इंटक-मंच आए साथ, तय हुई चुनावी बात, गठबंधन की पहली घोषणा-दिलाएंगे 66 माह का एरियर, एनईपीपी में पदनाम और डिप्लोमा इंजीनियर को जेई

अज़मत अली, भिलाई। सेल के कर्मचारियों के लिए गुरुवार का दिन तीन चीजों के लिए महत्वपूर्ण रहा। पहला, इंटक और इस्पात श्रमिक मंच के बीच गठबंधन की आधिकारिक घोषणा इंटक के राष्ट्रीय महासचिव संजय सिंह ने यूनियन दफ्तर में कर दी है। मंच के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इंटक के बैनर तले चुनाव लड़ने और संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने की घोषणा की। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि संजय सिंह ने 39 महीने के बकाया एरियर के साथ ही 66 माह का एक अन्य एरियर दिलाने का दावा कर दिया है। नया पे-स्ट्रक्चर लागू होने के बाद एक जनवरी 2017 से अब तक यानी 66 माह का एरियर भी दिलाने की बात बोलकर सबको हैरान कर दिया।

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संजय सिंह ने कहा कि एक जनवरी 2017 से जून 2021 का पे-स्ट्रक्चर लागू होगा तो उसका भी एरियर बनेगा। इस एरियर को दिलाने के लिए इंटक ने प्रयास शुरू कर दिया है। 19 जुलाई को होने वाली एनजेसीएस बैठक काफी महत्वपूर्ण है। इस बैठक में कर्मचारी हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे। संभव है कि इससे पहले ही कर्मचारियों को खुशखबरी मिल जाए। इंटक और मंच के पदाधिकारियों को दम भरते हुए संजय सिंह ने बेबाकी से कहा कि नया वेतनमान लागू होगा। इसके साथ ही बकाया एरियर आदि को दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

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तीसरी बात यह कि नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी की खामियों को सुधारकर कर्मचारीहित में इसे लाया जाएगा। कर्मचारियों से मिल रहे फीडबैक के आधार पर ऐसा कराया जाएगा। एनईपीपी में पदनाम को लागू कराया जाएगा। दिल्ली में फैसला लेकर सम्मानजनक पदनाम लागू कराया जाएगा। डिप्लोमा इंजीनियर पदनाम पर भी बात हुई। इस बात को इस्पात श्रमिक मंच के महासचिव राजेश अग्रवाल ने उठाया। नई दोस्ती की शुरुआत करते हुए कहा-खामियों को पहले दूर किया जाएगा। इसके लिए एनईपीपी की खामियों को सुधारकर कर्मचारियों को राहत दी जाएगी ताकि कर्मचारी हित को सिद्ध किया जा सके। ग्रेच्युटी सिलिंग को निरस्त किया कराया जाए।

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चाय की चुस्की, कंधे पर हाथ और बनती गई बात…

इस्पात श्रमिक मंच के महासचिव राजेश अग्रवाल से इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू चर्चा करते हुए।

इंटक दफ्तर में खुशी का माहौल रहा। एक ही कमरे में इंटक और मंच के पदाधिकारी मौजूद रहे। संजय सिंह ने बिंदुवार बातें की और मंच की तरफ से दिए गए सुझावों को डायरी में नोट किया। गठबंधन की आधिकारिक घोषणा के बाद वह रायपुर के लिए रवाना हो गए। इसके बाद मंच और इंटक के पदाधिकारी गले मिल…। एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू और मंच के महासचिव राजेश गल-बहियां करते हुए बाहर निकले। यूनियन दफ्तर के सामने चाय की दुकान पर चुस्की का दौर चला। कंधे पर हाथ रखकर कई रणनीति तक बनती गई। चुनाव प्रचार अभियान से लेकर दफ्तरों तक संयुक्त रूप से पदाधिकारियों का नाम दो दिन के भीतर घोषित कर दिया जाएगा।

बीडब्ल्यूयू-बीएमएस के पदाधिकारी संपर्क में

चाय की चुस्की लेने वाले दोनों यूनियन के पदाधिकारी संगठन पर फोकस किए हुए थे। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने धीरे से कहा-बीडब्ल्यूयू और बीएमएस के कुछ सदस्य गठबंधन के संपर्क में हैं। कुछ ऐसे पदाधिकारी हैं जो दोनों यूनियनों को छोड़कर जा चुके हैं, अब वे वापसी के मूड में आ चुके हैं। चर्चा यह भी रही कि बीएमएस में 80 प्रतिशत इंटक के ही सदस्य हैं। बीएमएस को यहां स्थापित कराने वाले अब साइड किए जा चुके हैं। वहीं, बीडब्ल्यूयू में रहते हुए गठबंधन के लिए काम करने वालों पर भी चर्चा होती रही। अब देखना यह है कि बदले समीकरण से गठबंधन को कितना फायदा होने वाला है।

मंच और इंटक के ये पदाधिकारी बने गवाह

इस्पात श्रमिक मंच से महासचिव राजेश अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष शेख महमूद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरडी देशलहरा, तामेश्वर ठाकुर, सर्वजीत सिंह, उप महासचिव किशोर मराठे, दीपक सोनी, विनोद दुबे, मुकुंद गंगवेर, राजेंद्र ढाकरवाल, गंजीर, सचिव मनोज साहू, रेज्जी नायर मौजूद रहे। इंटक से महासचिव एसके बघेल, अतिरिक्त महासचिव संजय साहू, उप महासचिव वंश बहादुर सिंह, वीवी राव, सीपी वर्मा, पूरन वर्मा, पियूषकर, चंद्रशेखर सिंह, तुरविंदर, विपिन बिहारी मिश्र, अनिमेष पसीने, सचिदानंद पांडेय मौजूद रहे।

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