बीएसपी कर्मचारियों ने राजनीतिक दलों को मुहब्बत से समझाया, संभल जाएं, वरना छह विधानसभा क्षेत्र में नहीं मिलेगा संभलने का मौका

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई टाउनशिप से कब्जेदारों को खदेड़ने की जंग में सिपहसलारों की संख्या बढ़ती जा रही है। कब्जे की राजनीति का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने एकजुटता की ओर कदम बढ़ा दिया है। अलग-अलग विचारधारा के बावजूद, कब्जे के खिलाफ सब एकजुट हो गए हैं। अधिकारियों का भी साथ मिल गया है। टाउनशिप के बदल रहे सियासी समीकरण को भांपते हुए ट्रेड यूनियन नेताओं ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दे दी है कि संभल जाएं, वरना छह विधानसभा क्षेत्र में संभलने का मौका नहीं मिल पाएगा।

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बीएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता के साथ आफिसर्स एसोसिएशन और सभी ट्रेड यूनियन के नेताओं की संयुक्त बैठक ने बड़ा गुल दिखा दिया है। कब्जेदारों के खिलाफ चल रही मुहिम को जारी रखने पर मुहर लगा दी है। बैठक में शामिल श्रमिक नेताओं ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि बीएसपी कर्मचारियों को सिर्फ वोट बैंक समझने की भूल कोई न करे। भिलाई इस्पात संयंत्र से 6 विधानसभा क्षेत्र प्रभावित होता है।

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भिलाई नगर, वैशाली नगर, दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, पाटन और अहिवारा विधानसभा क्षेत्र। यहां के कर्मचारी इन विधानसभा क्षेत्र में जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस बात को कोई जानता और समझता है। कर्मचारी बोले-भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी, अधिकारी और ठेका श्रमिक पार्षद से लेकर सांसद चुनने तक अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद इन लोगों को दरकिनार कर दिया जाता है, क्या यह लोग इनके वोटर नहीं हैं।

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चुनाव जीतते ही बदलता है भिलाई इस्पात संयंत्र को देखने का नजरिया

भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों का कहना है कि हम लोग अच्छे उम्मीदवार को चुनते हैं। लेकिन बाद में मायूसी हाथ लगती है। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि इसी भिलाई इस्पात संयंत्र को टेढ़ी नजरों से देखने लगते हैं। किसी जनप्रतिनिधि ने आज तक भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के भलाई के लिए कोई कार्य करने का प्रयास नहीं किया। सभी लोगों ने अपने वोट बैंक बढ़ाने के लिए भिलाई के अंदर अवैध कब्जा एवं अतिक्रमण को बढ़ावा दिया है। इससे भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी अधिकारी आक्रोशित हैं। कहीं न कहीं चुनाव के समय गुस्सा निश्चित रूप से उभरकर सामने आएगा।

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केंद्र और राज्य सरकार ने सुविधाओं से रखा वंचित

भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों एवं अधिकारियों का दर्द है कि केंद्र और राज्य सरकार से मायूसी ही हाथ लगती है। दोनों सरकारों ने सुविधाओं से वंचित रखा है। भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़े सभी संगठनों ने अवैध कब्जों को लेकर समर्थन दिया है। भिलाई इस्पात संयंत्र के सभी कर्मचारी-अधिकारी चाहते हैं कि यहां पर अवैध कब्जा न बढ़े।

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निगम चुनाव के साथ बढ़ते गए कब्जेदार

-श्रमिक नेताओं का कहना है कि जब से भिलाई इस्पात संयंत्र के टाउनशिप में नगर निगम का चुनाव चालू हुआ है, तब से यहां कब्जेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है।
-कर्मचारियों के निवास के बगल में अवैध कृत्य करने वालों का कब्जा बढ़ता चला गया। बीएसपी कर्मचारियों को उन लोगों के द्वारा परेशान करना चालू कर दिया।
-पार्षद से लेकर महापौर एवं विधायक एवं सांसद भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारियों-अधिकारियों को दोयम दर्जे के रूप में देखने लगे।
-श्रमिक नेताओं ने कहा कि उन्हें, यह पता होना चाहिए इन्हीं कर्मचारियों के बदौलत आज, भिलाई इस्पात संयंत्र चल रहा है। इसी से ही व्यापार हो रहा है और उन्हीं के वोटों से जन प्रतिनिधि चुने जा रहे हैं।
-नगर निगम बनने के बाद बीएसपी आवासों में अवैध कब्जे बढ़े। राज्य शासन द्वारा बड़े क्वार्टर में भी कब्जा किया गया।
-भिलाई इस्पात संयंत्र को चलाने के लिए प्रबंधन को जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन का सहयोग से ही इस संयंत्र को चलाया जा सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में ऐसा होता प्रतीत नहीं हो रहा है।
राज्य शासन के द्वारा नगर निगम में अतिक्रमण चलाया जाता तो जनप्रतिनिधि वहां सपोर्ट करते हैं, लेकिन भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा चलाने जाने पर उसका विरोध करते हैं, यह कैसी विडंबना है।

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कर्मचारियों ने सियासी पार्टियों के बारे में ये भी कहा…

-सेल के दूसरे इस्पात संयंत्रों में इतना राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं रहता। 2021 के हड़ताल में भी सरकार का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाया था, जबकि इस टाउनशिप एवं कर्मचारियों की सुरक्षा की जवाबदारी प्रशासन की थी।
-राज्य सरकार के बिजली बिल माफ योजना का बीएसपी कर्मचारियों को लाभ नहीं मिलता। इसके लिए जनप्रतिनिधि नहीं लड़ते। आखिर बीएसपी कर्मचारियों के बदौलत ही विधायक और सीएम तक चुने गए। राज्य में सरकार बनी। सांसद भी चुना गया।
-भिलाई नगर निगम में सबसे ज्यादा पार्षद कांग्रेस को टाउनशिप से दिया गया। फिर, जनप्रतिनिधियों का बीएसपी कर्मचारियों के हितों के लिए दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों।

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