इस्पात मंत्री का कार्यकाल खत्म होने से पहले अधिकारियों का मामला हल कराने दिल्ली पहुंचा सेफी, 300 करोड़ से ज्यादा का बकाया और एरियर पर फोकस

सेल के 15 हजार अधिकारियों का कंपनी पर करीब 300 से ज्यादा का बकाया है। प्रति अधिकारी करीब चार लाख रुपए तक की राशि प्रबंधन को अदा करनी है, लेकिन साल 2008 से अब तक इंतजार ही किया जा रहा है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह का कार्यकाल कुछ माह में ही समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अब तक जिन मामलों को वह समझ चुके हैं, उसे हल कराना आसान है। इसी सोच से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल सहित अन्य पब्लिक सेक्टर यूनिट के अधिकारियों के मामलों को हल कराने के लिए सेफी ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। सेफी चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर पदाधिकारियों के साथ मंत्रालय और सेल कारपोरेट आफिस से संपर्क बनाए हुए हैं।

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दिल्ली पहुंचे नरेंद्र कुमार बंछोर ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि लंबित मामलों को हल कराने पर फोकस है। इस्पात मंत्री से मुलाकात का समय मिला है। पुराने मामलों को हल कराने के विषय पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा अधिकारियों के अन्य विषयों को भी चर्चा कर हल कराया जाएगा। उम्मीद है कि सकारात्मक रिजल्ट आएगा। मेकॉन का लंबित वेतन समझौता भी कराने पर चर्चा की जाएगी।

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बता दें कि सेल के 15 हजार अधिकारियों का कंपनी पर करीब 300 करोड़ से ज्यादा का बकाया है। प्रति अधिकारी करीब चार लाख रुपए तक की राशि प्रबंधन को अदा करनी है, लेकिन साल 2008 से अब तक इंतजार ही किया जा रहा है। सैकड़ों अधिकारी रिटायर तक हो चुके। लेकिन बकाया नहीं मिल सका। इसके अलावा 39 माह का बकाया एरियर, साल 2008-10 के जूनियर अधिकारियों का वेतन विसंगति आदि मामले को हल कराने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। वित्तीय वर्ष का परफॉर्मेंस देखने के बाद स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी सक्रिय हो गया है। बकाया वसूली के लिए दिल्ली में सेफी ने डेरा डाल दिया है।

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सेफी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि 11 माह के पर्क्स के एरियर का इंतजार किया जा रहा है। करीब तीन सौ करोड़ की राशि है। इसकी मांग की जा रही है। अधिकतम करीब चार लाख तक की राशि प्रति अधिकारी की बकाया है।

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इस तरह समझिए पूरे मामले को

यूपीए सरकार ने आदेश दिया था कि 2 अप्रैल 2008 से मई 2008 तक वेतन समझौता करना है तो सूचित करें। वेतन समझौते का प्रस्ताव बोर्ड से पास कराकर सरकार के पास भेजिए। उस वक्त सेल बोर्ड के अधिकारी चीन दौरे पर थे। बोर्ड मीटिंग करने का समय नहीं मिला। उसी समय आरआइएनएल ने लिखकर दे दिया और समय पर वेतन समझौते का लाभ उठाया। सेल अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बात को टाल गए। इसके बाद चुनाव हो गया। तय समय के बाद वेतन समझौता किया गया।

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पांच अक्टूबर 2009 से पर्क्स दिया गया। जबकि सेफी का कहना है कि अधिकारी चीन घूम रहे थे, उसकी सजा 15 हजार वर्ग को क्यों दिया जाए। 26 नवंबर 2008 से लेकर चार अक्टूबर 2009 तक के पर्क्स का एरियर मिलना चाहिए, लेकिन नहीं मिल सका। पर्क्स के एरियर को लेकर सेफी कैट में गया। कैट ने फरवरी 2016 सेफी के पक्ष में फैसला दिया। लेकिन प्रबंधन और मंत्रालय हाईकोर्ट कोलकाता चला गया। वहां केस चल रहा है। कानूनी लड़ाई के बजाय आम सहमति से भुगतान का रास्ता निकालने के लिए सेफी दिल्ली पहुंचने की तैयारी में है।

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