मोदी सरकार की उद्योग नीतियों पर भड़का बीएमएस, निजीकरण और विनिवेश के खिलाफ लाखों कर्मी घेरेंगे संसद

बीएमएस के उद्योग प्रभारी डीके पांडेय ने सूचनाजी.कॉम से बातचीत की। देश के औद्योगिक तीर्थ को बचाने पर जोर दिया।

अज़मत अली, भिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उद्योग नीतियों पर भारतीय मजदूर संघ-बीएमएस भड़क उठा है। सरकार के लगातार गलत फैसलों से नाराजगी बढ़ती जा रही है। विनिवेश और निजीकरण के मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन तेज किया जा रहा है।

स्टील, रेलवे, कोयला सहित सभी पब्लिक सेक्टर यूनिट में कर्मचारियों को एकजुट किया जा रहा। बैठकें, कन्वेंशन, नुक्कड़ सभा, गेट मीटिंग हो रही। नवंबर तक कर्मचारियों को जागरूक किया जाएगा। 17 नवंबर को देशभर के लाखों कर्मचारियों को लेकर बीएमएस नेता दिल्ली पहुंचेंगे। संसद भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करेंगे।

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देशभर के कारखानों और संस्थाओं में संसद घेराव को लेकर तैयारियां चल रही है। बीएमएस के उद्योग प्रभारी डीके पांडेय ने सूचनाजी.कॉम से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘देश के औद्योगिक तीर्थ को बचाने की जरूरत है। 17 नवंबर को दिल्ली में बड़ा प्रोग्राम करने जा रहे हैं।’

बीएमएस के आह्वान पर देशभर से लाखों कर्मचारी दिल्ली पहुंचेंगे। संसद भवन का घेराव करेंगे। सरकार से गुहार लगाई जा रही है, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है। इसलिए बीएमएस ने संसद घेराव का कार्यक्रम तय किया है।

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डीके पांडेय ने कहा, ‘निजीकरण और विनिवेश के खिलाफ हर कर्मचारी है। सरकार इसी दोनों विषयों पर कार्य कर रही है। रेलवे, रक्षा, स्टील आदि सेक्टर की कंपनियों को बचाने के लिए लगातार कन्वेंशन हो रहा। पिछले दिनों हैदराबाद में कन्वेशन कर चुके हैं। कर्मचारियों को जागरूक कर रहे हैं।

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पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को एकजुट कर रहे हैं, ताकि वे दिल्ली पहुंचें। सभी इकाइयों में कन्वेंशन होगा। जुलाई के बाद आंदोलन को तेज किया जाएगा। भीषण गर्मी को देखते हुए फिलहाल, आंदोलन की गति को धीमी रखी गई है। जुलाई के बाद इसकी रफ्तार तेज कर दी जाएगी।’

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