SAIL Wage Revision: 5 साल बाद भी MOA नहीं, 39 माह का एरियर अटका, BAKS बोकारो ने मंत्रालय और NJCS को घेरा

वेतन समझौते के नाम पर सेल कर्मचारियों को लाखों रुपये के नुकसान का आरोप; MGB, पर्क्स और एरियर भुगतान में भेदभाव का दावा। BAKS महासचिव हरिओम कुमार ने इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन और NJCS यूनियनों की भूमिका पर उठाए सवाल।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में वेज रिवीजन 2017 को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी एक बार फिर सामने आई है। बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) ने 21-22 अक्टूबर 2021 को हुए वेतन समझौते के पांच साल पूरे होने के मौके पर इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन और नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (NJCS) की यूनियनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

BAKS के महासचिव हरिओम कुमार का आरोप है कि वेतन समझौते में कथित अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया। कर्मचारियों को अब तक न तो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MOA) मिला और न ही 39 महीने के बकाया एरियर का भुगतान हुआ। संगठन का दावा है कि इन विसंगतियों के कारण सेल कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हरिओम कुमार ने आरोप लगाया कि वेतन समझौते की प्रक्रिया, अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन लाभों में अंतर, एरियर भुगतान की शर्तों तथा NJCS की बैठकों को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने इस्पात मंत्रालय और सेल प्रबंधन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

वेज रिवीजन 2017 पर BAKS ने उठाए 10 सवाल

1. NJCS संविधान और आम सहमति का मुद्दा

BAKS का आरोप है कि 21-22 अक्टूबर 2021 को हुए वेतन समझौते में NJCS के संविधान में कथित रूप से निर्धारित आम सहमति के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि जब समझौते में सभी पक्षों की सहमति जरूरी थी, तो बहुमत के आधार पर निर्णय किस तरह लिया गया? BAKS ने सवाल उठाया कि इस मामले में इस्पात मंत्रालय और संबंधित यूनियनों ने आपत्ति क्यों नहीं की।

2. वेतन समझौते की वैधता पर सवाल

संगठन ने वेज रिवीजन 2017 के तहत हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) की वैधता पर सवाल उठाए हैं। BAKS का आरोप है कि समझौते में कथित खामियों के बावजूद इसे लागू कर दिया गया, लेकिन बाद में उन विसंगतियों को दूर करने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं हुई।

3. 'अफोर्डेबिलिटी' के आधार पर अलग-अलग प्रभावी तिथि

BAKS ने वेतन संशोधन के वास्तविक और काल्पनिक प्रभाव की तिथियों को लेकर भी सवाल उठाया है। यूनियन का दावा है कि 'अफोर्डेबिलिटी' यानी भुगतान क्षमता की शर्त के आधार पर वेतन लाभों को अलग-अलग तिथियों से प्रभावी किया गया। महासचिव हरिओम कुमार का आरोप है कि इस प्रावधान को लेकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संबंधित पक्षों ने प्रभावी आपत्ति नहीं की।

4. अधिकारियों और कर्मचारियों के MGB-पर्क्स में अंतर क्यों?

BAKS ने अधिकारियों और गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के वेतन लाभों में अंतर पर सवाल उठाया है। 10 साल के वेतन संशोधन के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट (MGB) क्रमशः 15 और 13 प्रतिशत तथा पर्क्स की सीमा क्रमशः 35 और 26.5 प्रतिशत निर्धारित की गई।

यूनियन ने पूछा है कि जब दोनों वर्ग सेल के लिए काम करते हैं, तो वेतन लाभों में इस अंतर का आधार क्या था? BAKS का आरोप है कि इस मुद्दे पर इस्पात मंत्रालय और NJCS यूनियनों ने प्रबंधन से जवाब नहीं मांगा।

5. अधिकारियों को एरियर, कर्मचारियों को अलग प्रभावी तिथि का आरोप

BAKS ने अधिकारियों और कर्मचारियों के पर्क्स एरियर के भुगतान में अंतर का मुद्दा भी उठाया है। बीएकेएस का दावा है कि अधिकारियों को 1 अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2021 तक की अवधि के पर्क्स का एरियर मिला, जबकि कर्मचारियों के पर्क्स एरियर को सरकार की मंजूरी की तारीख से प्रभावी किया गया। महासचिव हरिओम कुमार ने सवाल उठाया कि दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों अपनाई गई और इस पर संबंधित पक्षों ने स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा।

6. MOA के बिना वेतन संशोधन लागू करने का आरोप

BAKS का कहना है कि वेतन संशोधन को लागू कर दिया गया, लेकिन औपचारिक मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MOA) नहीं किया गया। संगठन ने सवाल उठाया है कि यदि समझौते को लागू करने के लिए MOU पर्याप्त था, तो MOA की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई? BAKS के मुताबिक, इस संबंध में सेल प्रबंधन से लिखित जवाब मांगा जाना चाहिए था।

7. 39 महीने के एरियर का भुगतान अब तक क्यों नहीं

सेल कर्मचारियों के लिए 39 महीने के बकाया एरियर का मुद्दा BAKS ने प्रमुखता से उठाया है। संगठन के अनुसार, वेतन समझौते में एरियर भुगतान के मुद्दे पर विचार करने के लिए सब-कमेटी बनाने का उल्लेख था। BAKS का आरोप है कि कर्मचारियों को अब तक इस अवधि का एरियर नहीं मिला और प्रस्तावित सब-कमेटी की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। सवाल किया कि इस्पात मंत्रालय और NJCS यूनियनों ने सेल प्रबंधन से इस संबंध में जवाब क्यों नहीं मांगा।

8. NJCS की बैठकें नियमित रूप से नहीं होने का आरोप

BAKS महासचिव हरिओम कुमार का दावा है कि वेतन समझौते के बाद 2022 और 2024 में ही NJCS की बैठकें हुईं। औद्योगिक संबंधों की स्थिति और बैठकों की कथित अनियमितता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए नियमित संवाद जरूरी है।

9. गैर-निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल

BAKS ने NJCS में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ नेताओं की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, ASP और CFP जैसी इकाइयों से गैर-निर्वाचित नेता कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह भी सवाल उठाया कि NJCS में नामित नेताओं को कर्मचारियों की ओर से समझौते करने का अधिकार किस आधार पर दिया गया है। BAKS ने इस्पात मंत्रालय और सेल प्रबंधन से प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है।

10. BSP की मान्यता प्राप्त यूनियन के कार्यकाल पर सवाल

BAKS ने भिलाई इस्पात संयंत्र की मान्यता प्राप्त यूनियन के कार्यकाल को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं। यूनियन का कार्यकाल 9 अक्टूबर 2021 को समाप्त हो गया था, जबकि वेतन समझौते पर 21-22 अक्टूबर 2021 को हस्ताक्षर किए गए।

ऐसे में BAKS ने सवाल किया है कि तत्कालीन मान्यता प्राप्त यूनियन के नेता वंश बहादुर सिंह ने किस अधिकार के तहत समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह संगठन की ओर से उठाया गया सवाल है, जिस पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

'कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहा गठबंधन'

BAKS महासचिव हरिओम कुमार ने आरोप लगाया कि इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन और NJCS से जुड़े नेताओं के बीच ऐसा गठजोड़ बन गया है, जिसमें कर्मचारियों के हित पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वेतन समझौते की कथित विसंगतियों के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है, जबकि इन मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रभावी पहल नहीं की गई।

हरिओम ने मांग की है कि वेज रिवीजन 2017 से जुड़े सभी सवालों पर स्थिति स्पष्ट की जाए, MOA और 39 महीने के एरियर के मुद्दे का समाधान किया जाए तथा कर्मचारियों के वेतन लाभों में कथित असमानता पर जवाबदेही तय हो।