सेल में आधा-अधूरा वेतन समझौता और ठेका मजदूरों का हो रहा शोषण, दुर्गापुर स्टील प्लांट के कर्मी उतरे सड़क पर

सूचनाजी न्यूज, दुर्गापुर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारियों के आधे-अधूरे वेतन समझौते की आग थम नहीं रहीं है। बकाया एरियर और पे-स्केल पर अमल न होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। दुर्गापुर स्टील प्लांट के कर्मचारियों ने एक बार फिर वेतन समझौते आदि विषयों को लेकर प्रदर्शन किया। एचएमएस के बैनर तले मंगलवार सुबह दर्जनों कर्मचारी हाथों में झंडा और तख्तियां लिए प्रबंधन विरोधी नारेबाजी की। सेल प्रबधन पर दबाव बनाने के लिए कुछ देर तक सड़क को भी जाम किया। ड्यूटी जा रहे कर्मचारियों से समर्थन मांगा और इस आंदोलन को जारी रखने का दम भरा। वक्ताओं ने कहा कि जल्द से जल्द सेल प्रबंधन नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील इंडस्ट्री-एनजेसीएस की बैठक बुलाए।

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अधूरे वेतन समझौते को पूरा किया जाए। बकाया एरियर का मसला हल किया जाए। कर्मचारियों के शोषण को रोका जाए। वहीं, ठेका मजदूरों को न्यूनतम वेतन देने की मांग व शोषण पर भी प्रबंधन को घेरा गया। एचएमएस के अध्यक्ष तापस रॉय और जनरल सेक्रेटरी सुकांता रक्षित, अरुप दास, देवब्रत घोष, सौरव दास अधिकारी, सुभाशीष दत्ता, बिप्लब दास आदि ने कर्मचारियों को संबोधित किया।

सेल पेंशन स्कीम के संदर्भ में जारी सर्कुलर पर बवाल

इधर- सेल कॉरपोरेट ऑफिस की ओर से सेल पेंशन स्कीम के संदर्भ में एक सर्कुलर जारी किया गया है। इस सर्कुलर के अनुसार इसमें ऐसे संशोधन किए गए हैं, जो कर्मचारियों के ऊपर प्रहार है। भिलाई श्रमिक सभा-एचएमएस का मानना है कि इस सर्कुलर में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सेल प्रबंधन अपने कर्मचारियों को अपने परिवार का हिस्सा नहीं मानता। महासचिव प्रमोद मिश्र बताते हैं कि एनजेसीएस में हुए समझौते के अनुसार सेल द्वारा कर्मचारियों के लिए पेंशन अंशदान 6% तय किया गया था, क्योंकि ग्रेच्युटी की कोई सीमा नहीं थी। डीपी गाइड लाइन के अनुसार सेवानिवृत्ति के समय 30% का लाभ दिया जाना है, जिसमें पीएफ, ग्रेच्युटी, मेडिक्लेम, सेल पेंशन शामिल है। अधिकारियों की ग्रेच्युटी सीलिंग होने के कारण उन्हें एक जनवरी 2007 से 9% पेंशन अंशदान तय किया गया था।

1 अप्रैल 2021 के बाद से पेंशन अंशदान कर्मचारियों के पेंशन खाते में नहीं जमा

कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2012 से 6% पेंशन अंशदान तय किया गया था, जिसे एनजेसीएस में 2014 में हुए वेतन समझौते में शामिल किया गया था। सेल प्रबंधन द्वारा एनजेसीएस के समझौतों का उल्लंघन कर एक तरफा ग्रेच्युटी सीलिंग का आदेश जारी किया है। जब 1 नवंबर 2021 से ग्रेजुएटी सीलिंग का आदेश जारी हुआ तो 1 नवंबर 2021 के पश्चात सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का पेंशन अंशदान 1 जनवरी 2007 से 9% दिया जाना चाहिए था, लेकिन यह भी प्रक्रिया एनजेसीएस के माध्यम से ही होनी चाहिए थी।

जब एक बार समझौता एनजेसीएस में ग्रेजुएटी के लिए हो चुका है, तो दोबारा यदि इसमें कोई बदलाव किया जाना है तो एनजेसीएस में ही होना चाहिए था। लेकिन प्रबंधन ने 1 नवंबर 2021 से 9% पेंशन अंशदान देने का इस सर्कुलर में उल्लेख किया है, जो कर्मचारी हित में नहीं है। यदि इसमें संशोधन करना है तो 1 जनवरी 2007 से 9% पेंशन अंशदान दिया जाना चाहिए। प्रबंधन द्वारा 1 अप्रैल 2021 के पश्चात पेंशन अंशदान कर्मचारियों के पेंशन खाते में नहीं जमा किया है, जबकि इसे हर माह जमा किया जाना चाहिए।

ऐसा नहीं होने से कर्मचारियों को हर माह 10 से 12% ब्याज का नुकसान हो रहा है। इस प्रकार 18 माह हो चुके हैं, कितना नुकसान हुआ है इसका आकलन कर्मचारी स्वयं लगा सकते हैं। इस सर्कुलर में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ब्याज का दावा नहीं किया जा सकता है, जो कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है। इस सर्कुलर के अनुसार सेल प्रबंधन घाटे की अवस्था में पेंशन अंशदान देना बंद कर सकता है।

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