Sector 9 Hospital: सीएमओ डाक्टर संबिता पंडा से मिले CITU नेता, नर्सिंग ऑफिसर-टेक्निकल ऑफिसर पदनाम छाया
कर्मचारियों के पदनाम, सम्मान और कार्यक्षेत्र से जुड़े विषय केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं, बल्कि उनके सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। सीटू मेडिकल जोन की टीम इन विषयों के न्यायसंगत समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहेगी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर 9 की सीएमओ इंचार्ज डॉ. संबिता पंडा से सीटू नेताओं मुलाकात की। सचिव अजय कुमार आर्य के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने उन्हें 1 नवंबर से नए दायित्व संभालने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सीटू ने उम्मीद जताई कि उनके कार्यकाल में अस्पताल की लंबित समस्याओं के समाधान तथा चिकित्सा सेवाओं में गुणात्मक सुधार की दिशा में सकारात्मक पहल होगी।
नर्सिंग ऑफिसर एवं टेक्निकल ऑफिसर पदनाम का मुद्दा प्राथमिकता से हल हो
मुलाकात के दौरान नर्सिंग ऑफिसर पदनाम एवं टेक्निकल ऑफिसर से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा की गई। सीटू मेडिकल जोन एवं केंद्रीय टीम इन विषयों को लेकर अस्पताल प्रबंधन और कार्मिक विभाग के साथ कई दौर की बातचीत कर चुकी है। नई प्रभारी ने इन मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा के लिए शीघ्र ही बैठक की तारीख देने का आश्वासन दिया है। सीटू को उम्मीद है कि इस बार बातचीत केवल आश्वासन तक सीमित न रहकर ठोस निर्णय तक पहुंचेगी।
कार्मिक विभाग की तारीख पर तारीख वाली नीति से कर्मचारियों को कब मिलेगी राहत?
पदनाम के मुद्दे पर अस्पताल के कार्मिक विभाग की कार्यशैली लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। पूर्व महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) के कार्यकाल में तीन महीने, फिर छह महीने का समय मांगते-मांगते पूरा कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला। अस्पताल विभाग के कार्मिक अधिकारी भी इसी प्रक्रिया का अनुसरण करते रहे। ऐसा लगता है कि समस्या सुलझाने से ज्यादा उसे लंबित रखने की कला में ही महारत हासिल की जाती रही है। परिणाम यह है कि आज भी न पदनाम का समाधान हुआ और न ही कुछ क्षेत्र में डी-क्लस्टर बनाने की दिशा में कोई ठोस प्रगति हुई। कर्मचारियों को आखिर कब तक आश्वासनों के सहारे रखा जाएगा?
नए कार्यकाल से जगी उम्मीद, समाधान की दिशा में सीटू का प्रयास जारी रहेगा
पूर्व में अस्पताल के प्रभारी के रूप में किसी को मात्र एक महीने तो किसी को तीन महीने का ही समय मिला, इसलिए उनके सामने इन मुद्दों को आगे बढ़ाने की सीमाएं थीं। लेकिन इससे पहले पर्याप्त समय तक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों के कार्यकाल में भी अपेक्षित पहल नहीं हुई। अब नई प्रभारी डॉ. संबिता पंडा के आने से एक बार फिर सकारात्मक उम्मीद जगी है।
सीटू का मानना है कि कर्मचारियों के पदनाम, सम्मान और कार्यक्षेत्र से जुड़े विषय केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं, बल्कि उनके सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। सीटू मेडिकल जोन की टीम इन विषयों के न्यायसंगत समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहेगी। इस अवसर पर सीटू के उपाध्यक्ष संतोष पुष्टि, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार, कार्यकारिणी सदस्य कौशर खान एवं तरुण कांतिपाल मुख्य रूप से उपस्थित थे।