20 साल तक पानी में डूबा रहा चूना खदान, लक्ष्मण सेतु बनाकर निकाला पानी, अब 20 लाख टन से ज्यादा निकलेगा चूना, सेल को करोड़ों की बचत

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र की नंदिनी माइंस की पुनर्जीवित ब्लैक स्टोन क्वारी से 3182 टन बेहतर ग्रेड के चूना पत्थर का पहला रेक सोमवार को ब्लास्ट फर्नेस के चार्जिंग साइड पर स्थित अयस्क ट्रेंच (ओटी) में उतारा गया। भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता तथा ईडी (माइंस व रावघाट) मानस विश्वास ने हरी झंडी दिखाकर अनलोडिंग प्रक्रिया का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर ईडी (पीएंडए) केके सिंह, ईडी (प्रोजेक्ट) एके भट्टा, ईडी (वर्क्स) अंजनी कुमार, सीजीएम इंचार्ज (सेवाएं) एसएन आबिदी, जीएम इंचार्ज (आरएमडी) आई सेनगुप्ता तथा मुख्य महाप्रबंधक व संयंत्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाप्रबंधक प्रभारी (नंदिनी माइंस) पी एक्का ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा सहायक महाप्रबंधक डीएन रस्तोगी ने पुर्नजीवित ब्लैक स्टोन क्वारी के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इस कार्य के दौरान आनेवाली चुनौतियों व कठिनाइयों के निराकरण की विस्तृत जानकारी दी।

भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता तथा ईडी (माइंस व रावघाट) मानस विश्वास ने नंदिनी माइंस के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किए गए अथक प्रयासों की दिल खोलकर प्रशंसा की। विदित हो कि लगभग बीस वर्षों से पानी में डूबी नंदिनी के पुनर्जीवित ब्लैक स्टोन क्वारी से चूना पत्थर का परिवहन महत्वपूर्ण है।

इस बात का परिचायक है कि नंदिनी के पुनर्जीवित ब्लैक स्टोन क्वारी के पुनरुद्धार का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। जलमग्न ब्लैक स्टोन क्वारी से खनन को पुनर्जीवित करने के लिए बीएसपी के प्रबंधन ने पहल प्रारंभ की थी। यह पहल न केवल बेहतर ग्रेड चूना पत्थर के लिए संयंत्र की आवश्यकता को पूरा करने में मदद कर रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को भी पानी की आपूर्ति के माध्यम से लाभान्वित कर रही है।

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पूर्व महाप्रबंधक ने बनाया था मास्टर प्लान

बता दें कि नंदिनी खदान के पूर्व महाप्रबंधक बीबी सिंह ने करीब तीन साल पहले इस एरिया को खाली करने का प्लान बनाया था। यहां आखिरी बार सन 2000 में खनन हुआ था। बारिश का पानी भरने की वजह से प्रबंधन इस पर ध्यान ही नहीं दे सका। इक्यूपमेंट डूब गए थे। किसी ने पानी निकालने पर ध्यान ही नहीं दिया। इस एरिया को खाली करने के लिए बीबी सिंह ने मास्टर प्लान बनाया और रिजर्व वायर बनाया, जहां बारिश का पानी जमा किया गया है। इधर-उच्च गुणवत्ता का चूना निकालने का सिलसिला शुरू हो गया है।

पहले बनाया लक्ष्मण सेतु, फिर गांव वालों को मिला पानी

विदित हो कि नंदिनी माइंस का ब्लैक स्टोन क्वारी पिछले 20 वर्षों से पानी में डूबा हुआ था। इस क्वारी को पुनर्जीवित करने के लिए बीएसपी प्रबंधन द्वारा अभिनव पहल प्रारम्भ किया गया। इस क्वारी के बीचों-बीच वेस्ट मटेरियल से 900 मीटर लंबी सेतु का निर्माण किया गया, जिसे लक्ष्मण सेतु का नाम दिया गया। इस प्रकार लक्ष्मण सेतु से इस क्वारी को ए और बी भागों में बांटा गया। बी भाग में भरे हुए पानी को आस-पास के गांवों के तालाबों में भरा गया और इस बी भाग को पूर्णतः खाली किया गया। इस प्रकार क्वारी का यह भाग माइनिंग के लिए तैयार हो पाया।

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कोटेश्वर जैसा ही लाइम स्टोन है नंदिनी में

इस भाग में उच्च कोटि का लो-सिलिका ग्रेड लाइम स्टोन प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। नंदिनी के इस क्वारी से प्राप्त लाइम स्टोन मध्यप्रदेश स्थित कुटेश्वर माइंस से प्राप्त लाइम स्टोन जैसा ही उच्च दर्जे का अयस्क है। इस क्वारी से बीएसपी के उच्च दर्जे की लाइम स्टोन की जरूरत को पुरा करने में मदद मिलेगी।

फग्गन सिंह कुलस्ते ने की थी औपचारिक शुरुआत

आज इस खदान के बी ब्लॉक से प्राप्त चूना पत्थर से भरा रैक संयंत्र पहुंचा। इस प्रकार नंदिनी के ब्लैक स्टोन क्वारी जो कि पिछले 20 वर्षों से पानी में डूबी हुई थी, इससे आज बेहतर ग्रेड के चूना पत्थर का परिवहन प्रारंभ कर एक नई शुरूआत की गई। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने 20 अक्टूबर, 2021 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के नंदिनी माइन्स के इसी पुनर्जीवित ब्लैक स्टोन क्वारी की औपचारिक शुरुआत की थी।

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