मौत के मुंह से राहुल को बाहर निकालने के अभियान में भिलाई स्टील प्लांट रहा सहभागी

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पिरहिद ग्राम में पिछले शुक्रवार को शाम 4 बजे बोरवेल में एक बच्चे “राहुल” के गिर जाने की घटना हुई थी। बच्चे को 104 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार 14 जून को रात 12 बजे सुरक्षित निकाल लिया गया। 104 घंटे चले देश के सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन में भिलाई इस्पात संयंत्र के माइनिंग विशेषज्ञों ने खुदाई और बचाव के कार्य में अपने परामर्श और अनुभव प्रशासन को उपलब्ध कराकर इस अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया। संयंत्र के माइनिंग अभियंताओं ने जिला प्रशासन और इस अभियान के लीडर को समय-समय पर खुदाई से संबंधित तकनीकी जानकारी और आवश्यक संसाधन स्टील स्ट्रक्चर और एक्सपांशन केमिकल मोर्टार की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई और पूरे अभियान के दौरान निरन्तर मौजूद रहे।

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जांजगीर जिला प्रशासन ने भिलाई इस्पात संयंत्र की टीम का आभार प्रकट करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र ने रेस्क्यू में सहयोग देकर हमेशा की तरह सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह किया है। देश में जब भी प्राकृतिक आपदा या विपत्ति आई है तब सेल और भिलाई इस्पात संयंत्र ने शासन के साथ मिलकर पूरा सहयोग दिया है। भूकम्प हो या बाढ़ या फिर तूफान से होने वाली तबाही में भी सेल प्रबंधन ने हमेशा योगदान दिया है।

सफल रेस्क्यू के बाद बिलासपुर तक ग्रीन कॉरिडोर बना कर बच्चे को तत्काल बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। देश में इस प्रकार के दुर्घटना पश्चात चला यह सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन था। इस विशेष रेस्क्यू अभियान को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा इंडियन आर्मी ने युद्ध स्तर पर चलाकर सफलतापूर्वक राहुल की जान बचाई। यह एक बहुत लंबा व अनोखा अभियान था, जिसमें क्षण-क्षण में नई चुनौतियां आती जा रही थी। लगभग 65 फीट नीचे फंसे बच्चे तक पहुंचने के लिए रात-दिन खुदाई के बाद एक टनल के जरिये पहुंचना था। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन को संपर्क किया गया। संयंत्र प्रबंधन द्वारा परिस्थितियों का अंदाज लगाते हुए त्वरित कार्यवाही करते हुए हिर्री माइंस से माइनिंग विशेषज्ञों की दो टीमों और आवश्यक संसाधन के साथ तत्काल रवाना किया।

इन टीमों में उप महाप्रबंधक (खदान) सोमनाथ सिंह, सहायक महाप्रबंधक (माइनिंग) प्रदीप कुमार, सहायक महाप्रबंधक (माइनिंग) मिलिंद सहारे, वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल) सोनाभ पांडे, प्रबंधक (मैकेनिकल) लोकेश कुमार तथा प्रबंधक (मैकेनिकल) के राजू शामिल थे। इन टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में जरूरत के अनुसार स्ट्रक्चर स्टील तथा एक्पांशन केमिकल मोर्टार की उपलब्धता सुनिश्चित किया। पूरे 36 घंटे तक रेस्क्यू में शामिल होकर अभियान को सफल करने में अपना योगदान दिया।

इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा इंडियन आर्मी के साथ-साथ पुलिस प्रशासन, भिलाई इस्पात संयंत्र, एसईसीएल, बाल्को और अन्य संस्थानों के सदस्य सहयोग कर रहे थे। इसके साथ ही कई निजी कंपनियों और व्यक्तियों द्वारा भी पूरे अभियान को सहयोग किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जिला प्रशासन ने भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रति आभार व्यक्त किया और शामिल सदस्यों को व्यक्तिगत तौर पर धन्यवाद ज्ञापित किया।

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