शेयर बाजार में हाहाकार: SAIL, टाटा, जिंदल, कोल इंडिया और अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट, जानें वजह
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), टाटा स्टील, जिंदल स्टील, कोल इंडिया और अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
सूचनाजी न्यूज, छत्तीसगढ़। भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 995 अंक तक टूट गया। हालांकि कारोबार के अंत में बाजार ने निचले स्तरों से थोड़ा रिकवर किया, फिर भी सेंसेक्स 352 अंक और निफ्टी 22,700 के स्तर के नीचे बंद हुआ। इस बिकवाली की सबसे बड़ी गाज मेटल, एनर्जी, माइंस और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों पर गिरी। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), टाटा स्टील, जिंदल स्टील, कोल इंडिया और अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
जानिए किस कंपनी का शेयर भाव कितना गिरा
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल: 162.00 INR, 5.37% के साथ −9.20 रुपए की गिरावट।
Tata Steel Ltd: 169.27 INR भाव रहा। 1.25% के साथ −2.15 रुपए की गिरावट।
JSW Steel Ltd: शेयर भाव 1,241.20 INR रहा। 0.92% के साथ −11.50 रुपए भाव टूटा।
Jindal Steel Ltd: शेयर भाव 1,048.10 INR, 1.12% के साथ −11.90 रुपए बाजार भाव गिरा।
Coal India Limited-सीआइएल: 392.00 INR बाजार भाव रहा। 1.51% से −6.00 भाव टूटा।
Bharat Coking Coal Ltd: 30.13 INR भाव रहा। 2.99% के साथ −0.93 रुपए का नुकसान।
Adani Power Ltd: 184.59 INR शेयर भाव। 2.17% के साथ −4.10 रुपए भाव गिरा।Adani Green Energy Ltd: 1,269.00 INR शेयर भाव। 1.55% गिरावट के साथ बाजार भाव −20.00 गिरा।
Adani Energy Solutions Ltd: 1,294.00 INR शेयर भाव रहा। 1.34% से −17.60 रुपए का नुकसान।
गिरावट के मुख्य कारण
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड क्रूड के दाम बढ़कर $115 प्रति बैरल से ऊपर चले गए हैं। क्रूड की कीमतों में तेजी से भारत जैसे आयातक देश के लिए महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
इनपुट कॉस्ट और ऊर्जा लागत का दबाव: मेटल (स्टील) और माइनिंग सेक्टर की कंपनियों (जैसे SAIL, Tata Steel, Jindal, Coal India) के लिए ऊर्जा तथा लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोतरी से उनके लाभ (Margin) पर असर पड़ने का डर निवेशकों में दिखा।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार फंड निकाले जा रहे हैं। अक्टूबर महीने में FIIs की बिकवाली का रुझान कायम रहने से बाजार पर दबाव बढ़ा है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों व फेड की बैठक से पहले सतर्कता: अमरीकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम उठाने के बजाय मुनाफावसूली करना बेहतर समझा।
बाजार का दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) के रुख के आधार पर ही आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय होगी। मेटल और एनर्जी शेयरों में हालिया गिरावट मुख्य रूप से अल्पकालिक मुनाफावसूली (Profit Booking) मानी जा रही है।