CITU Union Live: ‘कर्मचारी समझ चुके झांसेबाजी-जुमलेबाजी, सीटू-वादे नहीं इरादे लेकर आ रहा…’

संगठन सचिव डीवीएस रेड्‌डी ने कहा-किसी की जान को जोखिम में डालकर लोहे का एक टुकड़ा बनाना भी मंजूर नहीं। असुरक्षित कार्य न करना है और न करने देना है।

अज़मत अली, भिलाई। सीटू दफ्तर में दाखिल होते ही सामने आपको पढ़ने को मिलेगा-अमर शहीदों को लाल सलाम…। शहीद वेदी पर लिखे यह अल्फाज संघर्षों की दास्तां बयां कर रहे। वेदी के ठीक पीछे, सेव पब्लिक सेक्टर का फ्लैक्स केंद्र सरकार की नीतियों की बखिया उधेड़ रहा…। यह सब नजारा हिंदुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन-सीटू के सेक्टर-4 दफ्तर में देखने को मिला। चुनावी माहौल में यूनियन दफ्तर का जायजा लेने के लिए सूचनाजी.कॉम पहुंचा।

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संगठन सचिव जोगाराव दफ्तर परिसर की व्यवस्था को सही करने में जुटे रहे। मीटिंग हॉल में सहायक महासचिव एसएसके पनिकर रजिस्टर लिए रोजमर्रा का लेखा-जोखा दर्ज करने में मशगूल रहे। दफ्तर में पदाधिकारी बारी-बारी से आते रहे। पनिकर जी हालचाल और परिवार के बारे में पूछते रहे। सह-सचिव जगन्नाथ त्रिवेदी की बेटी यूक्रेन-रूस वार के बीच पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाने की तैयारी में है, जिस पर चर्चा की गई।

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शांतनु मरकाम जब पहुंचे तो रिटायरमेंट की उम्र और चेहरे पर झुर्री को लेकर कइयों ने चुटकी ली। धीरी-धीरे बात परिवार से निकलकर सेक्टर-9 अस्पताल की व्यवस्था तक पहुंची। ऑपरेशन और अस्पताल की व्यवस्था पर बतकही होती रही…। करीब डेढ़ घंटे तक माथापच्ची के बाद पदाधिकारियों ने ताल ठोक कर कहा-बीएसपी के कर्मचारी मौजूदा मान्यता यूनियन व पाला बदलने वालों की झांसेबाजी और जुमलेबाजी को समझ चुके हैं। सीटू वादे नहीं इरादे लेकर आ रहा है…।

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जान जोखिम में डालकर लोहे का एक टुकड़ा बनाना भी मंजूर नहीं

-मुद्दे को डायवर्ट करते हुए संगठन सचिव टी.जोगाराव ने दबी जुबान कहा-कॉमरेड प्लांट विजिट का क्या हाल है। सामने से आवाज आई हम्म…। फिर क्या, एसएसके पनिकर ने सेफ्टी को लेकर चर्चा शुरू की।
-दो मान्यता कार्यकाल के दौरान सेफ्टी को लेकर किए गए कार्यों पर बखान किया। सीटू के कार्यकाल में प्रबंधन द्वारा सेफ्टी कमेटी नहीं बनाने और सभी यूनियन को शामिल करने की जिद का भी मुद्दा उछला।
-प्लांट में सुरक्षा और उत्पादन पर बात आते ही संगठन सचिव डीवीएस रेड्‌डी ने मोर्चा संभाल लिया…। कहा-किसी की जान को जोखिम में डालकर लोहे का एक टुकड़ा बनाना भी मंजूर नहीं। असुरक्षित कार्य न करना है और न करने देना है। दो लोग जिंदगी से हाथ धो बैठे। हम परिवार को पैसा और नौकरी दिला पा रहे हैं। लेकिन जो व्यक्ति चला गया, उसको कैसे लाएंगे।
-वहीं, प्रबंधन और कुछ यूनियनें ज्वाइंट सेफ्टी कमेटी बनाने की जिद पर थे। अगर, ज्वाइंट कमेटी बनी तो प्वाइंट स्कोरिंग के नाम पर खींचतान शुरू हो जाएगा। जो यूनियन मान्यता में है, उसको सेफ्टी देखना है।

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-सीटू के पहले कार्यकाल में 13 महीने तक सेफ्टी कमेटी बनने नहीं दी गई थी। 12 जून 2014 गैस हादसे के बाद जब दिल्ली से बत्ती पड़ी तो 31 जुलाई को कमेटी बनाई गई थी।
-इतना सुनते ही पनिकरजी तपाक से बोले-नाकाबिलों पर भरोसा करके बड़ी गलती की हम लोगों ने…। इंटक का नाम लिए बगैर डीवीएस रेड्‌डी ने कहा अब तक जितने वादे थे, वही बाद में जुमले बनते जा रहे हैं…। वादे नहीं इरादे होने चाहिए…। और सीटू इरादे लेकर आ रही है।
-सीटू का इरादा मजबूत है। जुमलेबाजी के बजाय सीटू के दो कार्यकाल में किए गए कार्यों और कर्मचारियों का विश्वास इसकी गवाही है। 39 महीने के एरियर को दिलाने का इरादा रखते हैं। जीतकर आएं या हारकर…हम अपनी जिम्मेदारी को नहीं छोड़ सकते।

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सेफ्टी के ममले में शून्यता की स्थिति में मान्यता यूनियन

हैरानी यह देखकर हुई कि यूनियन के दफ्तर में सीटू पदाधिकारी चुनाव और वोटरों को साधने के बजाय प्लांट सुरक्षा और उत्पादन पर माथापच्ची में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे थे। कार्याकारिणी सदस्य कमलेश चोपड़ा ने कहा-मान्यता प्राप्त यूनियन हादसे पर कोई सुझाव तक नहीं रखती है। सेफ्टी के ममले में शून्यता की स्थिति में आ गई है।
इसी बीच एक पदाधिकारी ने बतकही को रोकते हुए कहा-हम लोग भी अपनी बात सामने नहीं रख पाए। साइट तक गए, लेकिन वह बात सामने नहीं ला पाए। वहीं, मान्यता यूनियन इस विषय पर कभी गंभीर नहीं रही है। मुद्दा हादसे का है। हम लोगों को आक्रामक होकर इंसानी मौत की कीमत पर इस्पात उत्पादन का निर्धारण नहीं होने देना है।

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सेफ्टी को लेकर किसी तरह की जुमलेबाजी न करें

वर्किंग कमेटी सदस्य रवि शंकर साहू ने सीटू के दो कार्यकाल को याद किया। मौजूदा प्रबंधन की सोच पर कटाक्ष किया। कहा-प्लांट में होने वाली दुर्घटना को शून्य क्यों दिखाते हैं। जो हो गया है, उसको फोकस में आने देना चाहिए। केस स्टडी किया जाए। हादसों को दबाना खतरनाक होता है। इंज्युरी फॉर्म नहीं भरना और खतरनाक होता है। हमारे कार्यकाल में अधिकारी कंफर्ट नहीं रहते थे।

सीपीएफ दलालों पर सीटू ने लगाया लगाम

सचिव जेके वर्मा विरोधी यूनियनो पर काफी तिलमिलाए हुए थे। कहा-सीपीएफ दलालों और अधिकारियों के सामने पहले कर्मचारियों को मिमियाना पड़ता था। सीटू ने इस परंपरा को तोड़ा। अस्पताल के रेफर केस में दोहरा मापदंड अपनाया जाता था। कर्मचारियों को धांधली का सामना करना पड़ता था। स्कूल में दाखिला और आवास आवंटन में होने वाली धांधली पर सीटू ने रोक लगाई है। यह बात सबको पता है। नए कर्मचारियों ने उन धांधली को देखा तक नहीं है।

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इसी बीच सह-सचिव जगन्नाथ त्रिवेदी धीमी आवाज में बोले-इंटक की नाकामी पर हम चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हम अपने कामों पर लड़ते रहे हैं और इस बार भी लड़ रहे हैं। सीटू ने अपने समय में क्या-क्या किया, उस पर चुनाव जीतते हैं। सीटू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की कोशिश कथित लोगों ने की, लेकिन न्याय व्यवस्था के समाने सब ध्वस्त हो गए। भ्रष्ट सिस्टम का चेहरा भी बेनकाब हो गया।

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