नक्सल प्रभावित रावघाट माइंस के आसपास के गांवों में बदल रही लाइफ स्टाइल, 135 विस्थापितों को मिली नौकरी

नारायणपुर के आसपास इलाकों से आदिवासी लड़कियों का भविष्य संवार रहा बीएसपी। पीजी कॉलेज ऑफ नर्सिंग भिलाई और अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग अंजोरा में निःशुल्क पढ़ाया जा रहा है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र पिछले एक दशक से नक्सल प्रभावित क्षेत्र रावघाट में लाइफ स्टाइल बदल रहा है। जीवन स्तर में बदलाव लाने और लोगों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार लाने में लगा है। अंग्रेजी-माध्यम की शिक्षा डीएवी स्कूल में निःशुल्क दी जा रही है। नारायणपुर के आसपास इलाकों से आदिवासी लड़कियों का चयन किया जा रहा। उन्हें पीजी कॉलेज ऑफ नर्सिंग भिलाई और अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग अंजोरा में निःशुल्क पढ़ाया जा रहा है। इन बालिकाओं को जेएलएन अस्पताल और अनुसंधान केंद्र में इंटर्नशिप करने में भी सहायता प्रदान की जा रही है। इस प्रकार बीएसपी लोगों के कौशल को विकसित कर उन्हें रोजगार के लिए तैयार कर रही है।

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विस्थापित परिवारों के 135 युवाओं को बीएसपी ने दी नौकरी

बीएसपी ने सकारात्मक पहल करते हुए अंतागढ़ के रेलवे लाइन क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों को नौकरी दी। सदस्यों को आईटीआई प्रशिक्षण दिलवाकर उन्हें भिलाई इस्पात संयंत्र में एक सुरक्षित नौकरी के अवसर प्रदान कर रही है।

आज जहां यह रेलवे लाइन इस क्षेत्र में रहने वाली एक बड़ी आबादी की जीवन रेखा बन रही है। वहीं विस्थापित परिवारों के 135 युवाओं को बीएसपी में नौकरी दी। उनके जीवन में एक सार्थक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता रहा है।

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बीएसपी ने छात्रवृत्ति और आइटीआई का प्रशिक्षण दिया

कांकेर जिले के चोगैल के प्रमोद कुमार बीएसपी के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग में कार्यरत हैं। कहा-हमें अपने भविष्य के अवसरों के बारे में सलाह दी गई। 2000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति दी गई। आईटीआई प्रशिक्षण भी दिया गया। हमें बीएसपी में एक सुरक्षित नौकरी मिली है। इसके कारण हमारे परिवार के सदस्यों के जीवन में सार्थक बदलाव आया है।

नौकरी, सेवा और सुविधा के साथ मिला बेहतर माहौल

भानुप्रतापपुर के कच्छे निवासी गजेंद्र रवारे ने भी अपनी बात बताई। कहा-बस्तर में आईटीआई प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे बीएसपी में फिटर के रूप में शामिल हुए। हमें कंपनी क्वार्टर मिला। चिकित्सा सुविधाएं और काम करने का अच्छा माहौल दिया है। यह हमारे लिए वरदान साबित हुआ है।

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कभी नहीं सोचा था कि सुरक्षित नौकरी मिल सकती है

केवटी के बिनेश्वर नुरुति ने अपनी स्कूली शिक्षा अंतागढ़ से की। 2017 में बस्तर से इलेक्ट्रिकल ट्रेड में आईटीआई किया। 2019 में बीएसपी में नौकरी दी गई। उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतना बेहतर जीवन मिलेगा। और एक सुरक्षित नौकरी मिल सकती है, यह एक सपने के पूरा होने जैसा है।

विस्थापित 177 व्यक्तियों में से 135 को मिली नौकरी

नारायणपुर के निकट रेलवे लाइन क्षेत्र कांकेर-बालोद में विस्थापित हुए 177 व्यक्तियों में से 135 व्यक्तियों को रोजगार मिल चुका। विस्थापितों की यह सूची राज्य सरकार द्वारा बीएसपी के माइंस-रावघाट को प्रदान की जाती है। 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन छात्रों को आईटीआई करने के लिए बीएसपी द्वारा प्रायोजित किया जाता है। और फिर उन्हें बीएसपी में नौकरी के अवसर किये जाते है।

12 गांवों में महिला संस्थानों को ई-रिक्शा तक दिया

-ईडी (माइंस व रावघाट) मानस विश्वास और मुख्य महाप्रबंधक समीर स्वरूप के मार्गदर्शन में कार्य हो रहा है। महाप्रबंधक एसके सोनी, महाप्रबंधक अनुपम बिष्ट, सहायक महाप्रबंधक सचिन रंगारी और एएलडब्ल्यूओ दौलत राम पोयम का खास योगदान।
-बुनियादी ढांचा विकास भी एक ऐसा लक्षित क्षेत्र रहा है। जहां माइंस सीएसआर द्वारा निरंतर बेहतर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
-बीएसपी द्वारा सड़क निर्माण से लेकर सोलर लाइट तक लगाया गया। पानी के पंपों को स्थापित किया गया। पानी की टंकियों का निर्माण किया गया। 12 गांवों में महिला संस्थानों को ई-रिक्शा प्रदान करने तक अनेकों कदम उठाए गए।
-जात्रा सम्मेलन व देवगुडी का आयोजन कर आदिवासी क्षेत्र में स्थानीय मंदिरों का कायाकल्प किया गया। देवी-देवताओं की पवित्रता कायम रखने का कार्य भी बखूबी किया जा रहा है।

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दंडकवन, अंतागढ़ और खोड़गांव में मोबाइल डिस्पेंसरी

बीएसपी चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में रावघाट क्षेत्र के दंडकवन, अंतागढ़ और खोड़गांव में मोबाइल डिस्पेंसरी संचालित हैं। गंभीर बीमारी वाले लोगों को यहां से भिलाई भी रेफर किया जाता है। बीएसपी के सहयोग से अबुझमाड़ में ओपीडी भवन का निर्माण किया जा रहा है।

अंजरेल के खोड़गांव में डिस्पेंसरी स्थापित की गई है। अंतागढ़ में हाल ही में डिस्पेंसरी को पुनः प्रारंभ किया गया है। इस प्रकार भिलाई इस्पात संयंत्र न केवल भिलाई और उसके आसपास, बल्कि रावघाट के दूर-दराज के इलाकों के लोगों के जीवन में भी सार्थक परिवर्तन लाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है।

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