BMS Office Live: शाम ढलते जुटते हैं थिंक टैंक, भिलाई से दिल्ली तक विरोधी यूनियनों का उड़ाया सुख-चैन

बात बीएसपी से शुरू हुई और राष्ट्रीय पटल तक पहुंची। पदाधिकारी चुनावी गुणा-गणित बैठा रहे थे। फीडबैक को तवज्जो दिया जा रहा था ताकि कम्युनिकेशन गैप न होने पाए।


अज़मत अली, भिलाई। भिलाई इस्पात मजदूर संघ-बीएमएस…। बीएमएस नाम ट्रेड यूनियन में जाना-पहचाना है। देश की सबसे बड़ी यूनियन होने का तमगा मिला हुआ है, लेकिन भिलाई में जद्दोजहद के दौर से गुजर रही है। एक बार मान्यता प्राप्त यूनियन का चुनाव जीतने की ललक पदाधिकारियों के चेहरे पर साफ नजर आ रही है। गुणा-गणित बैठाने से लेकर सियासी समीकरण सेट करने तक की रणनीति सेक्टर-5 यूनियन दफ्तर में बनाई जा रही है।

ये वही दफ्तर हैं, जहां से निकली चिंगारी बीएसपी वर्कर्स यूनियन के लिए भारी पड़ गई। भिलाई से दिल्ली तक का समीकरण बदल गया। इसी दफ्तर का हाल जानने के लिए सूचनाजी.कॉम पहुंचा। छोटे से कमरे में चलने वाले दफ्तर में सारे थिंक टैंक शाम ढलते ही जुटने शुरू हो चुके थे। किसी को 30 साल तक भाजपा की सियासत का अनुभव तो कोई संघ का अनुयायी…। बात बीएसपी से शुरू हुई और राष्ट्रीय पटल तक पहुंची।

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पदाधिकारी चुनावी गुणा-गणित बैठा रहे थे। फीडबैक को तवज्जो दी जा रही थी, ताकि कम्युनिकेशन गैप न होने पाए। कार्यकारी एवं चुनाव समिति के अध्यक्ष चन्ना केशवलू बैठक की कमान संभाले हुए थे। भीषण गर्मी के मौसम में सियासी पारा हाई दिखा। इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के दौरे की सफलता-विफलता से लेकर प्रचार अभियान तक की बातचीत होती रही। स्वभाव के मुताबिक शांत कार्यालय सचिव राधाकांत पांडेय हाथों रजिस्टर लिए अपनी जिम्मेदारी निभाते नजर आए। बैठक में जो आता…रजिस्टर सामने पाता और साइन करता।

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जब पांडेयजी बोले- साथ आओ,वरना झुनझुना बजाओ

रणनीति बनाने की बात हो या खर्चे की सचिव अरविंद कुमार पांडेय की आवाज गूंजती रही। बॉडी जेस्टर गवाही दे रहा था कि 30 साल का भाजपा में सियासी अनुभव है। एक स्थानीय यूनियन पर कटाक्ष करते हुए पदाधिकारियों को जानकारी दे रहे थे कि एक दिन अचानक नेताजी मिल गए…, बोले-कहां फंसे हो आओ साथ में मिलकर चुनाव लड़ते हैं। पांडेयजी ने विरोधी खेमे के नेताजी को जवाब दिया था कि एक राष्ट्रीय यूनियन और स्थानीय यूनियन में अंतर होता है। 30 साल तक भाजपा की सेवा किया अब कैसे दूसरी दर पर जाएं…। वर्कर का भला करना चाहते हैं तो मेरे साथ आ जाओ-कुछ मिल जाएगा, वरना झुनझुना बजाते रहोगो।

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दिल्ली तक तो हम ही पहुंचाए…

यूनियन गतिविधियों की जानकारी प्रेस रिलीज के माध्यम से जारी करने वाले एके माहौर ने सियासी तीर चलाया। मंथन के दौर में बोल गए कि कोई गलत ट्रैक में चल रहा है तो उसका साथ कैसे दिया जाए, भले हम उसका राजनीतिक समर्थन करते हों। सेवा हम लोग करके दिल्ली तक पहुंचाएं और फल किसी दूसरे को देने आएंगे तो कैसे बर्दाश्त किया जाएगा।

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सेक्टर-9 अस्पताल के पॉलिसी की उधेड़ी बखिया


काफी देर तक मौन धारण करने के बाद नंदिनी माइंस बीएमएस के अध्यक्ष अशोक शर्मा की जुबान खुली। सेक्टर-9 अस्पताल की समस्याओं पर पॉलिसी को उधेड़ना शुरू किया। अस्पताल समिति के सदस्य एबिसन वर्गीश कुछ का समर्थन करते रहे तो कुछ को विरोध भी। सही जानकारी से सबको अवगत कराया।

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पांच हजार पर्चे छपवाने का उठाया खर्च

समापन की ओर बैठक बढ़ रही थी, तभी महासचिव रवि की इंट्री हो गई। कार्यकारी अध्यक्ष चन्ना केशवलू ने प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगना शुरू किया। पम्पलेट कलर पर बात आई। सचिव अरविंद ने अपने खर्च पर 5 हजार पम्पलेट छपवाने का बीड़ा उठाया। डाक्टर सोम भारती ने ताली बजवाकर स्वागत किया। लिमिटेड रिसोर्स में ज्यादा से ज्यादा काम करने की सोच की तारीफ की।

वाट्सएप पर हर किसी से लें सुझाव

रवि सिंह ने सबकी बातों को सुनने के बाद कहा-शनिवार तक वाट्सएप पर सुझाव मांगें। कर्मचारी वेलफेयर से जुड़े सुझाव कोई भी यूनियन पदाधिकारियों को दे, ताकि उसे पर्चे में शामिल किया जाए। संयुक्त महामंत्री वशिष्ठ वर्मा और अरविंद पांडेय काना-फूंसी में मशगूल रहे। बीएमएस को होने वाले बड़े नुकसान से बचाने वाले संयुक्त महामंत्री महेंद्र सिंह भी सामने वालों की अधूरी बातों को पूरी करते नजर आए। एक-एक कर्मचारियों तक बीएमएस को ले जाने का फॉर्मूला बड़ी संजीदगी से दे रहे थे।

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