झारखंड सरकार के मंत्री, बीएसएल प्रबंधन, विस्थापितों की वार्ता विफल, मंत्री बैठे धरने पर, इधर-BAKS ने भेजा दिल्ली तक पत्र
BAKS बोला-BSL विस्थापित आंदोलन: इस्पात मंत्री, सेल चेयरमैन और मुख्यमंत्री खुद पहल कर शुरू करें संवाद। कर्मचारियों की सुरक्षा, विस्थापितों के नियोजन और आश्रितों की नौकरी के लिए ठोस नीति बनाने की मांग। HR विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग, आंदोलन के कारण ड्यूटी पर नहीं पहुंच पाने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति मंजूर करने की अपील।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में विस्थापितों के आंदोलन के बीच प्लांट के सभी गेट जाम करने से हालात बिगड़ गए हैं। झारखंड सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया है। वित्त मंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता राधा कृष्ण किशोर और झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पहले धरनास्थल पर पहुंचे। भूख हड़ताल पर बैठीं विधायक श्वेता सिंह समेत अन्य लोगों से बातचीत की। इसके बाद सर्किट पहुंचे। जिला प्रशासन, बोकारो के डीआइसी-ईडी, विसथापितों के साथ बैठक की। काफी देर तक गहमागहमी के बाद वार्ता विफल हो गई। पिछले साल आंदोलन में मृत व्यक्ति के आरोपी को गिरफ्तार करने, 10 हजार और रोजगार देने आदि की बात करके मंत्री खुद प्रतीकात्मक रूप से धरने पर बैठ गए।
दूसरी ओर विस्थापितों के आंदोलन, कर्मचारियों की सुरक्षा और विभिन्न लंबित मुद्दों के समाधान को लेकर बोकारो इस्पात कर्मचारी संघ (BAKS) ने केंद्र और राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों सहित सेल प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यूनियन के महासचिव हरिओम कुमार ने इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, कैबिनेट सचिव, झारखंड के मुख्यमंत्री, सेल चेयरमैन और बोकारो स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी को पत्र लिखकर सभी संबंधित पक्षों के साथ सीधे संवाद शुरू करने और विवादों के समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की अपील की है।
यूनियन का कहना है कि बोकारो इस्पात नगर में पिछले एक सप्ताह से विस्थापितों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। आमरण अनशन से शुरू हुआ आंदोलन अब बोकारो स्टील प्लांट के प्रमुख गेटों और रास्तों की नाकेबंदी तक पहुंच गया है। इससे संयंत्र के उत्पादन, कर्मचारियों की आवाजाही और औद्योगिक शांति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
सभी प्रमुख गेटों की नाकेबंदी से उत्पादन पर संकट की आशंका
बीएकेएस ने अपने पत्र में कहा है कि बोकारो में विस्थापितों और मृत कर्मचारियों के आश्रितों की मांगों को लेकर पहले भी कई बार आंदोलन हो चुके हैं। कुछ आंदोलनों के दौरान हिंसक घटनाएं भी हुईं और बोकारो इस्पात नगर की स्थिति संवेदनशील बनी। इसके बावजूद यूनियन के अनुसार, सभी संबंधित पक्षों के बीच नियमित संवाद और समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी नीति बनाने की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि बोकारो स्टील प्लांट के प्रमुख रास्तों और गेटों की नाकेबंदी जारी रही, तो संयंत्र का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। इस्पात उत्पादन एक सतत प्रक्रिया है। कच्चे माल की आपूर्ति, कर्मचारियों की आवाजाही और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बाधित होने से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बीएकेएस ने आशंका जताई है कि यदि धमन भट्ठी, कोक ओवन, सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शॉप (SMS) जैसे महत्वपूर्ण विभागों का संचालन बंद करना पड़ा, तो उत्पादन दोबारा सामान्य करने में लंबा समय लग सकता है। इससे संयंत्र को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।
विस्थापितों और आश्रितों के नियोजन पर बने ठोस नियम
बीएकेएस ने विस्थापितों के नियोजन, कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सेल तथा बीएसएल स्तर पर स्पष्ट एवं पारदर्शी नीति बनाने की मांग की है।
यूनियन का तर्क है कि विस्थापन, नियोजन और कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों में स्पष्ट नियम तथा समयबद्ध समाधान की व्यवस्था नहीं होने से असंतोष बढ़ता है। प्रभावित पक्ष अपनी मांगों को लेकर कभी न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं, तो कभी आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं। ऐसे में नियमित संवाद के माध्यम से समस्याओं की पहचान कर सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालना जरूरी है।
यूनियन ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं और मांगों पर विचार करना तथा उनके समाधान के लिए उचित नीतियां बनाना सरकार और संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है। विरोध-प्रदर्शन कर रहे समूहों के साथ नियमित बातचीत से विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है।
सेल के HR विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग
बीएकेएस ने सेल और उसकी इकाइयों के मानव संसाधन (HR) विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई है। यूनियन का कहना है कि नियुक्ति, विस्थापितों के नियोजन, कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने और कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों में नीतियां बनाने तथा विवादों के समाधान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी HR विभाग की है।
यूनियन के मुताबिक, संबंधित पक्षों के साथ प्रभावी संवाद और विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त पहल नहीं होने के कारण कई मामले न्यायालयों तक पहुंच रहे हैं। इससे सेल प्रबंधन को मुकदमों की पैरवी पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
बीएकेएस ने अपने पत्र में जन्मतिथि से जुड़े मामलों और बीमार कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने से संबंधित प्रकरणों का उल्लेख किया है। यूनियन का दावा है कि इन मामलों में सेल प्रबंधन को विभिन्न न्यायिक स्तरों पर प्रतिकूल फैसलों का सामना करना पड़ा। उसने सवाल उठाया है कि जिन मामलों में कानूनी आधार कमजोर था, उन्हें उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक चुनौती देने का निर्णय क्यों लिया गया।
यूनियन ने मांग की है कि सेल और उसकी विभिन्न इकाइयों में लड़े जा रहे मुकदमों की भी स्वतंत्र समीक्षा हो। साथ ही, HR विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली का आकलन किया जाए कि उनके कार्यकाल में कर्मचारियों और अन्य हितधारकों से जुड़े कितने विवादों का समाधान निकाला गया।
ड्यूटी पर नहीं पहुंच पाने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति मंजूर करने की मांग
बीएकेएस ने आंदोलन के कारण रास्ते बाधित होने से ड्यूटी पर नहीं पहुंच पाने वाले कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति मंजूर करने की भी मांग की है। यूनियन का कहना है कि उत्पादन में लगे सभी श्रेणियों के कार्मिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यूनियन ने इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव, सेल चेयरमैन, निदेशक कार्मिक, बीएसएल के निदेशक प्रभारी और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से स्वयं आगे आकर संवाद की पहल करने की अपील की है। उसके अनुसार, केवल औपचारिक बैठक करने के बजाय सभी पक्षों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध समाधान और ठोस नीति तैयार की जानी चाहिए।
बोकारो का आंदोलन राष्ट्रीय औद्योगिक हितों से भी जुड़ा
बीएकेएस ने अपने पत्र में कहा है कि बोकारो स्टील प्लांट का महत्व केवल बोकारो या झारखंड तक सीमित नहीं है। संयंत्र से रक्षा क्षेत्र और विभिन्न राष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए इस्पात की आपूर्ति होती है। ऐसे में उत्पादन बाधित होने का असर व्यापक औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
यूनियन ने बीएसएल पर निर्भर नियमित गैर-कार्यपालक कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों और अधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संयंत्र से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इनमें विस्थापित और आश्रित परिवारों के लोग भी शामिल हैं। इसलिए औद्योगिक शांति बनाए रखना और लंबित समस्याओं का समाधान करना सभी संबंधित पक्षों के हित में है।
‘संवाद से ही निकलेगा स्थायी समाधान’
बीएकेएस महासचिव हरिओम कुमार ने कहा कि सेल और बीएसएल के HR विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच जरूरी है। संवाद के जरिए विवादों को समाप्त करने और नीतियां बनाने की जिम्मेदारी HR विभाग की है। उनके अनुसार, पूर्व में हुई हिंसक घटनाओं से सबक लेकर समय रहते ठोस कदम उठाए जाने चाहिए थे।
हरिओम कुमार ने कहा कि सेल चेयरमैन, निदेशक कार्मिक, इस्पात मंत्रालय के सचिव, झारखंड के मुख्यमंत्री और बोकारो के उपायुक्त सहित सभी जिम्मेदार अधिकारी स्वयं पहल करें। सभी संबंधित पक्षों के साथ खुला और ईमानदार संवाद स्थापित कर विस्थापितों, कर्मचारियों और आश्रितों की मांगों के समाधान के लिए ऐसी नीति बनाई जाए, जिसे सभी पक्ष स्वीकार कर सकें।
यूनियन ने अपील की है कि आंदोलन के हिंसक होने और संयंत्र का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए तत्काल पहल की जाए, ताकि बोकारो में स्थायी औद्योगिक शांति कायम हो सके।