SAIL Strike 2024: Bhilai Steel Plant से बस्ती और घर तक पहुंच रहा BSP संयुक्त यूनियन, प्रबंधन पर भड़के हैं मजदूर
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। 29 व 30 जनवरी 2024 को होने जा रहे औद्योगिक हड़ताल का प्रचार, संयंत्र से निकलकर अब श्रमिकों की बस्ती में भी पहुंचने लगा है। इसके तहत रविवार को संयुक्त यूनियन के पदाधिकारी जोरातराई पहुंच कर वहां के निवासरत ठेका श्रमिकों एवं स्थाई श्रमिकों के बीच नुक्कड़ सभाएं की। ज्ञात हो कि संयंत्र में लगभग 7000 से ज्यादा ठेका श्रमिक एवं सैकड़ों स्थाई श्रमिक जोरा तराई गेट से संयंत्र के अंदर आते हैं। छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं को सुन रहे स्थाई एवं ठेका श्रमिक अपनी मांगों को लेकर हो रहे संघर्षों म
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। 29 व 30 जनवरी 2024 को होने जा रहे औद्योगिक हड़ताल का प्रचार, संयंत्र से निकलकर अब श्रमिकों की बस्ती में भी पहुंचने लगा है। इसके तहत रविवार को संयुक्त यूनियन के पदाधिकारी जोरातराई पहुंच कर वहां के निवासरत ठेका श्रमिकों एवं स्थाई श्रमिकों के बीच नुक्कड़ सभाएं की। ज्ञात हो कि संयंत्र में लगभग 7000 से ज्यादा ठेका श्रमिक एवं सैकड़ों स्थाई श्रमिक जोरा तराई गेट से संयंत्र के अंदर आते हैं। छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं को सुन रहे स्थाई एवं ठेका श्रमिक अपनी मांगों को लेकर हो रहे संघर्षों में भागीदारी करते हुए 29 एवं 30 जनवरी के प्रस्तावित हड़ताल में भाग लेने की बात कह रहे हैं।स्थाई-ठेका श्रमिक मिलकर करते हैं संयंत्र में उत्पादन
वर्तमान समय में स्थाई एवं ठेका श्रमिक मिलकर संयंत्र का उत्पादन कर रहे हैं। कभी संयंत्र में 60000 से ज्यादा स्थाई श्रमिक काम किया करते थे। किंतु सरकार की नई आर्थिक एवं औद्योगिक नीतियों पर अमल करते हुए प्रबंधन लगातार स्थाई श्रमिकों को घटाते हुए उनके स्थान पर ठेका श्रमिकों को लेना शुरू किया है, जिसके परिणाम स्वरूप वर्तमान में संयंत्र में जहां 12000 स्थाई कर्मी हैं। वहीं, लगभग 28000 से 30000 ठेका कर्मी कार्य कर रहे हैं।
समान काम का सामान वेतन नहीं मिलता है ठेका श्रमिकों को
संयुक्त यूनियन के नेताओं ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का कानून बना हुआ है। किंतु प्रबंधन समान काम के लिए समान वेतन देना तो दूर, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी ठेका श्रमिकों को नहीं दिलवा पाता है, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन सभी विभागों में निर्धारित स्थान पर डिस्प्ले किया जाता है। किंतु प्रबंधन यह डिस्प्ले किया हुआ न्यूनतम वेतन भी ठेका श्रमिकों के खाते में पहुंचाने को सुनिश्चित नहीं कर पाता है, जबकि ऑपरेटिंग अथॉरिटी कि यह जिम्मेदारी है कि वह इस बात को सुनिश्चित करें कि सभी ठेका श्रमिकों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन मिल रहा है।