लंबित मुद्दों पर तिलमिलाए नेताजी बोले-1985 में चेयरमैन-जीएम को करा चुके सस्पेंड, न्याय नहीं मिला तो सेल चेयरमैन के चेंबर पर करेंगे चढ़ाई

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के कर्मचारी लंबित मुद्दों से परेशान हो चुके हैं। आधा-अधूरा वेतन समझौता। 39 माह का बकाया एरियर…। पे-स्केल तय होने के बाद अमल न होना। नाइट एलाउंस सहित कई मामलों पर सुनवाई न होने से तिलमिलाए कर्मचारियों के समर्थन में बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के एक श्रमिक नेता ने बड़ा बयान दे दिया है। प्रबंधन के नजर में ये बेतुका बयान होगा, लेकिन कर्मचारियों के करीब हौसला बढ़ाने वाला है।

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स्टील मेटल एंड इंजीनियरिंग वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एचएमएस के कार्यकारी अध्यक्ष व क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ-एचएमएस के महामंत्री राजेंद्र सिंह ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि कर्मचारियों के सब्र का इम्तिहान सेल प्रबंधन ले रहा है। वेतन समझौता होने के बाद भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कर्मचारियों के सभी मुद्दों को हल करना होगा। अगर, सेल प्रबंधन ने ढिलाई बरती तो प्लांट चलाना मुश्किल हो जाएगा।

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200 कर्मचारियों को लेकर मैं खुद सेल चेयरमैन कार्यालय पर चढ़ाई कर दूंगा। कर्मचारियों के अधिकार के लिए अब आक्रामक रुख अपनाने का वक्त आ गया है। पे-स्केल पर फाइनल साइन, एक जनवरी 2017 से बकाया एरियर, नाइट शिफ्ट एलाउंस की मांग की जा रही है। अप्रैल 2020 से अधिकारियों को पर्क्स दिया गया है। कर्मचारियों को भी लाभ मिलना चाहिए। भारत का संविधान एक है। इस तरह का भेदभाव करने वाले सेल प्रबंधन को छोड़ेंगे नहीं…।

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राजेंद्र सिंह ने कहा कि सेल चेयरमैन और डायरेक्टर इंचार्ज के बारे में यूनियन के पर्चे में कम लिखे हैं, जो बातचीत हुई वह तो लिखे ही नहीं…। एनजेसीएस की बैठक बुलानी होगी, वरना प्लांट चलाना मुश्किल हो जाएगा। हर एक्शन का रिएक्शन होता है, इस बात को प्रबंधन जरूर समझ ले।

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जानिए आखिर क्यों तत्कालीन चेयरमैन व जीएम हुए थे सस्पेंड
बोकारो स्टील प्लांट (Bokaro steel plant) से 2016 में रिटायर राजेंद्र सिंह ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि हम जमीन के आदमी हैं। यहीं, जन्म लिए। मेहनत करके यहां तक आए। कर्मचारियों के लिए 1985 वाला संघर्ष एक बार फिर करने की नौबत आ गई है। प्रमोशन, इंसेंटिव की मांग, मानवता का व्यवहार, आवास की संख्या बढ़ाने, मेडिकल सुविधा बेहतर करने आदि मांगों को लेकर 1985 में 39 दिन तक हड़ताल की गई थी। हड़ताल से ही कर्मचारियों को लाभ मिला। प्रबंधन ने मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। हजारीबाग जेल तक गए। प्रबंधन ने 80 करोड़ का मुकदमा तक किया था। 39 दिन बाद बिहार के लेबर कमीशनर की मौजूदगी में समझौता हुआ। तत्कालीन सेल चेयरमेन और जीएम को सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। एमडी का तबादला बोकारो से राउरकेला हुआ था। आखिरकार जीत कर्मचारियों की हुई थी।

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कलस्टर प्रमोशन का लाभ मिलना हुआ शुरू
राजेंद्र सिंह के मुताबिक पहले एस-5 के बाद प्रमोशन में ढिलाई होती थी, जिसे चार साल में कराया गया। 1988 में बोकारो में कलस्टर प्रमोशन लागू हुआ। उसी समय ब्लास्ट फर्नेस, कोक ओवन आदि विभागों में अंडरवियर पहनकर प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों को सेफ्टी शू नहीं मिलता था, वह भी मिलना शुरू हुआ।

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