Wage Revision 2027: सभी पीएसयू के 8 लाख कर्मचारियों के लिए डीपीई के सामने 3 प्रस्ताव, पढ़ें क्या-क्या फायदे
बीएकेएस के महासचिव हरिओम बोले-पीएसयू में स्थायी औद्योगिक शांति और बेहतर औद्योगिक संबंधों के लिए पे रीविजन कमेटी सबसे बेहतर विकल्प है। सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) समेत देश के विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) के कर्मचारियों के जनवरी 2027 से प्रस्तावित वेज रीविजन को लेकर नई पहल सामने आई है। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) ने लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के सचिव को पत्र लिखकर 291 पीएसयू में कार्यरत लगभग 8 लाख यूनियनाइज्ड कर्मचारियों के वेज रीविजन के लि
- बीएकेएस के महासचिव हरिओम बोले-पीएसयू में स्थायी औद्योगिक शांति और बेहतर औद्योगिक संबंधों के लिए पे रीविजन कमेटी सबसे बेहतर विकल्प है।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) समेत देश के विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) के कर्मचारियों के जनवरी 2027 से प्रस्तावित वेज रीविजन को लेकर नई पहल सामने आई है। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) ने लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के सचिव को पत्र लिखकर 291 पीएसयू में कार्यरत लगभग 8 लाख यूनियनाइज्ड कर्मचारियों के वेज रीविजन के लिए तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजे हैं।
यूनियन का कहना है कि इन प्रस्तावों में से किसी एक को भी लागू किया जाता है तो वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विवाद-मुक्त हो सकती है। इससे कर्मचारियों, प्रबंधन और सरकार के बीच बेहतर औद्योगिक संबंध विकसित होंगे।
पहला प्रस्ताव: न्यायिक अध्यक्षता में बने पे रीविजन कमेटी
बीएकेएस ने मांग की है कि सभी पीएसयू में कार्यरत यूनियनाइज्ड कर्मचारियों के वेज रीविजन, बोनस (पीआरपी), वार्षिक वेतन वृद्धि, पे-स्केल, स्टैगनेशन इंक्रीमेंट और ग्रेच्युटी वृद्धि के लिए एक स्वतंत्र पे रीविजन कमेटी का गठन किया जाए।
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यह कमेटी सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनाई जाए। इसके साथ वित्त और श्रम मामलों के दो विशेषज्ञ सदस्यों को भी शामिल किया जाए। कमेटी तीन से छह माह के भीतर सरकार, पीएसयू प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों से चर्चा कर अपनी सिफारिशें दे।
यूनियन ने सुझाव दिया है कि कमेटी एमजीबी (Minimum Guaranteed Benefit), पर्क्स प्रतिशत, पीआरपी फॉर्मूला, ग्रेच्युटी वृद्धि, महंगाई भत्ते के मूल वेतन में विलय, वार्षिक इंक्रीमेंट और पे-स्केल निर्धारण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट फार्मूला तैयार करे।
दूसरा प्रस्ताव: अधिकारियों जैसी सिफारिशें कर्मचारियों पर भी लागू हों
यूनियन का दूसरा प्रस्ताव है कि अधिकारियों के वर्ष 2027 के वेतन पुनरीक्षण के लिए गठित होने वाले चौथे पीआरसी (Pay Revision Committee) या किसी अन्य समिति की सिफारिशों को गैर-कार्यपालक एवं यूनियनाइज्ड कर्मचारियों पर भी लागू किया जाए।
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बीएकेएस का तर्क है कि जिस प्रकार केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए गठित वेतन आयोग की सिफारिशें शीर्ष अधिकारियों से लेकर ग्रुप-डी कर्मचारियों तक लागू होती हैं, उसी प्रकार पीएसयू में भी चेयरमैन से लेकर सबसे कनिष्ठ कर्मचारी तक एक समान फार्मूला आधारित व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
तीसरा प्रस्ताव: वेज निगोशिएशन सर्कुलर में हों सभी प्रावधान स्पष्ट
तीसरे प्रस्ताव में यूनियन ने मांग की है कि वेज निगोशिएशन के लिए जारी होने वाले डीपीई सर्कुलर में एमजीबी, पर्क्स प्रतिशत, एरियर भुगतान, पीआरपी फॉर्मूला, ग्रेच्युटी वृद्धि, डीए मर्जर, वार्षिक इंक्रीमेंट, पे-स्केल और स्टैगनेशन इंक्रीमेंट जैसे सभी बिंदुओं का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
इसके अलावा आवास निर्माण अग्रिम, वाहन एवं इलेक्ट्रिक वाहन ऋण, कंप्यूटर/लैपटॉप एडवांस, यातायात भत्ता, बच्चों की शिक्षा भत्ता, दिव्यांग कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ता, त्योहार अग्रिम, जोखिम कार्य भत्ता, रात्रि पाली भत्ता और रोटेटिंग शिफ्ट भत्ता जैसी सुविधाओं को भी वेज रीविजन व्यवस्था का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।
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औद्योगिक शांति और बेहतर संबंधों का दावा
बीएकेएस का मानना है कि इन प्रस्तावों को लागू करने से सेल सहित सभी पीएसयू में औद्योगिक शांति स्थापित होगी। कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विश्वास बढ़ेगा तथा वेतन और सुविधाओं को लेकर होने वाले हड़ताल, प्रदर्शन, टूल-डाउन और घेराव जैसी स्थितियों में कमी आएगी।
यूनियन ने डीपीई से आग्रह किया है कि समय कम होने को देखते हुए जल्द से जल्द विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए, ताकि जनवरी 2027 से सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में नया वेज रीविजन प्रभावी किया जा सके।
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क्या बोले बीएकेएस महासचिव
बीएकेएस के महासचिव हरिओम ने कहा कि पीएसयू में स्थायी औद्योगिक शांति और बेहतर औद्योगिक संबंधों के लिए पे रीविजन कमेटी सबसे बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि अन्य दोनों प्रस्ताव भी काफी आकर्षक हैं और इनके लागू होने से कर्मचारियों, प्रबंधन और देश, तीनों को लाभ मिलेगा।