BSP Union Election 2022: दस यूनियनों की आंखों में आखिर कौन झोंक रहा धूल, वोटर महज 12 हजार, सदस्य संख्या 33 हजार, पिछले चुनाव में पड़े थे 14150 वोट

अज़मत अली, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट में ट्रेड यूनियन चुनाव 30 जुलाई को हो सकता है। सबकुछ सही रहा तो 29 जून को दोपहर एक बजे एचआरडी में इसकी आधारिक घोषणा कर दी जाएगी। बीएसपी के करीब 12 हजार कर्मचारी मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अब आपको यह जानकारी हैरानी होगी कि 12 हजार कर्मचारियों में से ज्यादा कर्मी दो-तीन यूनियनों के सदस्य हैं। आखिर कौन किस यूनियन की आंखों में धूल झोंक रहा…। यह बताना मुश्किल है, लेकिन इस बात में पूरी सच्चाई है। आंकड़ों की पड़ताल आप करेंगे तो माथा पकड़ लेंगे। साधारण शब्दों में आपको भी समझ में आ जाएगा।

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बीएसपी में करीब 12 हजार कर्मचारी हैं। साल 2019 के चुनाव में 14150 मत पड़े थे। कुल मतों का बंटवारा दस ट्रेड यूनियनों के बीच हुआ था। वहीं, यूनियनों की सदस्य संख्या की बात की जाए तो इसका कुल आंकड़ा 33056 तक पहुंच रहा है। सूचनाजी.कॉम ने इस आंकड़े को इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू, सीटू के संगठन सचिव डीवीएस रेड्डी, इस्पात श्रमिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष शेख महमूद, बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अतिरिक्त महासचिव शिव बहादुर सिंह, एटक के महासचिव विनोद कुमार सोनी, एचएमएस के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र, बीएमएस के महामंत्री रवि, एक्टू के महासचिव श्याम लाल साहू, लोइमू के महासचिव सुरेंद्र मोहंती, एसडब्ल्यूयू के अध्यक्ष नंद किशोर गुप्ता से प्राप्त किया। दस यूनियनों से मिले आंकड़ों को जोड़ने पर कुल मतदाताओं से तीन गुणा ज्यादा है।

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आप भी जानिए यूनियनों की सदस्यता

इंटक: 5950
एचएमएस: 5300
सीटू: 4681
बीएसपी वर्कर्स यूनियन: 5500
बीएमएस: 3200
इस्पात श्रमिक मंच: 2500
एटक: 1000
एक्टू: 325
एसडब्ल्यूयू: 3900
लोइमू: 700
कुल सदस्य संख्या: 33056

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जानिए 2019 के चुनाव में इन्हें मिला वोट

4447: इंटक
3840: सीटू
1879: बीएमएस
1663: इस्पात श्रमिक मंच
1370: बीएसपी वर्कर्स यूनियन
472: एचएमएस
200: स्टील वर्कर्स यूनियन
156: लोइमू
93: एटक
40: एक्टू
14150: कुल वोट

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आप भी जानिए क्या होता है मान्यता के लिए गुप्त मतदान

भिलाई इस्पात संयंत्र में यूनियन को मान्यता देने के लिए सदस्यता जांच के लिए गुप्त मतदान होने वाला है। 10 यूनियनें भाग ले रही हैं, जिसमें मतपत्र में 10 यूनियनों का नाम एवं उसके सामने उसका चुनाव चिन्ह होगा। कर्मी जिस यूनियन को भी पसंद करते हैं, उसे अपना वोट देंगे। एक मतपत्र पर एक से ज्यादा यूनियन को अपना वोट देने पर वह मतपत्र अमान्य माना जाएगा। मतगणना पश्चात जिस भी यूनियन को सर्वाधिक वोट मिलेगा, उस यूनियन को प्रबंधन दो साल के लिए मान्यता देगा।

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क्यों करवाता है केंद्रीय श्रम मंत्रालय का श्रम विभाग गुप्त मतदान

हर साल सभी रजिस्टर्ड यूनियनें अपना वार्षिक विवरण रजिस्टार आफ ट्रेड यूनियन को प्रस्तुत करती है, उस पर नजर डालें तो पता चलेगा कि सभी यूनियनों के द्वारा रजिस्टार को दिए गए सदस्यता संख्या का कुल योग संयंत्र में काम करने वाले कर्मियों से कहीं ज्यादा होता है। ऐसे में कर्मी किस यूनियन के पक्ष में ज्यादा है। इसे जांच करने के लिए केंद्रीय श्रम विभाग के पास गुप्त मतदान ही एकमात्र तरीका है, ताकि सर्वाधिक कर्मी पसंद करने वाले यूनियन को 2 वर्ष के लिए मान्यता दिया जा सके।

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पहले इस तरह मिलती थी यूनियन को मान्यता

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ बंटवारा के जमाने में एमपी आईआर एक्ट हुआ करता था, जो छत्तीसगढ़ बनने के बाद सीजी आईआर एक्ट में बदल गया। इस एक्ट में जिस यूनियन की सदस्यता रजिस्ट्रार के पास ज्यादा सदस्यता दर्ज होती थी, उसे ही मान्यता दे दिया जाता था। एक बार जिस यूनियन को मान्यता मिल जाता था, उसके बाद यदि किसी दूसरे यूनियन के द्वारा उससे ज्यादा सदस्यता दर्ज करवाने तथा मान्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश किया जाता था तो रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड यूनियन द्वारा सदस्यता की जांच के नाम पर सदस्यता का सेंपलिंग लेकर प्रबंधन एवं कहीं-कहीं पर तो मान्यता यूनियन के सदस्यों के सामने भी सदस्यों को बुलाकर पूछा जाता था। प्रबंधन एवं मान्यता यूनियन के सदस्यों के सामने कर्मी दावा पेश करने से डरते थे, जिसके कारण पहले से मान्यता में चली आ रही यूनियन ही मान्यता में बरकरार रहती थी।

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कर्मियों का हक है गुप्त मतदान से अपने पसंदीदा यूनियन को चुनना

सीटू के संगठन सचिव डीवीएस रेड्डी कहते हैं कि सीटू शुरू से ही गुप्त मतदान के द्वारा यूनियन को मान्यता देने के पक्ष में रहा है और लंबे संघर्ष के बाद कर्मियों को यह हक हासिल हुआ है। इसीलिए कर्मियों को गुप्त मतदान द्वारा अपने पसंद का यूनियन चुनना चाहिए, ताकि कर्मियों के द्वारा चुना हुआ यूनियन मान्यता में आकर 2 साल तक कर्मियों का प्रतिनिधित्व कर सके। कर्मियों के हक में जायज मांगों को उठाकर उन्हें हासिल करें, बल्कि उन मांगों के पूरा न होने पर अपने जायज हकों के लिए संघर्षों को तेज करें। एचएमएस के महासचिव प्रमोद मिश्र ने कहा कि 2021 की सदस्यता सूची के मुताबिक 5300 सदस्य हैं।

बीडब्ल्यूयू के अतिरिक्त महासचिव शिव बहादुर सिंह ने कहा कि कई कर्मचारी अलग-अलग यूनियनों की सदस्यता लिए रहते हैं। यह बात जग जाहिर है। वहीं, एटक के महासचिव विनोद कुमार सोनी बोले-यह सब आंकड़ों का खेल है। लोइमू के सुरेंद्र मोहंती ने बेबाकी से कहा कि हमारी यूनियन में ठेका मजदूर भी सदस्य हैं। लेकिन नियमित कर्मचारी 700 हैं।

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चुनाव में इन यूनियनों के बीच भिड़ंत

चुनाव में सीटू, इंटक, एचएमएस, बीएमएस, बीएसपी वर्कर्स यूनियन, एटक, एक्टू, लोकतांत्रिक इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन-लोइमू, इस्पात श्रमिक मंच हिस्सा लेगी। चुनावी समीकरण बनाने और बिगाड़ने लिए यूनियनों ने हर तरह का हथकंडा अपनाना शुरू कर दिया है। एक साथ मिल-बैठकर चाय की चुस्की लेने वाले भी मौजूदा हालात को देखते हुए सियासी तीर चला रहे हैं। एक-दूसरे की बखिया उधेड़ी जा रही है। चुनावी आंकड़ों को नजर में रखकर सियासी रहनुमा की चौखट पर हाजिरी तक लगाई जा रही है ताकि प्रचार अभियान में कोई कोर कसर न रह जाए।

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