SAIL BSP: सवाल उठाते रहिए, सिर्फ आश्वासन, बोरिया गेट पर ट्रकों की जामिंग यथावत, ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त, कई मौतों का इंतजार…?

हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) का प्रबंधन से सवाल। तीन साल से सिर्फ आश्वासन, ट्रैफिक समस्या का समाधान कब?

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई इस्पात संयंत्र के बोरिया गेट पर ट्रकों के कारण उत्पन्न होने वाली जाम की समस्या अब आम हो चुकी है। सीटू ने कई बार प्रबंधन के सामने इस गंभीर समस्या को उठाया है। ट्रकों के अनियंत्रित आवागमन, डिवाइडर की आवश्यकता और संयंत्र के भीतर प्रवेश करने वाले ट्रकों के लिए अलग गेट बनाने की मांग लगातार की जाती रही है। हर बार प्रबंधन की ओर से समस्या के समाधान के लिए प्रयास करने और उचित व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत आज भी वही है। ऐसा लगता है कि प्रबंधन का समाधान केवल आश्वासनों तक सीमित है और कर्मचारियों को जाम के बीच रास्ता तलाशने के लिए छोड़ दिया गया है।

डिवाइडर का इंतजार खत्म क्यों नहीं होता

बोरिया गेट से मरोदा पेट्रोल पंप तक डिवाइडर बनाने की मांग सीटू लगातार उठाता रहा है। प्रबंधन ने इस दिशा में प्रयास शुरू करने की बात भी कही, लेकिन आज तक डिवाइडर का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। जिन मार्गों से ट्रकों को नहीं गुजरना चाहिए, वहां भी भारी वाहन बेधड़क प्रवेश कर जाते हैं। सवाल यह है कि मार्गों के निर्धारित उपयोग और यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी किसकी है? क्या इस मार्ग पर हुई बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रबंधन की नींद खुली है?

अलग ट्रक गेट का आश्वासन, तीन साल से इंतजार

संयंत्र के अंदर ट्रकों के प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग गेट बनाने का आश्वासन पिछले तीन वर्षों से सुनते आ रहे हैं। इस दौरान हजारों कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन प्रस्तावित गेट का निर्माण आज तक दिखाई नहीं दिया। कर्मचारी आते-जाते रहे, प्रबंधन बदलता रहा, आश्वासन दोहराए जाते रहे, मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। आखिर इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए और कितने वर्षों की आवश्यकता है?

दो-दो कतारों में खड़े ट्रक, कर्मचारियों के लिए रास्ता तक नहीं

सीटू के सहायक महासचिव जेपी त्रिवेदी का कहना है कि अब स्थिति यह है कि आने-जाने वाले दोनों मार्गों पर ट्रक दो-दो कतारों में खड़े रहते हैं। नतीजा यह कि सड़क का अधिकांश हिस्सा ट्रकों की पार्किंग में ही समाप्त हो जाता है। ड्यूटी आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त रास्ता तक नहीं बचता। कई बार बोरिया गेट चौक पर चारों तरफ से ट्रक इस तरह घेर लेते हैं कि कार तो दूर, बाइक और साइकिल से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।

क्या प्रबंधन और हादसे का इंतजार कर रहा है

सीटू प्रबंधन से पूछना चाहता है कि आखिर बोरिया गेट पर यातायात व्यवस्था लागू करने की जिम्मेदारी किसकी है? ट्रकों की पार्किंग के लिए और स्थान क्यों नहीं बनाया जा रहा है? एवं अभी तक जो निर्धारित पार्किंग बना हुआ है उसका शक्ति से पालन क्यों नहीं करवाया जा रहा है? प्रतिबंधित मार्गों पर भारी वाहनों का प्रवेश क्यों नहीं रोका जा रहा है? डिवाइडर और अलग ट्रक गेट बनाने के निर्णय को अमलीजामा कब पहनाये जाने का इरादा है?

सीटू का स्पष्ट कहना है कि कर्मचारियों को हर दिन जाम में फंसाकर केवल आश्वासनों से व्यवस्था नहीं सुधर सकती। प्रबंधन को तत्काल डिवाइडर निर्माण, ट्रकों के लिए अलग प्रवेश एवं निकास द्वार, निर्धारित पार्किंग स्थल और यातायात नियंत्रण की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। वरना बोरिया गेट पर यही संदेश मिलता रहेगा। आप सवाल उठाते रहिए, हम आश्वासन देते रहेंगे और ट्रकों की जामिंग यथावत बनी रहेगी!