बिक्री मात्रा (Sales Volume): 5.16 मिलियन टन (गत वर्ष की समान तिमाही के 4.91 मिलियन टन से 5% अधिक)

पहली छमाही (H1 FY 2026-27 - Standalone)

शुद्ध लाभ (PAT): ₹3,410 करोड़ (H1 FY26 के ₹1,112 करोड़ से काफी अधिक)।   

कुल राजस्व (Revenue from Operations): ₹58,243 करोड़ (H1 FY26 में ₹52,625 करोड़ था)।  

ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA): ₹8,917 करोड़।  

क्रूड स्टील उत्पादन: 9.61 मिलियन टन। 

2. बैंक कर्ज (Borrowings) कितना घटा

सेल प्रबंधन ने अपने उधारी (Borrowings) को घटाने पर विशेष जोर दिया है:   

वर्तमान कर्ज का स्तर: कंपनी का कुल ऋण घटकर ₹20,583 करोड़ रह गया है।   

डेब्ट-इक्विटी रेशियो (Debt-Equity Ratio): घटकर 0.52 के स्तर पर आ गया है, जो कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है

पढ़ें Steel Plants का छमाही (H1 FY 2026-27) प्रदर्शन और सेगमेंट प्रॉफिट (EBIT) 

प्लांट का नाम: राजस्व (Revenue) (₹ करोड़): परिणाम / सेगमेंट प्रॉफिट (EBIT) (₹ करोड़)

भिलाई स्टील प्लांट (BSP): ₹16,610.01: ₹1,802.09

बोकारो स्टील प्लांट (BSL): ₹15,559.53: ₹1,693.97

राउरकेला स्टील प्लांट (RSP): ₹15,197.75: ₹1,587.64

इस्को स्टील प्लांट (ISP-बर्नपुर): ₹7,046.98: ₹637.15

दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP): ₹6,014.29: ₹287.74

अलॉय स्टील्स प्लांट (ASP): ₹769.02: ₹21.54

सेलम स्टील प्लांट (SSP): ₹991.17: (₹141.11) (घाटा)

विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील प्लांट (VISP): ₹200.32: (₹6.53) (घाटा)

सीएमडी (CMD) डॉ. ए. के. पंडा ने क्या कहा

SAIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) डॉ. एके पंडा ने कहा, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) और पहली छमाही (H1) में वैश्विक बाजार की अस्थिरता के बावजूद कंपनी का प्रदर्शन हमारी प्रचालन सुदृढ़ता, वित्तीय विवेक और रणनीतिक सजगता को दर्शाता है। भारत के मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास और बढ़ती घरेलू स्टील की मांग का लाभ उठाते हुए, हमने मजबूत उत्पादन, कच्चे माल के उपयोग में बेहतरी लाने और स्टील इन्वेंट्री में कमी लाने के जरिये दूसरी तिमाही के दौरान विक्रय मात्रा में 24% की तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) वृद्धि हासिल की है। 

लौह अयस्क के उत्पादन और विक्रय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारा ध्यान तकनीकी-आर्थिक मापदंडों को और बेहतर करने, लागत को युक्तिसंगत बनाने, इन्वेंट्री अनुशासन बनाए रखने और लाभप्रदता में सुधार के लिए हाई-एंड उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर केंद्रित है।