स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना: SAIL में 500 की तरफ बढ़ा आंकड़ा, Bhilai Steel Plant में 43 अधिकारी, 107 कर्मचारियों ने भरे वीआर

20 मई से 20 जुलाई तक का समय सेल प्रबंधन ने तय किया है। 1000 अधिकारियों और कर्मचारियों को वीआर देने का लक्ष्य। सेल प्लांट और खदान में पर्सनल विभाग सक्रिय। काउंसिलिंग का दौर तेज़। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में वीआर भरने वालों की संख्या तेजी से 500 के करीब पहुंचने वाली है। अकेले भिलाई स्टील प्लांट में 150 कार्मिकों ने आवेदन कर दिए। 43 अधिकारियों और 107 कर्मचारियों ने सेल बीएसपी से अलग होने का फैसला करते हुए अंतिम मुहर भी लगा दी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना-वीआरएस के

  • 20 मई से 20 जुलाई तक का समय सेल प्रबंधन ने तय किया है।
  • 1000 अधिकारियों और कर्मचारियों को वीआर देने का लक्ष्य।
  • सेल प्लांट और खदान में पर्सनल विभाग सक्रिय। काउंसिलिंग का दौर तेज़।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में वीआर भरने वालों की संख्या तेजी से 500 के करीब पहुंचने वाली है। अकेले भिलाई स्टील प्लांट में 150 कार्मिकों ने आवेदन कर दिए। 43 अधिकारियों और 107 कर्मचारियों ने सेल बीएसपी से अलग होने का फैसला करते हुए अंतिम मुहर भी लगा दी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना-वीआरएस के तहत महज 5 दिनों में 150 कार्मिकों के आवेदन ने सबको हैरान कर दिया है। तेजी से ऑनलाइन भरे जा रहे फॉर्म से संकेत है कि लक्ष्य समय से पहले पूरा हो सकता है। सेल प्रबंधन ने 1000 कर्मचारियों और अधिकारियों को वीआर देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 20 मई से 20 जुलाई तक की अवधि तय है। सेल बीएसपी से आ रही खबर के मुताबिक शुरुआती रुझान पूरे हालात की तस्वीर बयां कर रही है। कर्मचारी और अधिकारी तनाव भरे माहौल में काम करने के बजाय बची हुई नौकरी को अलविदा बोलना उचित समझ रहे हैं। सेल बीएसपी के अलावा बोकारो स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, इस्को बर्नपुर स्टील प्लांट, अलॉय स्टील प्लांट, सेलम स्टील प्लांट, विश्वेश्वरैया स्टील प्लांट, रांची, सीएमओ, खदान, सेल कारपोरेट आफिस से भी वीआर तेजी से भरने की खबर आ रही है। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक की सक्रियता के बाद सेल प्रबंधन ने मैनपॉवर कास्ट कम करने की दिशा में कठोर कदम उठाए। पहले तय किया गया था कि सीआर के जरिए कर्मचारियों और अधिकारियों को कंपनी से अलग कर दिया जाएगा। पिछले साल के फॉर्मूले पर कार्य करने की तैयारी थी। लेकिन, तकनीकी कारणों की वजह से प्रबंधन ने अपना फैसला बदलते हुए वीआर को लांच किया। इसका मकसद यह है कि वीआर के जरिए ही कार्मिकों को कंपनी से जुदा होने का मौका दिया जाए, ताकि कानूनी अड़चनों में उलझने से बचा जा सके। यही वजह है कि सीआर से पहले वीआर को लांच किया गया है। दूसरी ओर पर्सनल विभाग भी काफी सक्रिया हो गया है। कई प्लांट में काउंसिंग का दौर शुरू हो चुका है। नॉन परफॉर्मेंस वाले कार्मिकों को समझाया जा रहा है ताकि वे वीआर का विकल्प चुन लें। अन्यथा आने वाले समय में सीआर से सामना करना पड़ सकता है।