आमजन है परेशान, सरकार का बिल्कुल नहीं किसी पर ध्यान, फर्जी मुकदमों में फंस रहे इंसान

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सितंबर अभियान के अंतिम दिन माकपा ने किया सिविक सेंटर बेरोजगार चौक पर प्रदर्शन।
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सूचनाजी न्यूज, भिलाई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ 14 सितंबर से 24 सितंबर तक चलाए जा रहे सितंबर अभियान के अंतिम दिन भिलाई में सिविक सेंटर बेरोजगार चौक पर प्रदर्शन किया गया। सितंबर अभियान के तहत भिलाई के कई क्षेत्रों में पर्चा वितरण किया गया। मरोदा क्षेत्र एसीसी जामुल क्षेत्र आदि जगह नुक्कड़ सभाएं की गई। सभा को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के साथी वकील भारती, शांत कुमार, अर्चना ध्रुव, अताउर्रहमान, डीवीएस रेड्डी, अशोक खातरकर ने संबोधित किया।
जून 2022 से तमाम वस्तुओं और सेवाओं के दाम में हुई है, 7. 01% की बढ़ोतरी
माकपा नेताओं ने कहा कि देश में खाद्यान्न वस्तुओं की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। जून 2022 में तमाम वस्तुओं और सेवाओं के दामों में 7.01% की बढ़ोतरी हुई है इसी माह खाद्य पदार्थों के दामों में 8% का इजाफा हुआ है 2021-22 में थोक दामों में 13% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले दशक में सबसे अधिक है पहली बार केंद्र सरकार ने आटा-दूध, दही-पनीर इत्यादि पर 5% जीएसटी लागू कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्र सरकार 4 तरह से सेस लागू कर 2021-22 में 4 लाख करोड़ रुपया इस सेस के माध्यम से वसूल किया है। गैस सिलेंडर के दाम में 1 साल में 30% की बढ़ोतरी हुई है।
श्रम कानूनों में किया गया है मजदूर विरोधी बदलाव
डीवीएस रेड्‌डी ने कहा कि मोदी सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खारिज करके इन्हें 4 लेबर कोड में बदल दिया है। यह कोड वेतन औद्योगिक संबंध सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर सुरक्षा स्वास्थ्य और काम की परिस्थितियां तय करते हैं। इनके द्वारा मालिकों को “काम पर रखो और हटा दो” का अधिकार मिल गया है। न्यूनतम मजदूरी तय करने के पैमाने बदल गए हैं। काम के घंटों को बढ़ा दिया गया है, नौकरी की सुरक्षा समाप्त हो रही है। ठेकेदारी प्रथा बढ़ रही है। पहले से ही सीमित सामाजिक सुरक्षा करीब समाप्त हो गई है। स्थाई कर्मचारियों के 54% लोग भविष्य निधि की सुरक्षा पेंशन स्वास्थ्य सेवाएं ग्रेच्युटी मातृत्व लाभ इत्यादि से वंचित है। नई पेंशन योजना ने कर्मचारियों की पेंशन राशि को कम करने के अलावा उनके पेंशन फंड को शेयर मार्केट में लगाने के बाद इस फंड के कम होने या समाप्त होने का खतरा पैदा कर दिया है।
सब कुछ बेच देना चाहती है केंद्र सरकार
अशोक खातरकर ने कहा कि “सार्वजनिक उद्योग पैदा होते हैं मरने के लिए” वाली समझ के साथ चलने वाले मोदी जी एवं उनकी सरकार सार्वजनिक उद्योगों को खत्म करने में तुली हुई है। उद्योगों में काम के बोझ के बढ़ाने के बावजूद मजदूरों को ऐसी मजदूरी मिल रही है जो उन्हें केवल जिंदा ही रखती है। राष्ट्रीय मुद्रीकरण नीति के जरिए सरकार बड़े ढांचागत संसाधन को 30 से 35 वर्षों के लिए निजी या विदेशी कंपनियों के हवाले कर रही है। रेलवे स्टेशनों को बेचा जा रहा है। एलआईसी के निजीकरण का प्रयास जारी है। रेलवे रक्षा विभाग बीएसएनएल इत्यादि की जमीन कौड़ियों के भाव पट्टे पर लुटा रही है। बैंक एवं अन्य उद्योगों का आउटसोर्सिंग व ठेका के जरिए निजीकरण किया जा रहा है।
वैज्ञानिक शिक्षा से दूर रखने की चल रही है साजिश
वक्ताओं ने कहा कि हमारा देश हमेशा से ही वैज्ञानिक एवं उन्नत दिमाग के लिए जाना जाता है। हमारे देश ने ना केवल विश्व को शून्य का आविष्कार कर गिनती सिखाया बल्कि मंगल ग्रह पर पहली बार में ही सफलता पूर्वक उपग्रह भेजने वाला विश्व का पहला देश बना विश्व के विकसित देशों में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर एवं शिक्षाविद के बड़े-बड़े औधे में हमारे देश के लोग शामिल हैं। ऐसे वैज्ञानिक सोच वाले देश को वैज्ञानिक शिक्षा से दूर कर दकियानूसी एवं अंधविश्वासी शिक्षा व्यवस्था की तरफ धकेलने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है, जिसके खिलाफ मजबूती से लड़ा जाना आवश्यक है। अन्यथा हमारे भावी पीढ़ी का भविष्य अंधकार में पड़ जाएगा।
जनतांत्रिक अधिकारों पर तेज हुए हैं हमले
माकपा नेता ने कहा कि सभी विरोध के स्वर कुचले जा रहे हैं। 3 साल के बाद भी भीमा कोरेगांव के बंदी जेल में हैं। कई राजनीतिक कैदियों, पत्रकार, छात्र इत्यादि कठोर कानूनों के अंतर्गत जेल में नजरबंद है। अत्याचार घोटाले और झूठी खबरों का पर्दाफाश करने वाले कई पत्रकार जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, गुजरात व अन्य राज्यों में जेलों में बंद हैं। अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों व महिलाओं के अधिकारों पर हमले जारी हैं। माकपा की मांग है कि झूठे मुकदमे डालकर जेलों में बंद किए छात्र पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए, बिलकिस बानो कांड के दोषियों को वापस जेल भेजा जाए, राजद्रोह कानून को रद्द किया जाए, ईडी-सीबीआई-एनआईए जैसे केंद्रीय संस्थाओं का दुरुपयोग बंद किया जाए।

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