भिलाई, राउरकेला और बोकारो के स्टील पर टिका है भारत का स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस ‘उदयगिरी’ व ‘सूरत’, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्र को किया समर्पित

भारतीय नौसेना के दो अग्रिम मोर्चे के युद्धपोत तैयार। सात और पोतों का हो रहा निर्माण

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने भारत के स्वदेशी नौसेना युद्धपोतों आईएनएस ‘उदयगिरी’ और आईएनएस ‘सूरत’ के लिए 4300 टन विशेष स्टील की आपूर्ति की है। सेल द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले स्टील में डीएमआर 249-A ग्रेड प्लेट्स और एचआर शीट्स शामिल हैं। स्टील की पूरी मात्रा सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्टील प्लांट्स से सप्लाई की गई है। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत मिशन में महत्त्वपूर्ण योगदान देने और आयात को प्रतिस्थापित करने की दिशा में, देश के प्रयासों को मजबूत करने के सेल के निरंतर प्रयासों की दिशा में एक और कदम है।

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सेल ने इससे पहले भी आईएनएस विक्रांत, आईएनएस कमोर्टा सहित भारत की विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए विशेष गुणवत्ता वाले स्टील की आपूर्ति की है। स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के इतिहास में राष्ट्र 17 मई को एक ऐतिहासिक घटना का साक्षी बना। भारतीय नौसेना के दो अग्रिम मोर्चे के युद्धपोतों का लोकार्पण किया गया। आइएनएस उदयगिरी और सूरत का मुम्बई के मझगांव डॉक्स लिमिटेड (एमडीएल) में एक साथ राष्ट्र को समर्पित किया गया। दोनों कार्यक्रमों में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि रहे।

परियोजना 15बी श्रेणी के पोत भारतीय नौसेना के अगली पीढ़ी के स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर हैं, जिन्हें मझगांव डॉक्स लिमिटेड मुम्बई में बनाया जाता है। ‘सूरत’ परियोजना 15बी डिस्ट्रॉर श्रेणी का चौथा पोत है, जिसे पी15ए (कोलकाता श्रेणी) में कई परिवर्तन करके विकसित किया गया है। इसका नाम गुजरात की वाणिज्यिक राजधानी और मुम्बई के बाद पश्चिमी भारत के दूसरा सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र सूरत के नाम पर रखा गया है। सूरत शहर का समृद्ध समुद्री और पोत निर्माण इतिहास रहा है। यहां 16वीं और 18वीं शताब्दी में जहाज बनाये जाते थे, जो लंबे समय तक कार्यशील रहते थे, यानी जिनकी आयु 100 से अधिक की होती थी।

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‘सूरत’ का निर्माण ब्लॉक निर्माण पद्धित से हुआ

‘सूरत’ का निर्माण ब्लॉक निर्माण पद्धित से हुआ है, जिसमें जहाज की पेंदी को दो विभिन्न भौगोलिक स्थानों पर निर्मित किया गया है। बाद में इसे एमडीएल, मुम्बई में जोड़ा गया। इस श्रेणी के पहले पोत को 2021 में कमीशन किया गया था। दूसरे और तीसरे पोत का शुभारंभ किया गया तथा वे साजो-सामान/परीक्षण के विभिन्न चरणों में हैं।

उदयगिरि’ का नाम आंध्रप्रदेश की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा

उदयगिरि’ का नाम आंध्रप्रदेश की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह परियोजना 17ए का तीसरा फ्रिगेट है। इन्हें पी17 फ्रिगेट (शिवालिक श्रेणी) का अनुपालन करते हुए संशोधित स्टेल्थ विशेषताओं, उन्नत हथियारों, संवेदी उपकरणों और प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणालियों से लैस किया गया है। ‘उदयगिरि’ दरअसल पुराने ‘उदयगिरि’ का अवतार है, जो लियेंडर क्लास एएसडब्लू फ्रिगेट था। इस पोत ने 18 फरवरी 1976 से 24 अगस्त 2007 तक के तीन दशकों के दौरान असंख्य चुनौतीपूर्ण गतिविधियों का सामना करते हुये राष्ट्र की शानदार सेवा की।

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सात पोतों का निर्माण किया जा रहा

पी17 कार्यक्रम के तहत कुल सात पोतों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से चार पोत एमडीएल और तीन पोत जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। एकीकृत निर्माण, मेगा ब्लॉक आउटसोर्सिंग, परियोजना डाटा प्रबंधन/परियोजना जीवन-चक्र प्रबंधन (पीडीएम/पीएलएम) आदि जैसी नई अवधारणाओं तथा प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सबको स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन तथा निर्माण में पहली बार अपनाया जा रहा है। याद रहे कि पी17ए परियोजना के पहले दो जहाजों को एमडीएल और जीआरएसई में क्रमशः 2019 और 2020 में शुरू किया गया था।

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75 प्रतिशत ऑर्डर स्वदेशी कंपनियों को

15बी और पी17ए, दोनों जहाजों को डायरेक्टोरेट ऑफ नैवल डिजाइन (डीएनडी) में घरेलू स्तर पर डिजाइन किया गया था। यह देश के सभी युद्धपोतों की डिजाइन तैयार करने की गतिविधियों की गंगोत्री बना। शिपयार्ड में निर्माण गतिविधियों के दौरान उपकरणों और प्रणालियों के लिये लगभग 75 प्रतिशत ऑर्डर स्वदेशी कंपनियों को मिले, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल थे। यह देश की ‘आत्मनिर्भर’ भावना का सच्चा प्रमाण है।

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