अधिकारियों, चिकित्सकों व सीएमओ में नया पदनाम लागू, इधर-पांच साल से डिप्लोमा इंजीनियर्स कर रहे इंतजार, सेल इकाइयों में 18 को पैदल मार्च


सूचनाजी न्यूज, भिलाई। वेतन समझौता होने के बाद भी अब तक जूनियर इंजीनियर-जेई पदनाम के मुद्दे पर कुछ भी नहीं हो सका। वस्तुस्थिति में परिवर्तन नहीं होना डिप्लोमा इंजिनियर्स के लिए निराशा का सबब बन गया है। उच्च प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कर मामले का जल्द से जल्द निवारण करने के लिए 18 मई की एक साइलेंट मार्च निकालने का निर्णय लिया गया है।

डेफी के अध्यक्ष नरेंद्र नाथ दास ने कहा कि 1 मई 2017 को मंत्रालय द्वारा दिए निर्देश के बाद पांच वर्ष बीत जाने पर भी डिप्लोमा इंजीनियरों को अब तक जेई का पदनाम नहीं दिया गया है, जिसे लेकर डिप्लोमा इंजीनियरों में निराशा व हताशा है। यह मुद्दा वेतन समझौते के पहले से ही डेफी द्वारा लगातार उठाया जा रहा है और अब वेतन समझौता होने के बावजूद इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है।

डेब अध्यक्ष सह डेफी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि 18 मई को भिलाई सहित सेल के सभी यूनिट्स के डिप्लोमा इंजीनियर्स एक साइलेंट मार्च निकालेंगे, जो कि जेई पदनाम पर बरती जा रही चुप्पी का प्रतीकात्मक रूप से विरोध होगा। मीटिंग में उपाध्यक्ष शिवशंकर तिवारी घनश्याम, उपमहासचिव मनीष यादव, अजय तमुरिया, सौरभ सुमन, नवीन मिश्र, रवि अरसे, राजकुमार, सूरज, सोनू मेहता आदि उपस्थित थे।

इस्पात मंत्रालय को जेई का आदेश दिए पांच साल गुजरा, अलग-अलग कमेटियों के बाद भी नतीजा शून्य

डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन भिलाई के उपाध्यक्ष मोहम्मद रफी ने कहा कि 1 मई 2017 के दिन इस्पात मंत्रालय द्वारा आदेश दिया गया था, जिसमें डिप्लोमा इंजीनियर्स को जेई देने का स्पष्ट निर्देश था। यह आदेश एकाएक नहीं आया था। एक लम्बी प्रक्रिया के तहत, इस्पात मंत्रालय द्वारा कमेटी बनाकर इस मांग का आधार देखा गया। सेल में डिप्लोमा इंजीनियरों की हालत देखी गई व अन्य पीएसयू से तुलना करने के बाद तब जाकर यह निर्देश दिया गया। डेब कोषाध्यक्ष रमेश कुमार ने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियरों को जेई देने 2017 में बनी एनआरसी कमेटी 2018 में प्रबंधन व यूनियन के बीच बनी सब कमेटी द्वारा भी अब तक कोई निराकरण इस बाबत नहीं हुआ है। मामला पूर्णतः नॉन फाइनेंसियल है। ऐसे में जल्द से जल्द इसका निवारण किया जाना चाहिए।

गिरते मनोबल के साथ कैसे पूरा करेंगे लक्ष्य

डेब महासचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि सरकारी से लेकर सभी पीएसयू कंपनी व निजी संयंत्रों में भी डिप्लोमा इंजीनियर्स प्रबंधन व वर्करो के बीच कुशन का कार्य डिप्लोमा इंजीनियर्स करते हैं। सुरक्षा व कार्य के समुचित सम्पादन में डिप्लोमा इंजीनियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका से आज कोई भी कंपनी मना नहीं कर सकती। ऐसे महत्वपूर्ण वर्ग को उनका अधिकार व सम्मान न मिलने से मनोबल टूटना तय है। डेब संगठन सचिव पवन साहू ने कहा कि जेई की मांग मंत्रालय के आदेश के बाद 2017 में ही पूर्ण हो जानी चाहिए थी, जिस प्रकार उत्पादन लक्ष्य पूरा करने यह वर्ग अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करता है, उसी प्रकार वह आशा करता है कि उनकी मांगों पर न्याय संगत निर्णय ससमय ले लिया जाए।

एनजेसीएस और गैर एनजेसीएस यूनियन ने भी किया निराश

डेब उपमहासचिव सुदर्शन ने कहा कि जेई मुद्दे पर सभी यूनियनों की उदासीनता से डिप्लोमा इंजीनियर्स निराश व नाराज है। सब कमेटी की बैठक 2018 से चलते 2022 हो गए। पांच प्रमुख यूनियन से 2-2 सदस्य सब कमेटी में सदस्य है, पर 4 साल होने के बावजूद जब ग़ैर वित्तीय मुद्दे भी निराकरित नहीं हो पाएंगे तो वित्तीय मुद्दे पर कर्मचारी क्या उम्मीद बांधे। भिलाई की गैर एनजेसीएस यूनियन जिसने दो वर्ष पूर्व उक्त मुद्दे पर साथ देकर हल कराने का आश्वासन दिया था।

उन्होंने भी कुछ नहीं किया। डेब उपाध्यक्ष उषाकर चौधरी ने कहा कि आगामी दिनों में भिलाई में मान्यता प्राप्त यूनियन के लिए चुनाव होने वाले है। और अब जाकर यूनियन जेई मुद्दे पर बयानबाजी कर रही है, परंतु इसे पूरा करने कोई आंदोलन अब तक नहीं किया गया। डिप्लोमा इंजीनियर्स किसी भी यूनियन का परंपरागत वोटर नहीं है। इस बार यह वर्ग सब कुछ देख समझकर ही निर्णय लेगा।

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