इंटक पर बीएसपी वर्कर्स यूनियन हमलावर, बोला-कर्मियों को गिफ्ट नहीं चाहिए जायज अधिकार


सूचनाजी न्यूज, भिलाई। बीएसपी वर्कर्स यूनियन और इंटक के बीच वाक्य युद्ध तेज हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर थम नहीं रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र में श्रमिक संगठन के मान्यता चुनाव से पहले घमासान मचा हुआ है। बीएसपी वर्कर्स यूनियन का कहना है कि बीडब्ल्यूयू को मिल रहे कर्मियों के समर्थन से घाटे का वेतन समझौता करने वाली इंटक यूनियन बौखला गई है। बीडब्ल्यू पर अनर्गल आक्षेप लगा रही है। इंटक द्वारा लगाए गए आरोपों पर बीडब्ल्यू ने सीधा जवाब देते हुए कहा कि आने वाले इलेक्शन में कर्मचारी केंद्रीय यूनियनों की कर्मचारी विरोधी गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब देंगे।

अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता का कहना है कि जहां कर्मियों से किए वादे ढाई साल में पूरे नहीं किए हुए हैं। वही कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान कर्मचारियों के लिए रोस्टर ड्यूटी तक लागू करवा पाने में इंटक पूरी तरह असफल रही है, जिसके चलते ढाई सौ से ज्यादा कर्मचारियों की असामयिक मौत तक हो गई। उन कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति तो दूर समय पर आर्थिक सहायता तक ना दिला पाए। आज जब कर्मचारी स्वत: ही बीडब्ल्यूयू पर विश्वास व्यक्त कर रहे हैं, तब इंटक पदाधिकारियों की मीडिया में स्तर हीन बयानबाजी कर रहा है।
गिफ्ट नहीं जायज हक मांग रहे कर्मी

बीडब्ल्यूयू ने कहा कि कर्मचारियों को गिफ्ट नहीं, उनकी मेहनत का जायज हक मिलना चाहिए। रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद नॉन मोटिवेशनल इंसेंटिव स्कीम में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 20 से भी कम राशि को उपलब्धि बताना मानसिक दिवालियापन नहीं तो क्या है, जबकि कर्मचारियों को उत्पादन के एवज में सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त होना चाहिए।

क्या हुआ 10000 पे पाकिट बढ़ाने का वादा

बीडब्ल्यूयू ने इंटक को उसका घोषणा पत्र याद दिलाते हुए सवाल किया है कि 10000 पर पॉकेट बढ़ाने का वादा करने वाली यूनियन इंसेंटिव और अन्य भत्ते आखिर क्यों नहीं बढ़वा पाई। वर्ष 2007 से इंसेंटिव स्कीम रिवाइज नहीं हुई है। वहीं, 2014 से आवास भत्ता, रात्रिपाली भत्ता सहित बाकी आर्थिक लाभ वाली योजना किसकी सहमति से लटकी हुई है। इंटक ने न सिर्फ 10000 रुपया पे-पॉकेट बढ़ाने का झूठा वादा किया, बल्कि 10 प्रतिशत नुकसान वाला वेतन समझौता भी किया है।

प्रदर्शन पर ट्रांसफर और निलंबन

बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने आरोप लगाया कि भिलाई इस्पात संयंत्र में जब कोविड-19 से होती मौत और वेतन समझौते में देरी के चलते कर्मियों का आक्रोश फूटा, तब मान्यता प्राप्त यूनियन सहित केंद्रीय यूनियनों ने प्रदर्शनकारी कर्मियों को निलंबित और स्थानांतरण करने में प्रबंधन का पूरा सहयोग दिया। कर्मचारियों के विरोध को दबाने के लिए 6 अक्टूबर की एनजेसीएस मीटिंग में इन यूनियनों ने प्रबंधन से कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तक की मांग की, जो एनजेसीएस मीटिंग के मिनट्स में भी दर्ज है। वहीं, अप्रैल और जून में हुए आंदोलन में भिलाई में भी कार्यवाही के समर्थन ही किया है।

कर्मचारियों के हित में हड़ताल भी

हड़ताल में शामिल ना होने के आरोप का सीधा जवाब देते हुए बीडब्ल्यूयू ने कहा कि इंटक जैसी केंद्रीय यूनियन सिर्फ अपने आकाओं को खुश करने और राजनीतिक उद्देश्य पूर्ति के लिए हड़ताल करती है, जबकि 30 जून को वेतन के लिए होने वाली हड़ताल से इंटक ने अपने आपको अलग रखा था। बीडब्ल्यू ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए सफल हड़ताल की थी, बीडब्ल्यूयू कर्मचारियों के हित के साथ राजनीति नहीं करती है।

240 मौत का जिम्मेदार कौन

बीडब्ल्यूयू ने कोविड-19 के दौरान तत्कालीन मान्यता प्राप्त यूनियन के कार्यकलाप पर आपत्ति उठाते हुए 240 से अधिक मौतों के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया है। संक्रमण काल में जहां रोस्टर ड्यूटी लागू नहीं की गई। वहीं, विकलांग और महिलाओं को भी वर्क फ्रॉम होम दिलाने में यूनियन ने आवाज तक नहीं उठाई, बल्कि कर्मचारियों के विरोध को दबाने का ही काम किया।

न पूरी पेंशन न असीमित ग्रेच्युटी

बीडब्ल्यूयू ने पेंशन और ग्रेच्युटी सीलिंग पर इंटक को सीधा जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मान्यता काल में हुए प्रबंधन के हर फैसले से कर्मियों का अहित ही हुआ है। जहां उन्हें अभी तक पेंशन के मद में पूरा अंशदान नहीं मिला। वहीं, ग्रेच्युटी सीलिंग होने से 5 से 1000000 रुपए तक का सीधा नुकसान भी हुआ है। वर्ष 2014 में युवा कर्मियों की और 2021 में वरिष्ठ कर्मियों की ग्रेच्युटी सीलिंग में यूनियन सहयोग की भूमिका में दिख रही है।

भय का माहौल बनाने की कोशिश

बीएसपी वर्कर्स यूनियन का कहना है कि अपने मान्यता काल में पूरी तरह से नाकाम रहने के बाद इंटक डर की राजनीति कर रही है। इसलिए वह कर्मचारियों को दबाने और प्रताड़ित करने के लिए व्यवस्थाओं का उपयोग भी कर रही है। कर्मचारी अपने आर्थिक नुकसान के साथ-साथ प्रबंधन के दबाव को चलते हुए नौकरी करने मजबूर हैं।

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