दुर्गापुर स्टील प्लांट हादसा: एक और मजदूर की मौत, दो एचओडी सस्पेंड

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कर्मचारियों के बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए प्रबंधन ने दोषियों को सस्पेंड कर दिया है। प्रबंधन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
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-जख्मी तीन मजदूरों का इलाज मिशन हॉस्पिटल में चल रहा है।
-दुर्गापुर स्टील प्लांट में रविवार को भीषण हादसा हुआ था।
-दहकते हुए स्लैग का लैडल चार मजदूरों पर पलट गया था।
-ठेका मजदूर पल्टू बाउरी के ऊपर दहकता स्लैग गिरते ही वह तड़पते हुए दम तोड़ दिया था।

सूचनाजी न्यूज, दुर्गापुर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के दुर्गापुर स्टील प्लांट हादसे में जख्मी एक और मजदूर गोपी राम की मौत हो गई है। मंगलवार को मौत की खबर आते ही हड़कंप मच गया है। चार मजदूरों पर दहकता हुआ स्लैग गिरा था। रविवार को हुए हादसे में मौके पर ही एक मजदूर ने दम तोड़ दिया था। जख्मी तीन मजदूरों का उपचार मिशन अस्पताल में चल रहा था, जहां एक और मजदूर ने दम तोड़ दिया है। इधर-हादसे की गाज दो अधिकारियों पर गिरी है। शुरुआती जांच में ही दोषी मानते हुए दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। जांच के बाद अन्य अधिकारियों का नाम भी जुड़ सकता है।

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कर्मचारियों के बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए प्रबंधन ने एचओडी ट्रैफिक अमल गायन, एचओडी एमआरडी बिसई को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, प्रशांत की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है, जबकि प्रशांत बनर्जी को आक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। जख्मी 2 मजदूरों का इलाज मिशन हॉस्पिटल में चल रहा है। एक मजदूर की सेहत में सुधार है, जबकि 1 अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है।

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दुर्गापुर स्टील प्लांट में रविवार को भीषण हादसा हुआ था। दहकते हुए स्लैग का लैडल चार मजदूरों पर पलट गया था। ठेका मजदूर पल्टू बाउरी के ऊपर दहकता हुआ स्लैग गिरा था। स्लैग गिरते ही वह तड़पते हुए दम तोड़ दिया था। जबकि तीन जख्मी हो गए। चंद मिनटों में ही पल्टू का शव चिता जैसा जलकर राख हो गया। चंद हडिडयां ही बचीं।

करीब दो घंटे बाद बेलचा से हडिडयों को बाहर निकाला गया। सैकड़ों कर्मचारियों की नजरों के सामने यह मंजर था। हर किसी की आंखें डबडबा गई थी। यह मंजर याद कर एसडब्ल्यूएफआई के जनरल सेक्रेटरी ललित मोहन मिश्र बताते हैं कि रूह कांप गई थी। मुक्तिधाम में जिस तरह शव जलने का मंजर होता है, उसी तरह प्लांट के अंदर देखकर सब विचलित हो गए थे। दो-चार हड्‌डी ही बची थी।

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रेलवे लाइन पर काम होने की जानकारी ही नहीं थी…

दुर्गापुर स्टील प्लांट के कार्मिकों ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि प्रबंधन ने स्वीकारा है कि रेलवे लाइन पर चल रहे मेंटेनेंस की जानकारी उसे नहीं थी। रेलवे ट्रैक पर मेंटेनेंस की जानकारी न होने की वजह से फर्नेस से स्लैग निकलने के बाद उसे एसजीपी के लिए ले जाया जा रहा था।

इस बात की भनक तक नहीं थी कि जिस रास्ते में लैडल ले जा रहे हैं, वहां ठेका मजदूर काम कर रहे हैं। रेलवे लाइन पर झटके लगने की वजह से लैडल लुढक गया। वहीं, लैडल का लॉक भी खुला हुआ था। अगर, लॉक लगा होता तो लैडल पलटता नहीं। और मजदूरों के ऊपर दहकता हुआ स्लैग नहीं गिरता।

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लैडल की कमी से फुल भरते हैं मटेरियल

कर्मचारी यूनियन नेताओं का आरोप है कि लैडल की कमी की वजह से एसओपी का पालन नहीं किया जा रहा है। तय मानक से अधिक स्लैग या हॉट मेटल लैडल में लोड किया जा रहा है। डीएसपी प्रबंधन इस बात को बखूबी जानती है, लेकिन लैडल की किल्लत को दूर नहीं किया जा रहा है। हादसा के कारणों में यह भी शामिल है।

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